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चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का मलबा ढूंढ़ने में चेन्नई के इंजीनियर ने की मदद, नासा ने दिया क्रेडिट

Tuesday, December 03, 2019 11:25 AM
शनमुगा सुब्रमण्यन

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के महात्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम का मलबा ढूंढ लिया गया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के लूनर रिकनैसैंस ऑर्बिटर (एलआरओ) ने चांद की सतह पर विक्रम लैंडर का मलबा तलाशा है। नासा ने विक्रम का मलबा ढूंढने का क्रेडिट चेन्नई के एक मैकेनिकल इंजीनियर शनमुगा सुब्रमण्यन को दिया है।

नासा ने अपने बयान में कहा कि उसने 26 सितंबर को क्रैश साइट की एक तस्‍वीर जारी की थी और लोगों को विक्रम लैंडर के मलबे की खोज करने के लिए बुलाया था। नासा ने बताया कि पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर शनमुगा सुब्रमण्यन ने विक्रम लैंडर की पहचान के साथ एलआरओ परियोजना से संपर्क किया। शानमुगा ने मुख्य क्रैश साइट के उत्तर-पश्चिम में लगभग 750 मीटर की दूरी पर स्थित मलबे की पहचान की थी।

वहीं शनमुगा ने बताया कि नासा ने 14 -15 अक्टूबर और 11 नवंबर को 2 तस्वीरें जारी की थीं। मैं अपने दोनों लैपटॉप पर 2 तस्वीरों की साइड बाई साइड तुलना कर रहा था। एक तरफ विक्रम लैंडर की पुरानी तस्वीर थी, दूसरी ओर नई फोटो थी, जो नासा ने जारी की थी। मुझे ट्विटर और रेडिट यूजर्स से काफी मदद मिली। उन्होंने कहा कि ये बहुत कठिन था, लेकिन मैं कोशिश करता रहा। नतीजे पर पहुंचने के बाद मैंने इसका ऐलान किया, हालांकि जानकारी सार्वजनिक करने से पहले नासा 100 फीसदी आश्वस्त होना चाहता था। इसलिए नासा ने खुद फैक्ट चेकिंग किया और पूरी तरह से आशवस्त होने के बाद 3 दिसंबर को नासा ने ट्वीट करके विक्रम लैंडर का मलबा मिलने की जानकारी दी।

शनमुगा सुब्रमण्यन का कहना है कि नासा द्वारा अपने दम पर लैंडर को खोजने में असमर्थता ने ही उनकी रुचि जगा दी। उन्होंने एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि मैंने विक्रम लैंडर को ढूंढने के लिए कड़ी मेहनत की। मैं बेहद खुश हूं। मेरी हमेशा से स्पेस साइंस में दिलचस्पी रही है। मैं कभी भी किसी उपग्रह के लॉन्च को मिस नहीं करता हूं।

बता दें कि इसरो की तरफ से चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ का अभियान 7 सितंबर को अपनी तय योजना के मुताबिक पूरा नहीं हो पाया था। लैंडर को देर रात लगभग 1 बजकर 38 मिनट पर चांद की सतह पर उतारने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन चांद पर नीचे की तरफ आते समय 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर जमीनी स्टेशन से इसका संपर्क टूट गया था।

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