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ग्रह-नक्षत्रों के दुर्लभ योग में मनाई जाएगी दीपावली, 1521 में बना था गुरु, शुक्र और शनि का ऐसा संयोग

Friday, November 13, 2020 11:30 AM
दीपावली पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त।

जयपुर। कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। यह तिथि सर्वार्थसिद्धि देने वाली मानी गई है। इस वर्ष दीपावली का त्योहार 14 नवंबर को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। दीपावली पर धन की देवी मां लक्ष्मी का पूजन होता है। माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी स्वयं पधारती हैं। इस दिन पूरे विधि-विधान के साथ पूजन करने पर सुख-समृद्धि बनी रहती है। दीपावली के पावन उत्सव पर धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी और गणपति महाराज की पूजा होती है। शास्त्रों के अनुसार धन-वैभव, ऐश्वर्य और सौभाग्य प्राप्ति के लिए दीपावली की रात्रि को लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना गया है।

पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि इस दीपावली पर 499 साल बाद ग्रहों का ऐसा संयोग बन रहा है जो संयोग साल 1521 में बना था। दीपावली पर गुरु ग्रह अपनी स्वराशि धनु और शनि अपनी स्वराशि मकर में रहेगा। जबकि शुक्र ग्रह कन्या राशि में रहेगा। इस बार अमावस्या तिथि 14 नवंबर दोपहर 2:17 बजे से शुरू होगी और दूसरे दिन 15 नवंबर को सुबह 10:36 बजे तक रहेगी। यही वजह है कि माता लक्ष्मी का पूजन 14 नवंबर शनिवार को होगा। धार्मिक मान्यता है कि जिस दिन सूर्यास्त के बाद एक घड़ी अधिक तक अमावस्या तिथि रहे उस दिन दीपावली मनाई जाती है।  

विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि नवरात्र स्थापना शनिवार को था और दीपावली भी शनिवार को है। यह एक बड़ा ही मंगलकारी योग है कि शनि स्वाग्रही मकर राशि पर है। यह योग व्यापार के लिए लाभकारी एवं जनता के लिए शुभ फलदाई रहेगी। कई वर्षों बाद यह दुर्लभ संयोग बन रहा है तंत्र पूजा के लिए दीपावली पर्व को विशेष माना जाता है। सन 1521 के करीब 499 साल बाद ग्रहों का दुर्लभ योग देखने को मिलेगा।

17 साल बाद ग्रह-नक्षत्रों के दुर्लभ योग
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि 14 नवंबर की शाम 7 बजे मंगल मीन राशि में रहकर अपनी सीधी चाल को चलेंगे, साथ ही मंगल मीन राशि में रहकर कन्या राशि के शुक्र पर दृष्टि डालेंगे। इसके साथ ही सूर्य, बुध और चंद्रमा, तुला राशि में रहेंगे। गुरु धनु राशि में, शनि मकर राशि में रहेंगे। 17 साल बाद दीपावली पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। इससे पहले दीपावली पर ऐसा योग 9 नवंबर 1988 को बना था। उस समय भी सूर्य बुध, चंद्रमा, तुला राशि में थे। इन सब योगों की वजह से व्यापार श्रेष्ठ रहेगा एवं जातकों की आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ इस दिन की खरीदारी शुभ व फलदाई होगी।

1521 में बना था गुरु, शुक्र और शनि का ऐसा संयोग
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि इस साल दीपावली यानी 14 नवंबर के दिन के गुरु, शुक्र और शनि का भी दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है। इस दीपावली पर गुरु ग्रह अपनी राशि धनु में, शनि अपनी राशि मकर में और शुक्र कन्या राशि में नीचे का रहेगा। गुरु, शुक्र और शनि का ऐसा संयोग 499 साल पहले 1521 में बना था। 1521 में 9 नवंबर को दीपावली का पावन पर्व मनाया गया था। गुरु और शनि व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाले कारक ग्रह माने जाते हैं।

इन राशियों के लिए होगा शुभ समय
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि देवगुरु बृहस्पति और शनि ग्रह के अपनी स्वराशि में होने से कई जातकों के लिए यह शुभ अवधि होगी। ऐसे में दीपावली का यह त्योहार उनके लिए सुख-समृद्धि की सौगातें लेकर आएगा। दीपावली का त्योहार वृषभ, कर्क, तुला और कुंभ राशि के जातकों के लिए बहुत ही शानदार बीतने के संकेत दे रहा है। जबकि मिथुन, सिंह और कन्या राशि के जातकों को थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यकता है।

दीपावली  पर सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि  14 नवंबर दीपावली के दिन रात 8:10 बजे तक स्वाति नक्षत्र रहेगा। इसके बाद पूरी रात विशाखा नक्षत्र रहेगा। पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। शनिवार को प्रदोष काल में स्वाति से बना सिद्धि योग कार्य सफलता के लिए अच्छा माना गया है। स्वाति नक्षत्र चर, चल-संज्ञक नक्षत्र होने के कारण वाहन लेने देने, उद्योग कर्म, दुकानदारी, चित्रकारी शिक्षक, स्कूल संचालक, श्रृंगार प्रसाधन एवं अन्य कर्म के लिए अच्छा माना जाता है।

दीपावली के दिन जरूर करें ये उपाय
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि दीपावली पर लक्ष्मी जी और गणेश महाराज की पूजा का विधान है। इसके अलावा आप इस दिन हनुमानजी, यमराज, चित्रगुप्त, कुबेर, भैरव, कुलदेवता और अपने पितरों का पूजन भी जरूर करें। वहीं धन की देवी मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु का भी पूजा करें। इसके साथ ही दीपावली पूजा में आप श्रीसूक्त और विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं।

मुख्य द्वार को सजाएं
किसी के भी स्वागत में सबसे पहले घर का मुख्य द्वार सजाया जाता है। मां लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए आप भी अपने घर को मुख्य द्वार को अच्छे से सजाएं। आम के पत्तो को बहुत शुभ माना जाता है। हर पूजा-पाठ के कार्यों में आम के पत्तो का उपयोग करते हैं। इसलिए दीपावली पर आम के पत्तों और गेंदे के फूलों की तोरण से मुख्य द्वार को सजाएं। विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि पूजा घर को सजाने में भी गेंदे के फूल और आम के पत्तों का प्रयोग अवश्य करें। वास्तु की दृष्टिसे भी आम के पत्ते शुभ माने जाते हैं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। वास्तु के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर किसी प्रकार की बाधा शुभ नहीं मानी जाती है। जिन लोगों के द्वार पर कोई रुकावट होती है वहां पर धन और समृद्धि के आगमन में भी रुकावट आती है। दीपावली पर मां लक्ष्मी का हमारे घर में आगमन होता है इसलिए मुख्य द्वार पर अगर कोई भी ईंट पत्थर या अन्य कोई भारी सामान या रुकावट हो तो उसे तुरंत हटा दें। घर की देहली की किनारी आदि अगर टूटी हुई है तो उसे सही करवा लें।

स्वास्तिक का बनाएं चिह्न
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि हमारे धर्म और वास्तु दोनों में ही स्वास्तिक के चिह्म को बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक या कोई भी शुभ और नया कार्य आरंभ करने से पहले स्वास्तिक का चिह्न अवश्य बनाते हैं। दीपावली पर अपने दरवाजे और दीवारों पर स्वास्तिक का चिह्न सिंदूर से बनाएं। इससे सकारात्मक ऊर्जा तो आती ही है साथ ही मां लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है।

उत्तर-पूर्व (ईशान) में करें पूजन
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि सबसे पहले तो पूजन कक्ष साफ-सुथरा हो, उसकी दीवारें हल्के पीले, गुलाबी या हरे रंग की हों तो अच्छा है क्योंकि ये रंग सकारात्मक ऊर्जा के स्तर को बढ़ाते हैं। काले, नीले और भूरे जैसे तामसिक रंगों का प्रयोग पूजा कक्ष की दीवारों पर नहीं होना चाहिए। वास्तु विज्ञान के अनुसार मानसिक स्पष्टता और प्रज्ञा की दिशा उत्तर-पूर्व (ईशान) पूजा करने के लिए आदर्श स्थान है क्योंकि यह कोण पूर्व एवं उत्तर दिशा के शुभ प्रभावों से युक्त होता है। घर के इसी क्षेत्र में सत्व ऊर्जा का प्रभाव शत-प्रतिशत होता है।

उत्तर पूर्व दिशा में रखें पूजा की सामग्री
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि पूजन करते समय मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। उत्तर दिशा चूंकि धन का क्षेत्र है इसलिए यह क्षेत्र यक्ष साधना (कुबेर), लक्ष्मी पूजन और गणेश पूजन के लिए आदर्श स्थान है। ध्यान रहे, दीपावली पूजन में मिट्टी के लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां अथवा चित्र आदि छवियां नई हों। चांदी की मूर्तियों को साफ़ करके पुनः पूजा के काम में लिया जा सकता है। पूजा कलश व अन्य पूजन सामग्री जैसे खील-पताशा, सिन्दूर, गंगाजल, अक्षत-रोली, मोली, फल-मिठाई, पान-सुपारी, इलाइची आदि उत्तर-पूर्व में ही रखा जाना शुभ फलों में वृद्धि करेगा।

लाल रंग है धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रिय
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि देवी लक्ष्मी को लाल रंग अत्यधिक प्रिय है। लाल रंग को वास्तु में भी शक्ति और शौर्य का प्रतीक माना गया है अतः माता को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, श्रृंगार की वस्तुएं एवं पुष्प यथा संभव लाल रंग के होने चाहिए। पूजा कक्ष के दरवाज़े पर सिन्दूर या रोली से दोनों तरफ स्वास्तिक बना देने से घर में नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं करती हैं।

शंख ध्वनि से होते हैं देवी-देवता प्रसन्न
विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि वास्तु शास्त्र के अनुसार शंख ध्वनि व घंटानाद करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और आस-पास का वातावरण शुद्ध और पवित्र होकर मन-मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। दीपावली पूजन में श्रीयंत्र, कौड़ी एवं गोमती चक्र की पूजा सुख-समृद्धि को निमंत्रित करती है।

लक्ष्मी पूजन मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: 14 नवंबर की शाम 5:28 से शाम 7:24 तक।
सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 14 नवंबर की शाम 5:49 से 6:02 बजे तक
प्रदोष काल मुहूर्त: 14 नवंबर की शाम 5:33 से रात्रि 8:12 तक
वृषभ काल मुहूर्त: 14 नवंबर की शाम 5:28 से रात्रि 7:24 तक

लक्ष्मी पूजन चौघड़िया मुहूर्त
दोपहर -: (लाभ, अमृत) 14 नवंबर की दोपहर 2:17 से शाम को 4:07 बजे तक।
शाम -: (लाभ) 14 नवंबर की शाम को 5:28 से शाम 7:07 बजे तक।
रात्रि -: (शुभ, अमृत, चल) 14 नवंबर की रात्रि 8:47 से देर रात्रि 1:45 बजे तक।
प्रात: काल -: (लाभ) 15 नवंबर को सुबह 5:04 से 6:44 बजे तक।

महानिशीथ काल मुहूर्त
महानिशीथ काल मुहूर्त्त -: रात्रि 11:39 से 00:32 बजे तक
सिंह काल मुहूर्त्त -: रात्रि 00:01 से 02:19 बजे तक

व्यापारिक प्रतिष्ठान पूजन मुहूर्त
सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 'अभिजित' -: दोपहर 12:09 से शाम 04:05 बजे तक।

गृहस्थों के लिए पूजन मुहूर्त
सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 14 नवंबर की शाम 5:49 से 6:02 बजे तक।
प्रदोष काल मुहूर्त: 14 नवंबर की शाम 5:33 से रात्रि 8:12 बजे तक।
वृषभ काल मुहूर्त: 14 नवंबर की शाम 5:28 से रात्रि 7:24 बजे तक।
सिंह लग्न मुहूर्त: 14 नवंबर की मध्य रात्रि 12:01 से रात 2:19 बजे तक।

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