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दुनिया में भारतीयों की धाक, टॉप कंपनियों के CEO की कुर्सी संभाल रही 10 शख्सियतों के बारे में जानिए

Sunday, February 09, 2020 18:25 PM
टॉप कंपनियों के CEO की कुर्सी संभाल रही 10 शख्सियतें।

नई दिल्ली। भारत और भारतीय दिमाग का लोहा पूरी दुनिया मानती है। तभी तो आज दुनियाभर की टॉप कंपनियों के सीईओ की कुर्सी पर कई भारतीय लोग काबिज है। भारतीय मूल के लोग दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों में न सिर्फ टॉप पोस्ट हासिल कर रहे हैं, बल्कि अपनी क्षमता का लोहा भी मनवा रहे हैं। आज हम आपको ऐसे ही भारतीयों से मिलाने जा रहे हैं जिन्होंने भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। जानिए उन 10 भारतीयों के बारे में जिन्होंने विश्व में अपनी धाक जमा रखी है और दुनिया की टॉप कंपनियों को चला रहे हैं।

सुंदर पिचाई-:
गूगल और गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट के सीईओ भारतीय मूल के सुंदर पिचाई तमिलनाडु के चेन्नई में पैदा हुए थे। उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से बीटेक की डिग्री ली। इसके बाद स्टैनफोर्ड से एमएस आर व्हार्टन से एमबीए की शिक्षा प्राप्त की। सुंदर पिचाई ने 2004 में गूगल ज्वॉइन किया। एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम और 2008 में लॉन्च हुए गूगल क्रोम में उनका सबसे बड़ा योगदान गूगल क्रोम है। इसके अलावा मैप्स और कई गूगल प्रोडक्ट के उत्पादों में भी उन्होंने अपनी प्रमुख भूमिका निभाई है।

सत्य नडेला-:
दुनिया की बड़ी कंपनियों में शुमार माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सत्य नडेला भी भारतीय मूल के नागरिक है। हैदराबाद में जन्मे नडेला ने अपनी पढ़ाई मणिपाल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बीई, विस्कोंसिन यूनिवर्सिटी (मिल्वौकी) से कंप्यूटर साइंस में एमएस और शिकागो यूनिवर्सिटी के बूथ स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से एमबीए किया। नडेला ने 1992 में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी को ज्वॉइन किया और 22 सालों तक कंपनी के लगभग हर एक महत्वपूर्ण डिवीजन और पद पर कार्य किया। उसके बाद 4 फरवरी 2014 को उन्हें माइक्रोसॉफ्ट का सीईओ बनाया गया।

अरविंद कृष्णा-:
अमेरिका की आईटी कंपनी इंटरनेशनल बिजनेस मशीन्स (आईबीएम) ने भी भारतीय मूल के अरविंद कृष्णा को सीईओ पद की जिम्मेदारी दी है। कृष्णा 6 अप्रैल को आईबीएम के सीईओ का कार्यभार संभालेंगे। 57 साल के कृष्णा वर्तमान में आईबीएम में एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने 1990 में आईबीएम कंपनी ज्वॉइन की थी। हैदराबाद में जन्मे अरविंद कृष्णा ने आईआईटी कानपुर से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी की।

अजयपाल सिंह बंगा-:
मास्टरकार्ड अमेरिकन फाइनेंशियल सर्विसेस कोर्पोरेशन कंपनी मास्टर कार्ड के सीईओ अजयपाल सिंह बंगा का जन्म महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था। इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफेन कॉलेज से इकोनॉमिक्स की डिग्री ली और फिर अहमदाबाद के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से एमबीए का कोर्स पूरा किया। बंगा को जुलाई 2010 में कंपनी का सीईओ नियुक्त किया गया था। इससे पहले वह एशिया पैसिफिक के सिटीग्रुप के सीईओ थे। बंगा ने अपना करियर 1981 में नेस्ले के साथ शुरू किया था, जहां इन्होंने 13 साल नौकरी की।

शांतनु नारायण-:
अडोबी सिस्टम्स के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की जिम्मेदारी भारतीय शांतनु नारायण संभाल रहे हैं। हैदराबाद में पले बढ़े शांतनु नारायण ने उस्मानिया यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की। इसके बाद उन्होंने कैलोफॉर्निया यूनिवर्सिटी बर्कले से एमबीए और बाउलिंग ग्रीन यूनिवर्सिटी, बाउलिंग ग्रीन, ओहायो से कंप्यूटर विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। शांतनु ने अपने करियर की शुरुआत एप्पल के साथ की। उसके बाद वे सिलिकॉन ग्राफिक्स में रहे तथा फिर पिक्ट्रा इंक के सह-संस्थापक बने। नारायण 1998 में अडोबी से जुड़े और नवम्बर 2005 में उन्हें कंपनी का सीईओ बनाया गया। 

इवान मेनेजिस-:
ब्रिटेन की शराब कंपनी डियाजियो ने 7 मई 2013 को भारतीय मूल के इवान मेनेजिस को अपना सीईओ नियुक्त किया। महाराष्ट्र के पुणे में जुलाई 1959 में जन्मे मेनेजिस ने सेंट स्टीफन कॉलेज, दिल्ली और आईआईएम हैदराबाद और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के केलॉग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में शिक्षा प्राप्त की। डियाजियो दुनिया की सबसे बड़ी शराब बनाने वाली कंपनी है। 1997 में डियाजियो में शामिल होने से पहले मेनेजिस नेस्ले, बेज-एलेन एंड हैमिल्टन और वर्लपूल में काम कर चुके हैं।

राजीव सूरी-:
फिनलैंड की मोबाइल कारोबार कम्पनी नोकिया सोल्यूशन्स एण्ड नेटवर्क्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भारतीय मूल के राजीव सूरी है। माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला की तरह राजीव सूरी ने भी मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और उसके बाद कई कंपनियों में काम किया। राजीव का जन्म 10 अक्टूबर 1967 को मध्यप्रदेश के भोपाल में हुआ था। अब उनके पास सिंगापुर की नागरिकता है। राजीव की खास बात यह है कि उनके पास ना तो एमबीए और ना ही कोई पीजी डिग्री है। बेहतरीन मैनेजरियल स्किल्स के दम वह टॉप पर पहुंचे हैं।

एल नरसिम्हन-:
ब्रिटेन की दिग्गज हेल्थकेयर कंपनी रेकिट बेंकाइजर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भारतीय मूल के लक्ष्मण नरसिम्हन है। नरसिम्हन ने पुणे के कॉलेज ऑफ इंजिनियरिंग से मेकेनिकल इंजिनियरिंग की डिग्री हासिल की। इसके अलावा अमेरिका के वॉर्टन स्कूल से फाइनैंस में एमबीए भी किया। नरसिम्हन ने 1 सितंबर 2019 से ग्रुप सीईओ की जिम्मेदारी संभाली। बजाज ऑटो के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव बजाज ने पुणे के सेंट विंसेंट स्कूल और कॉलेज ऑफ इंजिनियरिंग में साथ पढ़ाई की।

डीसी पालीवाल-:
अमेरिकी कंपनी हरमन इंटरनेशनल के चेयरमैन और सीईओ दिनेश पालीवाल भी भारतीय मूल के हैं। इनकी कंपनी जेबीएल, बेकर, डिबिएक्स जैसे ब्रांड्स की मालिक है। 17 दिसंबर 1957 को उत्तर प्रदेश के आगरा में जन्मे पालीवाल ने आईआईटी रूड़की से इंजीनियरिंग में एमएस की डिग्री हासिल की और उसके बाद मियामी विश्वविद्यालय (ऑक्सफोर्ड, ओहियो) से वित्त में एप्लाइड साइंस और इंजीनियरिंग और एमबीए में एमएस किया। हरमन में शामिल होने से पहले उन्होंने एबीबी समूह में राष्ट्रपति ग्लोबल मार्केट्स एंड टेक्नोलॉजी के रूप में काम किया। ऑडियो और इन्फोटेनमेंट इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनी हरमन इंटरनेशनल की कमान पालीवाल को वर्ष 2007 में सौंपी गई थी।

वीके नरसिम्हन-:
अमेरिकी कंपनी नोवार्टिस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वसंत नरसिम्हन भी भारतीय मूल के हैं। उनके माता-पिता भारत के तमिलनाडु से थे। नरसिम्हन ने शिकागो यूनिवर्सिटी से जैविक विज्ञान में स्नातक की डिग्री, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से एमएड और जॉन एफ कैनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट से सार्वजनिक नीति में मास्टर डिग्री प्राप्त की। नरसिम्हन 2005 में नोवार्टिस में शामिल हुए। 2014 में वह ग्लोबल हेड ऑफ़ डेवलपमेंट बने और 2016 से 2018 तक उन्होंने कंपनी के भीतर ड्रग डेवलपमेंट के ग्लोबल हेड और मुख्य चिकित्सा अधिकारी की भूमिका निभाई। 5 सितंबर, 2017 को उन्हें नोवार्टिस का सीईओ नियुक्त किया गया। 

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