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डाक टिकटों में दिख रही गुरुद्वारों की सुंदरता, डाक विभाग ने जारी किया 5 टिकटों का सेट

Monday, February 24, 2020 13:00 PM
डाक विभाग द्वारा जारी पांच डाक टिकटों का सेट।

जयपुर। चाहे त्यौहार हो या खेल या फिर प्रकृति भारतीय डाक विभाग ने समय-समय पर कुछ ऐसे डाक टिकट इन विषयों पर जारी करके नई युवा पीढ़ी को इनकी जानकारी लेने के लिए प्रेरित किया है। जिनके बारे में सबको जानना जरूरी है। डाक विभाग के ये स्टैम्प्स कलैक्शन करने वाले विशेषज्ञों को उन चीजों के मूल्य और इम्पोर्टेंन्स को दर्शाने का सही जरिया है। धार्मिक संस्कृति को बढ़ावा देने के मामले में पोस्टल डिपार्टमेंट पीछे नहीं रहा।

पिछले साल डिपार्टमेंट ने गुरु नानक देवजी के प्रकाश पर्व पर करतापुर कॉरीडोर को खोले जाने के इस ऐतिहासिक क्षण को डाक टिकट में उतारकर बहुत ही प्रेरणादायक कार्य किया है। 5 डाक टिकटों के साथ विभाग ने पूरा एक सेट जारी किया है, हर एक टिकट अपने आप में बेहतर है और सुंदर भी। इन टिकटों को स्टैम्प कलैक्शन करने वालों ने खरीदकर अपने कलैक्शन में रखा है। रामायण पर जारी किए गए डाक टिकट लोगों को इतना पसंद आया था कि जिन लोगों को टिकट खरीदने का शौक नहीं था उन्होंने भी इसे लिया। यह डाक टिकट जयपुर जीपीओ स्थित फिलैटली ब्यूरो में मौजूद है।

विशेषज्ञ की राय
वरिष्ठ डाक टिकट संग्रहकर्ता रितेन्द्र अग्रवाल ने गुरुनानक देवजी के प्रकाश पर्व पर जारी किए इन टिकटों के बारे में बताया कि यह टिकट मैंने भी लिया है। देखा जाए कि यह दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने का सुन्दर अवसर था। इतिहास में ऐसे अवसर बहुत कम मिलते हैं। भारत के डाक विभाग ने इस अवसर पर जो डाक टिकट जारी किए ये बहुत ही आकर्षण व सुन्दर है।

पांच डाक टिकट की शीट में पहला डाक टिकट गुरुद्वारा नानक लामा साहिब चुंगथांग उत्तरी सिक्किम : चुंगथांग ऐसा स्थान है जहां आस-पास के इलाके में पानी नहीं है, केवल इस क्षेत्र में इतना पानी है कि चावल की खेती होती है।

दूसरा
गुरुद्वारा दरबार साहिब डेरा बाबा नानक गुरुदासपुर : ये रावी नदी के तट पर है।

तीसरा
गुरुद्वारा जन्मस्थान ननकाना साहब : इस गुरुद्वारे को 19वीं शताब्दी में महाराणा रणजीत सिंह ने बनाया था जो पाकिस्तान में है।

चौथा
गुरुद्वारा बेर साहिब, सुल्तानपुर लोधी : गुरुद्वारा कालीबेन नदी के पास है जहां गुरुनानक देवजी अपना नहाना धोना करते थे। गुरुद्वारे की इमारत को कपूरथला के महाराजा जगतजीत सिंहजी ने बनवाया था। ये गुरुद्वारा 550वें प्रकाशपर्व का मुख्य केन्द्र था।

पांचवां
गुरुद्वारा नानक झीरा साहिब बीदर : ये दक्षिण भारत में स्थित है। ऐसा मानना है लोगों का कि जो गुरुद्वारे की पौड़िया है उसमें जो जल बहता है उसमें डुबकी लगाने से पाप धुलते हैं। बीदर में पानी की कमी थी। गुरुनानक देवजी ने पैर से मिट्टी हटाई तो बीदर में पानी निकल आया। इसके बाद से बीदर में पानी मिलने लगा पीने का।

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