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स्कूलों में कोरोना से पेरेंट्स में भय, विशेषज्ञ निश्चिंत

Tuesday, November 23, 2021 01:35 AM
कॉन्सेप्ट फोटो ।

जोधपुर । पूरी क्षमता के साथ स्कूल खुले 10 दिन भी नहीं हुए हैं और मंगलवार को जयपुर के एक निजी स्कूल के 11वीं कक्षा के 12 बच्चे कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इसके साथ ही अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है। उन्हें चिंता हो रही है कि स्कूल में बरती जाने वाली जरा सी लापरवाही भी कहीं उनके बच्चे पर भारी पड़ जाए। दरअसल करीब 19 महीनों बाद स्कूल खुलने से बच्चों के चेहरे की रौनक तो लौटी है, लेकिन संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है।

 

डेढ़ साल बाद प्राथमिक स्कूल भी खुल चुके हैं, पर इससे उत्साहित होने की जरूरत नहीं है। बल्कि और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि कोरोना संक्रमण से छोटे बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके, लेकिन स्थिति इससे ठीक उलट है। स्कूल में एंट्री एवं छुट्टी के समय कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं हो रहा है। छोटे बच्चे बेफिक्र होकर दोस्तों के कंधे में हाथ डाले स्कूलों से घर को जा रहे हैं। करीब 19 महीनों बाद स्कूल खुलने से बच्चों के चेहरे की रौनक तो लौटी है, लेकिन संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है।

 

इन​का कहना है

प्राथमिक कक्षाओं में औसतन पांच साल से 11 वर्ष तक के बच्चे ही पढ़ते हैं। इन बचों पर काबू पाना आसान नहीं होता। नजर हटने पर कब बच्चे कोरोना गाइडलाइन की धज्जियां उड़ा दें कहा नहीं जा सकता। सरकारी स्कूलों में यह बात साबित भी हो रही है। हाल ही में स्कूल खुले हैं, लेकिन पेरेंट्स अभी भी बच्चों को भेजने में डर रहे हैं। ऊपर से स्कूलों में बढ़ रहे कोरोना के मामलों को देखकर अब सभी स्कूलों में ऑन लाइन कक्षाएं भी जारी रखनी चाहिए। साथ ही कोविड-19 गाइडलाइन के तहत अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।-संजय कुमार पिप्पल,अध्यक्ष, अभिभावक संघ

 

विशेषज्ञों के अनुसार उपलब्ध आंकड़े स्पष्ट रूप से इंगित करते हैं कि भारत में अस्पताल में भर्ती होने वाले कोविड - 19 मामलों में, दोनों वेव के दौरान ये देखा गया कि इनमें महज 2.5 फीसदी ही 0.18 आयु वर्ग के बच्चे थे। वहीं आबादी में इनकी संख्या लगभग 40 फीसदी के बराबर है। बुजुर्गों और व्यस्कों में बच्चों की तुलना में मॉडरेट से गंभीर बीमारी और मृत्यु का जोखिम 10.20 गुना अधिक होता है। वहीं दुनिया के किसी भी हिस्से से इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि तीसरी या कोई बाद की लहर बच्चों को असमान रूप से प्रभावित करेगी। इसलिए बच्चों की कोरोना संक्रमित होने से ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है।

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