Dainik Navajyoti Logo
Monday 1st of March 2021
 
खास खबरें

जब गांधी जी ने अपने नाम के आगे लिखा किसान

Wednesday, October 02, 2019 12:15 PM
महात्मा गांधी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का डेयरी और पशुपालन के प्रति बहुत गहरा लगाव था और उन्होंने वैज्ञानिक ढंग से पशुपालन का बेंगलुरु के तत्कालीन इम्पीरियल डेयरी इंस्टीट्यूट में प्रशिक्षण भी लिया था तथा साबरमती आश्रम में डेयरी फार्म की स्थापना की थी। बापू अस्वस्थ होने पर 1927 में बेंगलुरु में ठहरे थे। उस दौरान उन्होंने इम्पीरियल इंस्टीट्यूट (वर्तमान में राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान का दक्षिणी क्षेत्रीय स्टेशन) में 19 जून से 14 दिनों तक पशुपालन का प्रशिक्षण लिया था। उनके साथ पंडित मदन मोहन मालवीय ने भी प्रशिक्षण लिया था। मालवीय जी ने बाद में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में डेयरी की स्थापना की थी।

इम्पीरियल इंस्टीट्यूट के निदेशक के पी रमेश के अनुसार संस्थान की आगन्तुक पुस्तिका में महात्मा गांधी के नाम के साथ बैरिस्टर लिखा गया था, जिसे उन्होंने कलम से काट कर खुद को साबरमती का किसान लिखा था। उन्होंने कहा था कि बेंगलुरु में उन्होंने जो कुछ सीखा है उसे वह व्यवहार में जरुर लाएंगे। वर्ष 1927 में अंग्रेज डॉक्टर मोडाक ने बापू का ऑपरेशन किया था और उन्होंने गांधीजी को बेंगलुरु में रहने की सलाह दी थी। मैसूर के महाराजा ने गांधीजी का राज्य अतिथि के रूप में सत्कार किया था। बापू जिस कुमार पार्क के राजकीय अतिथि गृह में रुके थे, उसी के बगल में इम्पीरियल इंस्टीट्यूट के डेयरी विशेषज्ञ विलियम स्मिथ का कार्यालय था। इस अवसर का लाभ उठाकर गांधीजी तकरीबन हर शाम को स्मिथ से मिलने लगे। दोनों के बीच देश में पशुधन के नस्ल सुधार पर लम्बी चर्चा हुआ करती थी। गांधी जी को गांवों में पशुओं के नस्ल सुधार को लेकर गहरी दिलचस्पी थी। उन्होंने स्मिथ के सुझावों के आधार पर अपने पत्र यंग इंडिया में अनेक लेख लिखे। बाद में उनके विचार देश में लोकप्रिय होने लगे और पशु में नस्ल सुधार सरकार का प्रमुख कार्यक्रम भी बना। गांधी जी ने पिंजरापोल नस्ल के पशुओं में नस्ल सुधार में गहारी दिलचस्पी दिखाई। 

स्मिथ के साथ रोजाना की बातचीत से गांधी जी में पशुओं के प्रबंधन के बारे में प्रशिक्षण लेने की इच्छा उत्पन्न हुई, जिस पर उन्हें इंपीरियल डेयरी इंस्टीट्यूट फार्म जाने की सलाह दी गई। डॉक्टरों ने उन्हें सिर्फ पांच बजे से पौन घंटे के लिए उन्हें वहां जाने की अनुमति दी। वह एक डेयरी छात्र की तरह रोज शाम ठीक पांच बजे वहां पहुंच जाते थे, इस दौरान अपने साथ मालवीय जी को भी ले जाते थे। देश से एक समय जेबू नस्ल के पशुओं को विदेशों में निर्यात किया जाता था, जिसके खिलाफ धार्मिक एवं आर्थिक आधार पर एक आन्दोलन शुरू हो गया। ऐसी धारणा बन गई कि इन पशुओं को विदेशों में ले जाकर मांस के लिए वध कर दिया जाता है। यह भी कहा गया कि देश में इस सर्वश्रेष्ठ प्रजाति के पशु समाप्त हो जाएंगे। उस समय गुजरात में घी के दामों में बेतहाशा वृद्धि हुई थी। धारणा यह थी कि पशुओं के निर्यात के चलते घी के दाम बढ़ रहे हैं। गांधीजी इससे बहुत चिन्तित हुए लेकिन उन्हें बताया गया कि यह आन्दोलन निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा चलाया जा रहा है। इन पशुओं को विदेशों में मारा नहीं जाता है। गुजरात में घी के उत्पादन में अधिकांशत: भैंस के दूध का इस्तेमाल होता है। पशुओं के निर्यात से जेबू प्रजाति के समाप्त होने का कोई खतरा नहीं है। इस पर गांधीजी ने तथ्यों को जानने के बाद आन्दोलन को कोई समर्थन नहीं दिया, बल्कि उस आन्दोलन को समाप्त कराने का प्रयास किया।

बापू गाय से बेहद प्रेम करते थे, लेकिन वह गाय बनाम भैंस की धार्मिक भावनाओं के चक्कर में नहीं फंसे। उल्लेखनीय है कि देश की संसद में गो वध के खिलाफ कानून बनाने की बात गांधीजी की सलाह पर ही उठी तो केन्द्र सरकार ने इस मुद्दे पर गहन अध्ययन के लिए एक समिति गठित की थी। समिति ने सिफारिश की थी कि अच्छे नस्ल के पशुओं का वध प्रतिबंधित होना चाहिए। इससे पशुओं के वध को लेकर लोगों के विरोध को कम किया जा सकेगा। जब गांधीजी को अनौपचारिक रुप से इसकी जानकारी दी गयी तो उनकी टिप्पणी थी कि उन्होंने ऐसा ही सोचा था।  इससे गांधी के दर्शन एवं सिद्धांतों के व्यवहारिक पक्ष का पता चलता है।

यह भी पढ़ें:

हैप्पी फ्रेंडशिप डे: ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे...

आज के समय में मित्रता की परिभाषा बहुत भिन्न है। पहले दोस्ती होने पर ताउम्र तक निभाई जाती थी। आज की दोस्ती फायदा-नुकसान देखती है। स्वार्थ देखती है। पहले के समय में व्यक्ति सामाजिक ज्यादा था, इसलिए मित्रता को सर्वोपरि रखता था।

03/08/2019

इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स ने बनाई 12 किलो की फोल्डेबल साइकिल

शहर के इंजीनियरिंग प्रथम वर्ष के स्टूडेंट्स ने फोल्डेबल बाई साईकिल बनाने में सफलता प्राप्त की है। 12 किलोग्राम की यह साईकिल सिर्फ 4 स्क्वायर फीट क्षेत्रफल से भी कम क्षेत्रफल में आसानी से रखी जा सकती है।

27/02/2020

अजब गजब: देश में एक ऐसी जगह, जहां जाने वाला कभी नहीं लौटा वापस

क्या आप इस बात पर यकीन कर सकते हैं कि 21वीं सदी में भी भारत में एक ऐसी जगह है जहां जाने के बाद आज तक कोई वापस नहीं लौटा। हम बात कर रहे हैं इंडियन ओशन के नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड की। आप जानकर आश्चर्यचकित हो जाएंगे कि यहां इंसानों की एक प्रजाति रहती है। इसके बाद भी कोई व्यक्ति यहां जाने के बाद वापस लौटकर नहीं आता।

30/12/2020

जल संचय की अनूठी पहल, 'हाफ गिलास वाटर' अभियान की शुरुआत

भीलवाड़ा। जिले में जल संचय के लिए अनूठी पहल करते हुए हाफ गिलास वाटर अभियान की शुरुआत की गई है। जिला कलेक्टर भीलवाड़ा राजेन्द्र भट्ट ने जिले में जब आपको आधे गिलास पानी की प्यास हो तो आप पूरा गिलास पानी क्यों मंगाए और जितना पीएं उतना व्यर्थ क्यों बहाएं।

20/08/2019

किसानों के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए IAS अफसर 10 KM पैदल चलकर जाता है सब्जी खरीदने

वेस्ट गारो हिल्स में तैनात आईएएस अफसर रामसिंह ने हाल ही में अपने फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट से कुछ तस्वीरें पोस्ट की है। जिसमें उन्होंने बताया कि स्थानीय किसानों और उनके उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए हर दिन अपने दफ्तर से 10 किलोमीटर पैदल चलकर घर जाते हैं। इस दौरान रास्ते में वे सब्जियां और जरूरत के सामान खरीदते हैं।

26/09/2019

जानिए, कितना है इंफोसिस के सीईओ का सैलरी पैकेज

आईटी कंपनी इन्फोसिस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सलिल पारेख को बीते वित्त वर्ष 2018-19 में 24.67 करोड़ रुपए का सैलरी पैकेज मिला।

21/05/2019

'पैड वुमन ऑफ राजस्थान', 7 साल में एक लाख से अधिक सेनेटरी पैड किए वितरित

पूरे विश्व में 28 मई को मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है। देश-विदेश में इसी महीने सैकड़ों चर्चाएं और संगोष्ठियां आयोजित की जाती हैं, जहां महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर बात होती है। फिर भी कई ऐसे मुद्दे हैं जो आज भी महिलाओं से कोसो दूर हैं या यो कहें कि वो आज भी अनसुने, अनकहे व पूरी तरह से नजरअंदाज हैं।

25/05/2020