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सोशल मीडिया के जरिए भी किया जा रहा राज्य सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार: नीरज पवन

Friday, January 10, 2020 12:40 PM
दैनिक नवज्योति के फेस-टू-फेस कार्यक्रम में सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार व डीआईपीआर के निदेशक नीरज के पवन।

जयपुर। करीब 16 साल की भारतीय प्रशासनिक सेवा में करौली, भरतपुर, पाली जैसे जिलों में कलेक्टर और सरकार के विभिन्न महकमों में रहकर सुर्खियां बटोरने वाले 2003 बैच के आईएएस डॉ. नीरज के पवन की गिनती तेज तर्रार ब्यूरोक्रेट्स में होती है।

जब प्रदेश में गुर्जर आंदोलन हुए तो सरकार और आंदोलनकारियों को एक टेबल पर बिठाने में सेतु की भूमिका निभाने वाले नीरज के पवन अब हर व्यक्ति को सहकारिता आंदोलन से जोड़ने और सरकार के कामकाज के प्रचार-प्रसार से जुड़े महकमे की बेखूबी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। अपनी पूरी शिक्षा सरकारी स्कूलों से करने के बाद सिविल सर्विसेज में चयनित हुए झालावाड़ के निवासी डॉ. पवन की ओर से कई विभागों और जिलों में किए गए नवाचारों को राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। अब वे निवेशकों को मोटे मुनाफे का झांसा देकर ठगी करने वाली मल्टीस्टेट क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटियों पर शिकंजा कसने की दिशा में जुटे हैं ताकि भविष्य में फर्जीवाड़ा नहीं कर सके। बातचीत के दौरान आईएएस डॉ. पवन ने अपनी सेवाकाल के साथ ही जीवन के उन अनछुए सवालों पर बातचीत की, जो कुछ इस तरह रही।

सवाल : पाली, भरतपुर कलेक्टर से ट्रांसफर होने के बाद जनता काफी निराश हुई, इसका क्या कारण हैं?
जवाब : जिलों में कलेक्टर से जनता को काफी अपेक्षा होती है। अगर जनता की सुनवाई भी सही ढंग से कर ली जाए तो उसका कलेक्टर के प्रति जुड़ाव होता है। फिर गांवों में रात्रि चौपाल लगाना, इससे भी जनता का विश्वास कायम होता है। यहीं कारण है कि पाली और भरतपुर में जब मेरा कलेक्टर पद से ट्रांसफर हुआ तो लोगों को काफी निराशा हुई।

सवाल : ब्यूरोक्रैसी में आपको पॉलिटिकल बैलेंस वाले अधिकारी के तौर पर देखा जाता है, इसका क्या राज है?
जवाब : मैं कई जिलों में कलेक्टर रहा, उस दौरान आमजन से सीधे जुड़ाव के तौर पर साथ काम किया, यह बिना किसी भेदभाव के। उसी का परिणाम है कि आज भी कई जिलों से लोग मुझसे मिलने आते हैं। पद पर रहते हुए मेरी हमेशा से ही कोशिश रहती है कि जिस जगह मुझे लगाया गया है, उसे मैं पूरी जिम्मेदारी से निभाऊं और उसमें सफल भी होता हूं।

सवाल : कर्जमाफी सरकार का बड़ा फैसला था, इस पर कैसे खरे उतरे?
जवाब : राज्य सरकार सरकार की मंशा के अनुरूप कर्जमाफी के लिए कार्य किया गया। इसमें आधार आधारित सत्यापन को अनिवार्य किया तो कई तरह की खामियां भी सामने आईं, जो पूर्व की कर्जमाफी में रह गई थी। पहले जहां 27 लाख किसानों ने कर्जमाफी का फायदा लिया, लेकिन सख्ती के बाद संख्या 22 लाख ही रह गई। हर योग्य किसान को उसका लाभ दिलाया गया।

सवाल : पीएम सम्मान निधि योजना में सभी किसानों को लाभ क्यों नहीं मिला?
जवाब : योजना के लिए पहले 65 लाख आवेदन आए। इसमें पहली किश्त 46 लाख किसानों को मिली। इसके बाद 36 लाख को किश्त मिली। कुछ ऐसे किसान हैं, जिनका आधार आधारित प्रमाणन नहीं होने के कारण उनको लाभ नहीं मिल सका। हाल ही चौथी किश्त भी केन्द्र से जारी हुई है।

सवाल : क्रेडिट कॉ-ओपरेटिव सोसायटियों ने ठगी की, पीड़ित निवेशकों को  कैसे पैसा मिलेगा?
जवाब : मल्टीस्टेट क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटियों के इस तरह के मामले सामने आए हैं। ठगी करने वाली सोसायटियों की संपत्तियों को चिन्हित किया जा रहा है, जिससे उसको बेचकर पीड़ित निवेशकों को जितना हो सके, उतना पैसा लौटाया जा सके। इस दिशा में केन्द्रीय रजिस्ट्रार के साथ भी मीटिंग हो चुकी है।

सवाल : कोबरा टीम और पीटीएस की काफी सराहना हुई, यह क्या हैं?
जवाब : कृषि विभाग में फर्जी बीज बेचने वालों पर शिकंजा कसने के लिए कोबरा टीम बनाई थी। इसी तरह डूंगरपुर में रहते हुए प्रेगेनेंसी ट्रेकिंग सिस्टम (पीटीएस) की पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरुआत की। सफलता के बाद इसे पहले राज्य और फिर राष्ट्रीय स्तर पर लागू हुआ। भारत सरकार ने इसे ई-गवर्नेंस का अवार्ड भी दिया।

सवाल : आपकी सर्विस में कोई रोचक किस्सा जो सामने आया हो?
जवाब : कई बार ऐसी स्थिति बनी। भरतपुर में एक बार ऐसा ही हुआ। एक व्यक्ति अपनी अर्जी लेकर आया और मुझे ही पूछा कि साहब हैं क्या। इसके अलावा एक बार किसी पीड़ित को अस्पताल में लेकर गया, तो ऐसा ही वाकया घटित हुआ, जबकि उस दौरान मैं चिकित्सा विभाग में ही था।

सवाल : सोशल मीडिया का जमाना है, इससे निपटने की क्या योजना हैं?
जवाब : राज्य सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रचार करने के लिए सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की ओर से सोशल मीडिया का भी उपयोग किया जा रहा है। हर तरह की खबरों को सभी हैंडल्स में डाला जाता है। इसकी मॉनिटरिंग भी की जाती है कि इसका रेसपोंस मिल रहा है।

सवाल : डीआईपीआर में क्या नवाचार कर रहे हैं?
जवाब : आईटी के युग में सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार पूरी तरह से हो, इसके लिए डीआईपीआर में आईटी का उपयोग किया जा रहा है। जनता तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के साथ ही उनसे फीडबैक भी लेते हैं कि योजना के बारें में उनकी क्या राय है।
 

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