Dainik Navajyoti Logo
Saturday 6th of June 2020
 
खास खबरें

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से जुड़ी कई योजनाएं आज भी अधूरी

Wednesday, October 02, 2019 12:05 PM
महात्मा गांधी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जीवन भर हिंदी के लिए लड़ते रहे, लेकिन पिछले 10 वर्षों से 'गांधी वांग्मय' हिंदी में उपलब्ध नहीं है और उनके 150वें जयंती वर्ष में यह फिर से प्रकाशित नहीं हो पाया है। इस बीच 100 खंडों में अंग्रेजी में प्रकाशित 'गांधी वांग्मय' की डीवीडी भी आ गया है और सम्पूर्ण सेट पेन ड्राइव में भी उपलब्ध हो गया है, लेकिन हिंदी में यह आज तक उपलब्ध नहीं हो पाया है। इतना ही नहीं साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष विश्वनाथ तिवारी के संपादन में गांधी पर भारतीय भाषाओं में लिखे गए प्रमुख लोगों के संस्मरण और कविताओं का एक संग्रह भी 150वें जयंती वर्ष में प्रकाशित होने वाला था, लेकिन वह आज तक नहीं निकल सका है, क्योंकि कॉपीराइट की अनुमति आज तक उन्हें नहीं मिल पाई और वह योजना खटाई में पड़ गई।   

ललित कला अकादमी ने संस्कृति मंत्रालय को गांधी जी से सम्बंधित कई प्रस्ताव भेजे, लेकिन 150वां जयंती वर्ष बीत जाने तक कोई स्वीकृति नहीं मिल पाई। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार 'गांधी वांग्मय' का संपूर्ण सेट 1998 में प्रकाशित हुआ था, लेकिन करीब 10 वर्षों से वह अनुपलब्ध है। उसे दोबारा छापने का काम चल रहा है और उम्मीद है कि इस वर्ष के अंत तक आ जाएगा। सूत्रों का कहना है कि प्रकाशन विभाग ने गांधी जी की 150वीं जयंती के मौके पर उन पर 21  किताबें फिर से प्रकाशित की हैं। जिनमें 16 हिंदी में हैं। इनमें 'चंपारण पुराण', 'गांधी शतदल', गांधी की प्रार्थना सभा के भाषण और गांधी के संस्मरण प्रमुख हैं।

'गांधी वांग्मय' प्रकाशित करने की योजना नेहरू जी के कार्यकाल में बनी थी और 1956 में इस पर काम शुरू हुआ और 1994 तक आते आते इसके सौ खण्ड छपे। इसके बाद 1998 में इसके हिंदी अनुवाद के सभी खण्ड आए। 'गांधी वांग्मय' के मुख्य संपादक प्रो. के स्वामीनाथन ने इस काम में अपने जीवन के 30 वर्ष दिए। सूत्रों के अनुसार 'गांधी वांग्मय' का सम्पूर्ण डीवीडी सेट मात्र 800 रुपए, जबकि पेन ड्राइव सेट 1800 रुपए में उपलब्ध है।

यह भी पढ़ें:

जयपुर के अल्बर्ट हॉल संग्रहालय ने विदेशों तक छोड़ी है छाप

जयपुर में अद्वितीय शिल्पकारी, स्थापत्य और एंटीक वस्तुओं से देसी-विदेशी पर्यटकों को रोमांचित करने वाले अल्बर्ट हॉल संग्रहालय ने अपनी छाप विदेशों तक छोड़ी है।

12/04/2019

रघुराम राजन की विदाई पर बेंगलुरु के रेस्तरां ने पेश किए दो पकवान

भारतीय रिजर्व बैंक के निवर्तमान गर्वनर रघुराम राजन की शान में बेंगलूर की एक रेस्त्रां कंपनी ने अपने मेन्यू में दो विशेष पकवान पेश किए हैं. बराबर चर्चाओं में रहे राजन ने केंद्रीय बैंक के काम-धाम पर अपना एक खास असर डाला है.

25/08/2016

अलविदा-2019: चिकित्सा के क्षेत्र में बीता साल मील का पत्थर, 15 नए मेडिकल कॉलेज खुलने का काम शुरू

राजस्थान में बीता एक साल मेडिकल क्षेत्र के लिए आगामी दिनों में मील का पत्थर साबित होगा। प्रदेश में जो युवा डॉक्टर बनने का सपना संजोए बैठे हैं, उनकी राह आसान होने जा रही है। सरकार ने 11 माह में 15 नए मेडिकल कॉलेज प्रदेश में मंजूर कराए हैं।

10/12/2019

24 कैरेट गोल्ड में बनाया राजसी साफा, 7 महीने में 40 कारीगरों ने किया तैयार

राजपूताना की 100 साल पुरानी परम्परा को फिर से जीवंत करने के लिए जयपुर के डिजाइनर भूपेन्द्र सिंह शेखावत ने 24 कैरेट गोल्ड में 10 गज लम्बा 530 ग्राम का साफा बनाया है।

05/10/2019

पर्यटक उठाएंगे कल्चरल एक्टीविटिज का लुत्फ

आरटीडीसी विभाग की यातायात इकाई की ओर से देशी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने एवं जयपुर के हिस्टोरिकल्स मॉन्यूमेंट्स के इतिहास से रूबरू कराने के उद्देश्य से विभिन्न सिटी टूर पैकेज चलाए जा रहे हैं।

08/04/2019

यह है AAP का सबसे छोटा 'मफलरमैन', जो पहुंचा अरविंद केजरीवाल से मिलने

आप के कार्यकर्ता पार्टी मुख्यालय में जश्न मना रहे हैं तो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर भी समर्थक खुशी से झूम रहे हैं।

11/02/2020

जोधपुर जिले का एक ऐसा गांव जहां 68 वर्ष से नहीं मनी दीपावली

जोधपुर जिले का एक गांव ऐसा भी है जो अपने 18 मृतक किसान भाइयों की याद में पिछले 68 वर्षों से केवल प्रतीकात्मक दीपावली मनाते हैं। जोधपुर जिले का भुण्डाना गांव ऐसा है जहां गांववासी पिछले 68 वर्ष से दीपावली के दिन डाकुओं के हाथ मारे गये।

31/10/2019