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कंक्रीट के बनते जंगल, रिहायशी इलाकों में वन्यजीवों की दस्तक

Saturday, December 14, 2019 10:45 AM
फाइल फोटो

जयपुर। प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों के जंगल में मानव के बढ़ते दखल, अतिक्रमण और कंक्रीट के बनते जंगल से वन्यजीव वहां से निकलकर शहर की ओर प्रवेश कर रहे हैं। पैंथर जंगल से भोजन-पानी की तलाश में शहरी हिस्सों में आते हैं। कई बार दहशत के चलते पैंथर लोगों को शिकार बना लेता है और अनेक बार ग्रामीण भी लाठियों से पीटकर वन्यजीव को मार देते हैं। इसमें सबसे बड़ी कमी वन महकमे की होती है, सूचना दर सूचना देने के बाद भी वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच नहीं पाती है और हादसा हो जाता है। दरअसल, पैंथर बिल्ली परिवार का जानवर है, जिसमें जबरदस्त फुर्ती और एकाग्रता होती है। वह 65 किलोमीटर प्रति घण्टे की रफ्तार से दौड़ता है और बड़ी चतुराई से अपने शिकार पर निगाह रखकर उसका शिकार करता है।

यहां हुए हादसे
चित्तौड़ में तो जंगल से आए पैंथर ने चरी (पानी पीने के लिए स्टील का मटका) में मुंह दे दिया, लेकिन बाद में वह अपना मुंह चरी में से नहीं निकाल पाया। बाद में बड़ी मुश्किल से उसके मुंह को बाहर निकाला गया था। इसी तरह अलवर जिले में नरभक्षी पैंथर ने वर्ष 2017-18 में दहशत ही फैला दी थी। कई जानवर, छोटे बच्चों और महिलाओं को पैंथर ने घायल कर दिया था। सरिस्का के पास सिलीबावड़ी गांव में नरभक्षी पैंथर का कई महिनों तक आतंक था। बाद में बड़ी मुश्किल से उसे टेंक्यूलाइज किया गया था।

झालाना के जंगल से आते रहते हैं पैंथर वॉक पर
झालाना के जंगल से आए दिन पैंथर कभी जवाहर लाल नेहरू मार्ग पर तो कभी चूलगिरी की पहाड़ियों के आस-पास के हिस्सों में आता रहता है। पिछले करीब छह माह से कभी स्मृति वन में तो कभी जेएलएन मार्ग पर पैंथर नमूदार होता रहता है। इतना ही नहीं रात के समय राहगिरों को भी पैंथर कई बार दिखाई दे जाता है। स्मृति वन में पैंथर के आने से स्मृति वन 4 नवम्बर से जनता के लिए बंद हैं। राजधानी में करीब एक दशक से पैंथर की गुलाबी नगरी में चहलकदमी बढ़ी है।

किसानों का खेती करना हुआ मुश्किल
मुकन्दरा टाइगर हिल्स से भी आए दिन वन्यजीव विशेषकर पैंथर जंगल से बाहर निकल जाते हैं। केशोरायपाटन विधायक मदन दिलावर ने नवज्योति को बताया कि उनके कुकरा खुर्द, दर्रा गांव, पीपलदा ग्राम पंचायत के बटवाटा गांव में आए दिन पैंथर दिखाई देता है। इससे लोगों का खेती करना भी मुश्किल हो गया है। लोग दिन में भी भारी दहशत में रहते हैं। वन्यजीवों के बाहर आने से किसान लोग कृषि कार्य भी भली प्रकार से नहीं कर पा रहे हैं। इसी तरह रावत भाटा रोड स्थित टेरिटोरियल के जंगल में पानी के जल स्त्रोत सूख जाने और भोजन की कमी के चलते पैंथर बाहर आ जाते हैं।

आखिर क्यों आते हैं जंगल से बाहर
 - वन्यजीव आमतौर पर भोजन और पानी की तलाश में जंगल से निकलकर शहरी क्षेत्रों में आ आते हैं।
 - जंगल में मानव की तेजी से बढ़ती दखल और जंगल में अतिक्रमण होने से जंगल छोटा पड़ने लगा है।
 - जब जंगल में पैंथर की  संख्या बढ़ जाती है तो पैंंथर की आपसी लड़ाई में भी चोटिल होकर या झगड़े से बचने के लिए बाहर निकल जाते हैं।
 - कई बार यह भी देखा गया है कि रास्ता भटक जाने के कारण भी पैंथर बाहर आ जाते हैं।
 - जंगल में पानी के स्त्रोत सूखने और वन्यजीवों के आहार में कमी भी बाहर निकलने का बड़ा कारण है।

वन्यजीव आमतौर पर भोजन-पानी की तलाश में ही जंगल से बाहर निकलता है। अनेक बार यह भी देखा गया है कि संख्या बढ़ने और टेरटरी के चक्कर में भी बाहर आ जाते हैं। - राजपाल सिंह, प्रख्यात वन्यजीव प्रेमी, राजस्थान

मुझे लगता है कि इंसान ने जंगल पर अपना कब्जा कर लिया, जहां पर वर्षों से वन्यजीव रहते थे, वहां पर मानव बस्ती बस गई, ऐसे में इंसान से बचने के लिए इंसानों की बस्ती में वन्यजीव आ जाते हैं। भोजन-पानी भी मुख्य कारण हैं। - बीएल जाजू, प्रदेश प्रभारी पीपल्स फॉर एनिमल्स, राजस्थान
 

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