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ड्रोन कैमरे की मदद से मृत परिंदों को सांभर झील से निकाला बाहर, बोच्यूलिज्म से हुई मौत

Friday, November 22, 2019 07:45 AM
दूरबीन से झील में मृत पक्षियों को देखते हुए रेस्क्यू टीम के कर्मचारी।

जयपुर। सात समंदर पार से सांभरझील में आने वाले विदेशी परिन्दों की मौत ‘एवियन बोच्यूलिज्म’ से हुई है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली से आई विसरा की रिपोर्ट के अनुसार स्वस्थ परिन्दों ने बैक्टरियल इंफेक्शन से मरे हुए परिन्दों के साथ बोच्यूलिज्म नाम का खतरनाक टॉक्सीन खा लिया, जिससे हजारों की संख्या में असमय ही परिन्दों की मौत हो गई। परिन्दों की मौत के कारणों पर प्रकाश डालते हुए पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया ने बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत स्वयं इस मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं एवं इस सम्बन्ध में विभिन्न विभागों के साथ कई बैठकें भी कर चुके हैं। कटारिया ने बताया कि पशुपालन विभाग ने अब तक 735 बीमार पक्षियों का उपचार किया गया है, जिनमें से 368 जीवित हैं जबकि 36 को पुन: आकाश में छोड़ा जा चुका है।

आज भी नहीं थमा परिन्दों की मौत का सिलसिला
सांभरलेक और नागौर जिले के नावां में असमय ही मर रहे परिन्दों की मौत का सिलसिला आज भी नहीं थमा। सूत्रों के अनुसार नावां में 220 परिन्दों की लाश सड़ी-गली अवस्था में मिली, जबकि नौ परिन्दों को रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया। इसी तरह सांभरझील में 44 परिन्दें मृत पाए गए और 34 को बचा लिया गया। मृत परिन्दों की तलाश सांभरझील में ड्रोन कैमरे से की गई।

बोच्यूलिज्म को बोटलिज्म भी कहते हैं
परिन्दों की मौत बोच्यूलिज्म से हुई है, जिसे साधारण बोलचाल की भाषा में बोटलिज्म भी कहते हैं। राज्य के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की ओर से जारी प्रेस नोट में मौत का कारण बोच्यूलिज्म बताया गया है, जबकि आम बोलचाल की भाषा में इसे बोटलिज्म भी कहते हैं। पशुपालन विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. अजय कुमार गुप्ता ने बताया कि दोनों ही शब्द सही है, लेकिन बोच्यूलिज्म अधिक उपयुक्त शब्द हैं।

एनजीटी ने रिपोर्ट तलब की
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सांभर झील में 18 हजार से अधिक देशी-विदेशी पक्षियों की मौत पर संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट तलब की है। एनजीटी ने नेशनल वेटलैंड अथॉरिटी, राजस्थान स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जयपुर जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब किया है।

दैनिक नवज्योति ने परिन्दों की मौत के कारणों का पहले ही कर दिया खुलासा
परिन्दों की मौत के कारणों का दैनिक नवज्योति ने पहले ही खुलासा कर दिया था। 17 नवम्बर के अंक में ‘अब तक दस हजार से अधिक परिन्दें काल के गाल में समाए’ शीर्षक से प्रकाशित समाचार में बताया था कि मरने वाले परिन्दों में सबसे अधिक संख्या मांसाहारी परिन्दों की है, ऐसे में आरम्भिक तौर पर यह माना जा रहा है कि मृत परिन्दों के खाने से अन्य परिन्दों की मौत हुई है।’ इसी तरह दैनिक नवज्योति के 19 नवम्बर के अंक में ‘मृत परिन्दों को खाने से हुई पक्षियों की मौत’ शीर्षक से प्रकाशित समाचार में खुलासा किया गया था कि हजारों परिन्दों की मौत के पीछे कारणों में माना जा रहा है कि मृत पक्षियों को खाने से अधिक परिन्दों की मौत हुई। सूत्रों के अनुसार शुरू में कुछ परिन्दों की मौत इंफेक्शन से हुई, लेकिन ध्यान नहीं देने पर परिन्दों ने मृत परिन्दों को खा लिया, इस कारण चन्द दिनों में ही हजारों की संख्या में पक्षी मर गए।

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