Dainik Navajyoti Logo
Friday 28th of January 2022
 
खास खबरें

कोरोना काल में भविष्य तलाशती शहर की युवा पीढ़ी

Wednesday, January 12, 2022 11:50 AM
युवा दिवस पर शहर के युवा।

 कोटा। उठो जागो और तब तक मत रूको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए। यह संदेश देने वाले युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद की आज जयंती है। जिसे राष्टÑीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। देश के विकास में युवा पीढ़ी का बहुत बड़ा योगदान होता है। किसी भी देश का भविष्य उस देश के युवाओं पर निर्भर होता है। कोविड-19 जहां सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया वहां उच्च शिक्षा भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। अचानक आई इस विपदा ने हर प्रकार की शिक्षा को प्रभावित किया। कोरोना के कारण कॉलेज बंद होने से कई विषयों की प्रैक्टिकल कक्षाएं प्रभावित हुई। रिसर्च के काम नहीं हो सके। परीक्षा नहीं होने से विद्यार्थियों को सीधे प्रमोट करने से विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। पिछले दो सालों से कोरोना की दो लहरों से जहां युवा पीढ़ी गुजरी, वहीं कोरोना की तीसरी लहर भी करीब आ चुकी है। लॉकडाउन और कर्फ्यू की स्थितियों का भी शहर के युवाओं ने सामना किया। शहर के युवाओं का कहना है कि ऐसा लगता है हम आगे बढ़ने की बजाय पीछे चले गए है। अभी भी बहुत से युवा असमंजस की स्थिति में है कि आगे क्या होगा? यह समय कॉलेज स्टूडेंट्स का परीक्षा के फॉर्म भरने का होता है, लेकिन अभी एडमिशन फॉर्म भरे जा रहे है। युवाओं ने सोचा नहीं था कि कोविड काल में इतनी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। आॅनलाइन शिक्षा में हम पीछे थे, लेकिन आॅनलाइन शिक्षा की ओर ही कदम बढ़ाने पड़े। शुरू में नया प्लेटफॉर्म होने से दिक्कतें आई। लेकिन फायदा यह हुआ कि नई चीजें सीखने के अवसर मिले जो शायद आॅफलाइन पढ़ाई में नहीं सीख पाते या इस तरफ ध्यान ही नहीं दे पाते। कई कोर्सेज, स्टडी मटैरियल, आॅनलाइन कॉम्पटीशन की तैयारी आदि कई नई चीजें एक्सप्लोर करने का मौका मिला। कई युवाओं ने कोरोना काल में समाज सेवा के कामों से भी जुड़े। युवा दिवस के अवसर पर दैनिक नवज्योति ने शहर के युवाओं से जाना कि कोरोना की पिछली दो लहरों का उन्होनें किस तरह सामना किया। अब तीसरी लहर भी आ रही है उसका किस तरह सामना करेंगे? कोरोना के इस दौर में भविष्य क्या देखते है और किस तरह प्रगति करेंगे।

 
कोविड नहीं आया था तब बाहर भी जाते थे। जब कोविड आया तो सरकार की गाइडलाइन कर पूरी तरह पालन किया। जब युवाओं को वैक्सीन लगवाने की बारी आई तो समय पर वैक्सीन लगवाई। क्योंकि उसके बिना जिंदगी को खतरे में डालना था। लॉकडाउन के कारण लाइफ प्रभावित हुई। आउटिंग आदि बिल्कुल बंद कर दी। सेकंड ईयर के एग्जाम स्थगित हो गए थे। लेकिन थर्ड ईयर के एग्जाम देने गए तो पूरी सावधानी रखी। पढ़ाई में भी परिवर्तन हुआ। आॅनलाइन स्टडीज शुरू हुई। समय की मांग को देखते हुए आॅनलाइन पढ़ाई सही थी। तीसरी लहर में भी पूरी प्रिकॉशन रख रहे है। आॅनलाइन कोचिंग कर रहे हैं आउटिंग बहुत कम कर दी है। जो भी बेस्ट कर सकते है करने की कोशिश कर रहे है। ऐसा लग नहीं रहा कि हालात अभी ठीक होंगे। यही प्लान है कि घर पर बैठ कर प्रोडक्टिव काम करें। यूनिफॉर्म स्टार्टअप-नए-नए वैन्चर्स में काम करने की सोच रहे है। आॅनलाइन बेस्ड वर्क पर ही फोकस है। क्योंकि यही सुनने में आ रहा है कि प्रमोट की गई डिग्री की वेल्यू नहीं होगी।
- साक्षी जैन, एम.कॉम स्टूडेंट
 
कोविड से सीखा कि हॉस्पिटल्स में एडमिनिस्ट्रेशन कितना जरूरी है। इसलिए मेने भविष्य को देखते हुए हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन का कोर्स ज्वाइन किया। कम्यूनिकेशन ओर सोशल स्किल अच्छी है तो मुझे किसी की मदद करना पसंद है कोविड टाइम में मेरे फादर पॉजीटिव आए थे। मैं भी पॉजीटिव थी। मुझे रियलाइज हुआ कि जितना पैनिक हो रहे है उसकी जरुरत नहीं है। ऐसे में पॉजिटिव नजरिया रहे। उस दौरान मेंने प्रॉब्लम फेस की। यहां मै अपनी मम्मी के साथ रहती हूं। भाई देहरादून में रहते हैं। पिता काम के सिलसिले में बाहर ज्यादातर रहते है। उस समय हम सब साथ थे। परिवार के साथ समय व्यतीत करने को मिला। उस समय नकारात्मक भी नजरिया था मगर पॉजिटिव देखे तो एक दूसरे को मोटीवेट किया। बी.एस.सी के अंतिम वर्ष में थी। प्रमोट नहीं हो सकते थे। पढ़ाई आॅनलाइन चल रही थी। कमी यह थी कि आॅफलाइन में अलग माहौल होता है एक दूसरे से सामने बात होती हैं जो आॅनलाइन में नहीं हो पाता। इस दौरान सिचुएशन के साथ एडजस्ट करना सीखा। यह समझा कि समय व परिस्थिति के साथ तालमेल जिसने बैठा लिया वह आगे निकल  गया।
- समीक्षा दीक्षित, हॉस्पीटल एडमिनिस्ट्रेशन स्टूडेंट
 
 
साइंस स्टूडेंट के साथ में स्पोर्ट्स प्लेयर भी हूं। साइंस में प्रैक्टिकल की आवश्यकता होती है। बिना पै्रक्टिकल किए विषय की डेप्थ में नॉलेज नहीं मिलती। दो साल से प्रैक्टिकल से वंचित रहूंगा। दो साल में एग्जाम में प्रैक्टिकल में बस फाइल जमा की गई। उस आधार पर नंबर दिए गए। प्रैक्टिकल होते भीड़ आती और कोरोना संक्र्रमण खतरा रहता। ऐसे ही स्पोर्ट्स में हुआ प्रॉपर कोच की ट्रेनिंग नहीं मिली। रेग्यूलर प्रैक्टिस करता था, कोर्ट में आकर वह भी लैक किया स्पोर्ट्स में और साइंस में जब तक प्रैक्टिस नहीं होगी कैसे समझ पाएंगे। ओमिक्रॉन की तीसरी लहर को देखते हुए गतिविधियां फिर बंद होने लगी है। 50 प्रतिशत क्षमता से कॉलेज खुलेंगे। विद्यार्थी सभी क्षेत्रों में पीछे हो गए है। प्रैक्टिकल भी वर्चुअल संभव नहीं है। फ्यूचर पीछे जाता जा रहा हैं सब लोग वैक्सीनेटेड हो गए हैं। सरकार मेडिकल की सुविधाएं बढ़ाए पूरे इंतजाम करें कि किसी तरह की समस्या नहीं आए। अभी सब वर्चुअल हो चुका है। सावधानियां रखी जाए तो स्टूडेंट पै्रक्टिकल ज्ञान ले सकें।
- विनय राज सिंह, साइंस स्टूडेंट
 
कोविड टाइम में यह नहीं पता था कि इतनी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। घर पर बैठना है बाहर नहीं जाना है। जैसे-जैसे समय निकला क्लासेज आॅनलाइन हो गई। यह नया प्लेटफॉर्म था बहुत ज्यादा दिक्कत आई। आॅनलाइन सिस्टम में ढलने में दिक्कत हो रही थी। फेस - टू - फेस टीचर से इंटरेक्ट नहीं कर रहे थे। यह दो साल प्रॉब्लम वाले थे। फिर धीरे-धीरे आॅनलाइन प्लेटफॉर्म में मेरी फील्ड से संबंधित कई आॅप्शन मिले। वह आॅप्शन पहले भी थे लेकिन तब आॅफलाइन क्लासेज से उन्हें एक्सप्लोर नहीं किया। आॅनलाइन पर आए तब कई आॅप्शन मिले। अच्छी वेबसाइट्स टीचर, स्टडी मटेरियल आॅनलाइन एक्सप्लोर किया। यह एकस्ट्रा एफटर््स हम आॅफलाइन में नहीं कर रहे थे। अब इतने अच्छे से तैयार हो गए है कि जो दिक्कतें पहले आई वह नहीं आएगी। घर भी बैठे है तो अपने समय को रिसोर्स को यूटिलाइज कर सकते है। तीसरी लहर में परेशानी नहीं आएगी क्योंकि काफी सीख चुके है। आॅनलाइन प्लेटफार्म में बेहतर क्लास में पढ़ रहे हैं। अभी तक जो कोचिंग आॅनलाइन नहीं आई थी जिनके लिए अन्य शहर जाना पड़ता वह भी आॅनलाइन आ गई। इसलिए भविष्य में प्रॉब्लम नहीं आएगी। 
- हिमांशी धाकड़, एल. एल. बी. फाइनल ईयर स्टूडेंट
 
कोविड काल में मैंने पढ़ाई को एन्जॉय किया। इस दौरान सेल्फ स्टडी के महत्व को समझा। अभी तक पढ़ाई एक पारंपरिक तरीके से ही करते आ रहे थे। कोविड ने सेल्फ स्टडी सिखाई। आॅनलाइन में लेक्चर्स रिकॉर्ड भी कर सकते है। कोई दिक्कत आती है तो आॅनलाइन या लेक्चरर के घर जाकर पूछ सकते है। इस बार भी एग्जाम देर से ही होंगे। एम.ए. के साथ नेट की भी तेयारी कर रहे है। पीएचडी में एडमिशन ले सके। आॅनलाइन कॉॅॅम्पटीशन की तैयारी कर रहे है। इसके लिए अनअकेडमी का सबस्क्रिप्शन लिया है। कोविड काल ने यह सिखाया कि स्वयं की जिंदगी को कैसे मैनेज करना हैं।
- दृष्टि राठौड़, एम.ए. फाइनल ईयर स्टूडेंट
 
कोरोना काल में स्टूडेन्ट्स बहुत परेशान हुए। किसी को माइग्रेशन सर्टिफिकेट व किसी को मार्कशीट की जरूरत थी। कोटा यूनिवर्सिटी का अध्यक्ष होने के कारण लॉकडाउन में पास बना हुआ था। स्टूडेंट को जो भी परेशानी आती वह फोन करने में उनको सहयोग करता रहा। पढ़ाई का शेड्यूल बिगड़ गया था। अभी भी जो माहौल चला रहा है उसे देखते हुए लॉ कॉलेज में एडमिशन डाला है। कॉम्पटीशन भी चल रहे हैं। कोविड काल में समाज सेवा के कार्यों से भी जुड़ा। जितनी समाज सेवा कर सकते थे की। तीसरी वेव के दौरान भी कोविड गाइडलाइन की पालना करते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र से संबंधित काम करेंगे। भविष्य में राजनीति में जाना है।
-चन्द्रशेखर नागर, एमए स्टूडेंट कोटा यूनिवर्सिटी 
 
 सरकार की कोविड गाइडलाइन की पालना की। आगे भी करेंगे कोविड़ वैक्सीन लगवाई और स्टूडेन्ट्स को भी इसे लगवाने के लिए समझाया। किसी भी तरह का प्रदर्शन उस दौरान नहीं किया जिससे कोरोना संक्रमण फैले। कॉलेज नियमित नहीं खुल रहे थे आॅनलाइन पढ़ाई हो रही थी। इसमे पढ़ाई का नुकसान हुआ। ऐसा लगता है चार साल पीछे चले गए है। विकास रुक गया है। विद्यार्थियों को प्रमोट चले गए है। विकास रुक गया है विद्यार्थियों को प्रमोट करना सही भी था और नहीं भी। इसमें पढ़ाई प्रभावित हुई। जब परीक्षा देने का समय आया। पढ़ने के साधन पर्याप्त नहीं मिलें। रेफरेंस के लिए किताबें नहीं थी। कॉलेज बंद थे। लाइब्रेरी से भी बुक्स नही मिल सकती थी। मार्केट में भी बुक्स नहीं थी। पढ़ाई की बहुत हानि हुई। दूसरी लहर जब आई बहुत उलझन में रहे। कभी कहा जाता एग्जाम नहीं होगें। फिर कहा जाता एग्जाम होगें। पहली बार तो कोरोना काल में प्रमोट कर दिया था। दूसरी लहर के दौरान कन्फर्म नहीं कहा कि पेपर होंगे या नहीं। अभी तक भी बी. ए. फर्स्ट ईयर के स्टूडेन्ट्स के एग्जाम नहीं हुए। ना वो प्रमोट हुए ना पास हुए। यह समय एग्जाम फॉर्म भरने का होता है। अभी एडमिशन फॉर्म भर रहे है। कॉलेज स्तर की पढ़ाई प्रॉपर मैनेज ही नहीं हुई। यूनिवर्सिटी ने 50 प्रतिशत बच्चों को फेल किया। - पवन मीणा, एम. ए. फाइनल ईयर स्टूडेंट
 
जब पहली वेव आई लॉकडाउन लग गया। इंजीनियरिंग का चौथा सेमेस्टर चल रहा था। तब तक इंजीनियरिंग का बेसिक ही पढ़ा था। आॅनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई । आॅनलाइन में दिक्कतें आई। कुछ सीनियर प्रोफेसर ने पढ़ाई का नुकसान नहीं हो तो लॉकडाउन लगने के 8 दिन बाद ही आॅनलाइन स्टडी शुरू कर दी। कुछ ने देर से शुरू की । छह सेमेस्टर में से चार सेमेस्टर की क्लासेस चली। दो सेमेस्टर की पढ़ाई यूट्यूब पर कोर्स ढूंढ़ कर की या सीनियर स्टूडेन्ट्स से नोट्स लेकर की। परीक्षाओं को लेकर भी दुविधा रही। पहली वेव कमजोर हुई तो परीक्षा हुई नहीं छठें सेमेस्टर की पढ़ाई शुरू हो गई। समझ नहीं आया कि पांचवा सेमेस्टर पढ़े या छठा। फिर दूसरी लहर आ गई कॉलेज नहीं गए। वर्ष 2021 के अंत में कॉलेज गए, लेकिन कक्षाएं नहीं लगी। यह कहा छठें सेमेस्टर में प्रमोट करेगे विद्यार्थियों का इंटरेस्ट कॉलेज आने में कम हो गया। प्रैक्टिकल हुए ही नहीं। इंजीनियरिंग में प्रैक्टिकल मुख्य होते है वह कर नहीं पा रहे थे। किताबी ज्ञान था। मशीनें देखी नहीं। यू-ट्यूब पर देखा और सीखा । अभी भी प्रैक्टिकल का बेसिक कमजोर है। पढ़ाई का बर्डन पड़ गया है पुराना सीखे या नए को सीखे। फाइनल ईयर जुलाई में खत्म हो जाएगा। भविष्य की अनिश्चितता है कि क्या होगा? जॉब के लिए इंटरव्यू में प्रैक्टिकल नॉलेज को लेकर क्या जवॉब देगें। कैसे करेगें? रिविजन करें या फिर प्राइवेट नॉलेज प्रैक्टिकल की लेकर आगे बढ़े। फिर लगता है एक साल ड्रॉप हो जाएगा। तीन सेमेस्टर की आॅनलाइन स्टडी की । सातवां सेमेस्टर पूरा पढ़ा प्रैक्टिकल चल रहे है एक स्टूडेंट के आरटीयू में पॉजिटिव आते ही सब बंद हो गया। प्रैक्टिकल के आॅनलाइन एग्जाम होंगे। पढ़ाई में फिर पिछड़ गए।
-गोकुल नायक, इंजीनियरिंग फाईनल ईयर स्टूडेंट, आरटीयू 

परफेक्ट जीवनसंगी की तलाश? राजस्थानी मैट्रिमोनी पर निःशुल्क  रजिस्ट्रेशन करे!

यह भी पढ़ें:

शिक्षा सुधार है रोजगार की कुंजी

केंद्र सरकार का कहना है 2018 में प्रोविडेंट फंड की सदस्यता लेने वाले श्रमिकों में 70 लाख की वृद्धि हुई है।

20/12/2021

फ्लैशबैक 2019 : जम्मू-कश्मीर बना केंद्र शासित प्रदेश, लागू हुआ देश का संविधान

साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भाजपा सरकार ने कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसले लिए। आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर बीते वर्ष जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 तथा धारा 35ए को हटाया और उसे दो केन्द्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया।

31/12/2019

लोहड़ी पर्व पर विशेष : राजा जयसिंह की दिल्ली हवेली, अब बंगला साहिब गुरुद्वारा

विस्थापित सिखों के लिए बसाया गया था राजापार्क

13/01/2022

उत्तरप्रदेश के इस शहर में रावण को देखा जाता है संकट मोचक की भूमिका में

देश भर में आयोजित रामलीलाओं में खलनायक की भूमिका में नजर आने वाला रावण उत्तर प्रदेश के इटावा के जसवंतनगर में संकट मोचक की भूमिका में पूजा जाता है। यहां रामलीला के समापन में रावण के पुतले को दहन करने के बजाय उसकी लकड़ियों को घर ले जा कर रखा जाता है ताकि साल भर उनके घर में विघ्न या कोई बाधा उत्पन्न न हो सके।

05/10/2019

अजब-गजब: मध्यप्रदेश के गौरया समुदाय के लोग दहेज के रूप में देते हैं 21 खतरनाक सांप

हमारे देश में दहेज लेना और दहेज देना अपराध है। इसके बावजूद हमारे समाज में बेटियों की शादी में दहेज देने की प्रथा पर कोई पाबंदी नहीं है।

17/12/2020

एक्सीडेंट के बाद कार में फंसी महिला, 6 दिन तक पीया बारिश का पानी

महिला की कार का घने जंगलों में एक्सीडेंट हो गया और वह छह दिन तक कार में ही फंसी रही। इस दौरान उसके फोन पर लगातार फोन आ रहे थे, लेकिन वह फोन रिसीव नहीं कर पा रही थी।

03/08/2019

87 वर्षीय 'सुपर फैन' से मिले विराट कोहली

मैच के दौरान 87 वर्षीय सुपर फैन चारुलता पटेल पूरे मैच के दौरान टीम इंडिया को चीयर करती रहीं।

03/07/2019