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राजस्थान में अब तक 30 हजार दुर्लभ वस्तुओं का रजिस्ट्रेशन

Thursday, December 12, 2019 11:35 AM
फाइल फोटो

जयपुर। दुर्लभ वस्तुओं का कलेक्शन कर सहेजकर रखना हर किसी के बस की बात नहीं है। जयपुर ही नहीं बल्कि प्रदेश के कई जिलों में ऐसे संग्रहकर्ता मिल जाएंगे, जो किसी ना किसी एंटीक चीजों का कलेक्शन करते हैं। कई लोगों के पास तो 100 से 500 साल पुरानी दुर्लभ और एंटीक चीजों का संग्रह मिल जाएगा, जो उनके कलेक्शन को नायाब बनाता है, लेकिन क्या लोगों को पता है कि सौ से पांच साल पुराने दुर्लभ एंटीक चीजों का कलेक्शन का शौक रखते हैं। उनके लिए इन चीजों का रजिस्ट्रेशन करना बहुत जरूरी है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों के अनुसार पुरावशेषों और बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम 1972 की धारा 14 के तहत 100 से 500 साल पुरानी दुर्लभ वस्तुओं का रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक होता है।

एक बार रजिस्ट्रेशन की जरूरत
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (जयपुर सर्किल) के अधिकारियों के अनुसार किसी भी व्यक्ति के पास अगर इतने साल पुरानी दुर्लभ वस्तु है, तो उन्हें एक बार उस एंटीक वस्तु का रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत है। गत सितम्बर माह के दौरान एएसआई ने पटेल मार्ग स्थित कार्यालय में 15 दिनों का अभियान चलाया था, जिसके तहत करीब 300 से ज्यादा एंटीक वस्तुओं का रजिस्ट्रेशन किया गया था। अधिकारियों के अनुसार रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मिलने से दुर्लभ वस्तुओं की महत्ता बढ़ जाती है। इसके प्रति अब लोगों में रूचि भी बढ़ रही है। खासकर समय समय पर कैम्प आयोजित करने के बाद लोग भी इसके प्रति जागरूक हो रहे हैं।

सबसे ज्यादा पेंटिंग्स का रजिस्ट्रेशन
एएसआई (जयपुर सर्किल) के अधिकारियों के अनुसार जयपुर मण्डल के अन्तर्गत राजस्थान के 16 जिलों अलवर, जयपुर, दौसा, सीकर, झुंझूनू, चूरू, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, टोंक, कोटा, बारां और झालावाड़ से काफी संख्या में लोगों ने दुर्लभ और एंटीक वस्तुओं का रजिस्ट्रेशन कराने में रूचि दिखाई है। अधिकारियों के अनुसार 100 साल से ज्यादा जिन दुर्लभ वस्तुओं का रजिस्ट्रेशन किया जाता है, उनमें पत्थर, टेराकोटा, धातु, हाथीदांत या हड्डी से बनी प्रतिमा, पेपर, काष्ठ, कपड़े, सिल्क के ऊपर बनी चित्रकारी (मिनिएचर पेंटिंग्स और थंका), पाण्डुलिपि (हस्तलिपि) जिनमें किसी भी प्रकार की चित्रकारी या चित्रण किया गया हो, काष्ठ में चारों तरफ से उकेरी गई प्रतिमाएं शामिल हैं। प्रदेश में अभी तक तकरीबन 30 हजार से ज्यादा दुर्लभ और एंटीक वस्तुओं का रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या पेंटिंग्स की हैं, जो 100 से 500 साल पुरानी मानी गई हैं।

भारत में कहीं भी ले जाएं दुर्लभ वस्तु
अधिकारियों के अनुसार जिस व्यक्ति ने इतने सालों पुरानी दुर्लभ एवं एंटीक वस्तुओं का रजिस्टेÑशन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग में करा रखा है वे उन दुर्लभ वस्तुओं को भारत में कहीं भी ले जा सकते हैं। इससे पहले उन्हें विभाग को सूचना देनी होती है। अगर किसी व्यक्ति ने इनका रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया, वे उसे ले जाते हुए पकड़े जाते हैं, तो उन्हें दंड दिया जाता है साथ ही तीन माह में एंटीक वस्तु का रजिस्टेशन करने के लिए कहा जाता है। अधिकारियों के अनुसार इन दुर्लभ एवं एंटीक वस्तुओं को विदेश ले जाने की अनुमति नहीं दी जाती है।

सौ साल से ज्यादा पुरानी और दुर्लभ वस्तुओं का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। गत सितम्बर माह में 15 दिनों का कैम्प लगाया गया था, जिसमें 300 से ज्यादा दुर्लभ वस्तुओं का रजिस्ट्रेशन किया गया। इसके प्रति अब लोगों में रूचि बढ़ रही है। इसी का नतीजा है कि प्रदेश में अब तक 100 साल से अधिक पुरानी तकरीबन 30 हजार दुर्लभ वस्तुओं का रजिस्ट्रेशन हो चुका है।- प्यारेलाल मीणा, अधीक्षण पुरातत्वविद्, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, जयपुर मण्डल

 

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