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अलविदा 2019: कमजोर रहा खेती-किसानी के लिए बीता साल, राजस्थान कल्याण कोष का शुभारम्भ

Monday, December 30, 2019 11:00 AM
फाइल फोटो।

जयपुर। भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है, लेकिन प्रदेश की खेती-किसानी के लिए गुजरा हुआ साल कमजोर ही रहा। हालांकि प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद सरकार के वादे के अनुसार किसानों में उम्मीद जगी थी कि सरकार किसानों के सभी तरह के कर्जे माफ कर देगी, लेकिन मात्र सहकारी बैंकों के ही कर्जे माफ हो पाए। इससे किसान ने अपने आपको ठगा हुआ सा महसूस किया। इसमें सबसे बड़ी दुविधा यह रही कि जिन किसानों ने ईमानदारी से सहकारी बैंकों में कर्ज चुकाया था, उनके कर्जे माफ नहीं किए गए।

पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने उद्यानिक और इजराइल की तकनीक पर अनेक तरह की खेती शुरू की थी, लेकिन नई सरकार ने उन पर नजर भर देखना तक मुनासिब नहीं समझा। जैतून की खेती, दिल के आकार के खीरे, रंग-बिरगी शिमला मिर्च, किनोवा, खजूर सहित अन्य खेती इस गुजरे हुए साल में दिखाई ही नहीं दी। साल के अंत में किसानों के लिए खुशखबरी रही कि सरकार ने राजस्थान कल्याण कोष का शुभारम्भ किया और राजस्थान कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति-2019 का विमोचन भी किया गया।

प्याज, टमाटर के भाव बढ़े पर, किसानों को मिली मायूसी
मानूसन की विदाई के दौरान तेज बारिश होने से प्याज, टमाटर की फसल चौपट हो गई। बाद में किसानों ने अपनी फसल को औने-पौने दामों में बेच दिया, लेकिन महाराष्ट्र से प्याज की आवक कमजोर होने से 15 से 17 रुपए किलो में बिकने वाला प्याज प्रदेश में 100 से 110 रुपए प्रति किलो में बेचा गया। मानसून की बरसात अच्छी होने से खरीफ की कुछ हिस्सों में फसल खराब हो गई थी, लेकिन मानसून की अच्छी बरसात के चलते यह माना जा रहा है कि रबी की फसल इस बार अच्छी होगी।

एग्रीटेक की योजनाएं नहीं चढ़ी परवान
भाजपा सरकार ने वर्ष 2016 में जयपुर में एग्रीटेक का आयोजन कर खेती-किसानी को आधुनिक रूप देने का प्रयास किया था, लेकिन सभी एमओयू परवान नहीं चढ़ पाए पर एक नई दिशा में पहल शुरू हुई। नई सरकार ने योजना का नाम बदलकर कृषि ज्ञानधारा कार्यक्रम की घोषणा की, लेकिन हालात ये रहे कि प्रदेश में एक जगह भी कार्यक्रम नहीं हुआ।

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