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कोरोना वायरस: क्यों जरूरी है मेलजोल कम करना, जानें इसके बारे में पूरी जानकारी

Tuesday, March 17, 2020 11:20 AM
सांकेतिक तस्वीर।

वाशिंगटन। कोरोना वायरस के हाल में सामने आए विषाणु से उत्पन्न रोग कोविड 19 के पहले मामलेकी जानकारी मिलने के बाद इसके संक्रमण के फैलते जाने की खबरें भी धीरे-धीरे आने लगीं हैं। दो माह बाद अब इस संक्रमण के बहुत तेजी से फैलने की खबरें आने लगी हैं। इस रोग के तेजी से फैलने की खबरों ने विशेषज्ञ चिकित्सकों को चिंतित कर दिया है। अमेरिका के प्रतिष्ठित समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट ने बताया है कि आजकल जिस तरह हर तीसरे दिन कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या दोगुनी हो जाती है, यह सिलसिला यदि जारी रहा तो मई माह तक अमेरिका में दस करोड़ लोग इससे पीड़ित हो जाएंगे।

यदि सामाजिक मेल जोल कम नहीं किया गया तो एक रोगी चार जनों को संक्रमित करेगा और 15 दिन में एक करोड़ लोग इसकी चपेट में आ जाएंगे। यह गणित है, भविष्यवाणी नहीं। इसके प्रसार को रोका जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि लोग आपस में मेलजोल कम कर लें, सार्वजनिक स्थानों पर कम जाएं और अपनी कुछ गतिविधियां भी कम करें तो संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है।

मानवीय नेटवर्क से फैलता है कोविड-19
सिमलिटिस कोविड 19 नहीं है। और यह प्रयोग वास्तविक जीवन की जटिलता का सरलीकरण है। फिर भी जैसे सिमलिटिस आपके स्क्रीन पर बांउस करती गेंद के नेटवर्क की तरह फैलता है, कोविड 19 लोगों के नेटवर्क से प्रसारित होता है। यह मानवीय नेटवर्क से ही पूरे देश में, शहर में, कार्यस्थल पर और परिवार में फैलता है। जैसे स्क्रीन पर गेंद बाउंस करती है, उसी तरह एक व्यक्ति का व्यवहार दूर दराज के लोगों पर भी असर डालता है। इसमें एक खास बात यह है कि ये प्रयोग वास्तविकता नहीं हैं। सिमलिटिस के विपरीत कोविड 19 से मौतें होती हैं। हालांकि इससे होने वाली मृत्यु दर का पक्का पता नहीं है, लेकिन इतना तो साफ है कि समाज के बुजुर्ग लोगों पर ज्यादा खतरा है। इस प्रयोग का प्रीव्यू देखने के बाद हैरिस कहते हैं कि यदि आप चाहते हैं कि यह अधिक यथार्थ बने, तो इसके बीच के कई अगर मगर को हटा दें।

उपाय करें, नहीं तो तेजी से फैलेगा
वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार यदि इसकी रोकथाम के उपाय नहीं किए गए, तो कोविड 19 आगामी कई महीनों तक बहुत तेजी से फैलेगा। ऐसा क्यों हो रहा है यह जानने के लिए किसी जनसमुदाय में किसी नकली बीमारी के फैलने का प्रयोग किया जा सकता है। पोस्ट ने कहा है कि इस नकली रोग का नाम फिलहाल सिमलिटिस रख लेते हैं। यह कोविड 19 से अधिक आसानी से पैलता है। जब कोई स्वस्थ व्यक्ति किसी रोगी के सम्पर्क में आता है, तो वह भी रोगग्रस्त हो जाता है। पांच लोगोें के समूह में इस रोग से हर किसी के पीड़ित हो जाने में कोई ज्यादा समय नहीं लगा। वास्तविक जीवन में लोग रोगमुक्त हो जाते हैं। इस रोगमुक्त व्यक्ति से न तो कोई संक्रमित हो सकता है और न वह रोगी के सम्पर्क में आने पर दोबारा संक्रमित ही होगा।

रैंडम विधि का उपयोग
अब देखें कि 200 जनों के समूह में सिमलिटिस का प्रसार कैसे होता है। हम इस नगर के हर व्यक्ति को एक रैंडम पोजीशन देंगे, रैंडम ऐंग्ल से ही आगे बढ़ेंगे और इसमें एक जना को रोगग्रस्त हुआ मान लेंगे। बीमार लोगों की संख्या को आरोहण करती लाल वक्र रेखा से सूचित करें, तो इस रेखा का उठाव देखें। यह लोगों के रोग ग्रस्त होने पर तेजी से ऊपर उठता है और उनके स्वस्थ हो जाने पर यह मंद हो जाता है। हमारे प्रयोग का शहर छोटा है। यह अलास्का प्रांत के ह्विटियर जितना बड़ा ही है। इसलिए सिमलिटिस तेजी से पूरी आबादी में फैल गया। अमेरिका जैसे बड़े देश में यह वक्र रेखा दीर्घकाल तक सीधी खड़ी चढ़ाई कर सकती है। उसके बाद ही यह झुकना शुरू करेगी। जब वास्तविक कोविड 19 रोग की बात आती है, तो हमारा विकल्प इसके प्रसार को तुरंत कम करना ही होगा। यह बड़ी जनसंख्या को अपनी चपेट में ले, उससे पहले ही इसे रोकना होगा।

एकांतवास के लिए विवश करने का भी प्रयोग
सिमलिटिस के प्रसार को रोकने के लिए लोगों को विवश कर अलग थलग रखने का प्रयास किया गया। जैसे की चीन सरकार ने कोविड 19 के उत्पत्ति स्थल हुबेई प्रांत में किया। लेकिन डॉक्टरों की मान्यता है कि स्वस्थ लोगों को रोगग्रस्त आबादी से पूरी तरह अलग थलग करना सम्भव नहीं है। बाल्टीमोर की स्वसाथ्य आयुक्त लीना वेन ने जबरन एकांतवास में भेजे जाने की अव्यवहार्यता बताई। उन्होंने कहा, कई लोग शहरों में काम करते और आसपास के इलाकों में रहते हैं। इसी तरह कई लोग शहरों में रहते और पास पड़ोस में काम करते हैं। वेन ने सवाल किया, क्या लोगों को उनके परिवार से अलग थलग कर दिया जाएगा। हर सड़क कैसे रोकी जा सकती है। आपूर्ति सामग्री को लोगों तक पहुंचने से कैसे रोकेंगे।

हर कोई घर में नहीं रह सकता
फिर भी कुछ लोग तो बाहर जाएंगे ही। वे अपने काम या अन्य जिम्मेदारियों के कारण घर में नहीं रह सकते। कुछ लोग सार्वजनिक स्वास्थ्य की सलाहों पर भी कम ध्यान देते हैं। उनके रोगग्रस्त होने की आशंका अधिक रहेगी और वे सिमलिटिस रोग को फैलाने के भी कारण बनेंगे। अब देखें कि जब हमारी जनसंख्या के एक चौथाई लोग इधर उधर आते जाते रहते हैं और तीन चौथाई लोग सामाजिक मेलजोल कम कर देते हैं। मेल जोल कम करने से अधिक लोग स्वस्थ रहेंगे। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को लुभाने वाली चीजों को हटा देने से लोगों का वहां जाना भी कम हो जाएगा। थॉमस जेफरसन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ड्रू हैरिस कहते हैं, सार्वजनिक स्थानों को बंद कर हम लोगों में वहां पहुंचने की इच्छा भी कम कर सकते हैं। एक साथ इकट्ठा होने के अवसरों को कम करके हम लोगों को मेल जोल कम करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

कम मेलजोल जबरन एकांतवास से बेहतर
अब एक चौथाई लोगों को घूमने फिरने का मौका देकर कुल के आठवें भाग के आंकड़े को ही यह सुविधा देने का प्रयोग करते हैं। इस तरह आप चार प्रयोग देखते हैं। पहला कि जब सभी लोग मेल जोल रखने और कहीं भी आने जाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। दूसरा जब उन्हें एकांतवास के लिए विवश कर दिया जाता है। कम मात्रा में मेलजोल रखने के लिए कहा जाता है और व्यापक रूप से मेल जोल कम कर दिया जाता है। आप देखेंगे कि इनमें से हर प्रयोग का नतीजा अनूठा था। जब आप प्रयोग पर दोबारा पहुंचेंगे, इसके नतीजे बदले हुए मिलेंगे। इसके नतीजों से आप समझ जाएंगे कि कम सामाजिक मेलजोल जबरन एकांतवास से बेहतर है। और मेलजोल में व्यापक कमी सबसे बेहतर विकल्प है। इस परीक्षण का नतीजा नीचे दिया गया है।

शायद ही कारगर होती हैं कड़ी बंदिशें

जॉर्ज टाउन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर लॉरेंस ओ. गोस्टिन कहते हैं, सच्चाई यह है कि इस तरह की बंदिशें शायद ही कारगर होती हैं। इस महामारी के प्रसार को रोकने के अन्य उपाय भी हैं। डॉक्टरों ने लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर एकत्र होने से बचने के लिए कहा है। उन्हें ज्यादा से ज्यादा घर में ही रहने की सलाह दी गई है और दूसरों से दूरी बना कर रहने को कहा गया है। यदि लोग इधर उधर कम जाएं, और आपस में कम मेल जोल रखें, तो इस रोग का प्रसार कम किया जा सकता है।

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