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जोधपुर

एसी कोच बनने से पहले भी ट्रेनों के कोच रहते थे कूल

Thursday, June 04, 2020 00:25 AM
ट्रेन में बर्फ की सिल्लियां चढ़ाते कर्मचारी

जोधपुर । आज भले ही हम ट्रेनों के एसी कोच में सफर कर सुखद यात्रा का अनुभव करते है,लेकिन आजादी से पहले भी ट्रेनों के कोच को ठंडा रखने की देशी तकनीक विकसित कर ली गई थी।भारत में एयर कंडीशंड कोच का चलन रेलवे की शुरूआत से ही नहीं था। यह भारत में 1930 के दशक में आना शुरू हुआ था, जबकि यहां पहली ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को चली थी। जाहिर हैं, कि एसी कोच आने से पहले भी गर्मी के दिनों में यात्रा तो होती ही रही होगी। उस दौरान भी रेलवे की ओर से बर्फ की सिल्ली से कोच को ठंडा रखा जाता था ।


ट्रेन में चढ़ाते थे बर्फ की सिल्लियां
रेलवे से मिली जानकारी अनुसार अंग्रेजों के जमाने में प्रथम श्रेणी के यात्रियों को कूल-कूल यात्रा कराने के लिए उनके कूपे में बर्फ  की सिल्लियां रखवाई जाती थी। यही नहीं उनकी खिड़कियों पर खस की टाट बांधने के साथ उसे समय-समय पर भिगोने की भी व्यवस्था थी। इससे ट्रेन के कूपे में ठंडी ठंडी हवा तो आती ही रहती थी, यात्रियों को खस की  खुशबू भी मिलती रहती थी।


कूपे में बने होते थे आइस चैंबर
कोच को ठंडा रखने के लिए कोच में बने कूपों में एक आइस चैंबर बनाया जाता था, जिसमें बर्फ की सिल्लियां डाली जाती थी। वहां पास में एक पंखा इस तरह से लगाया जाता था कि बर्फ की ठंडी हवा पूरे कूपे में सरकुलेट होती रहे। चूंकि इन डिब्बों में अंग्रेज साहब ही सफर करते थे इसलिए उसकी ठंडक बनाए रखने के लिए रेल कंपनी को काफी मशक्कत करनी होती थी।


बर्फ पिघल जाने पर फिर से भरा जाता था
जिस ट्रेन में इस तरह के कोच  के डिब्बे लगे होते थे, उसके गार्ड को पूरी जानकारी होती थी, कि कौन कौन से स्टेशन पर बर्फ घर बना हुआ है और वहां से बर्फ की सिल्लियां लोड हो सकती है। वह उस स्टेशन के पास आने से पहले ही स्टेशन से बेतार संदेश भेज कर आगाह कर देते थे ताकि ट्रेन पहुंचते ही बर्फ की सिल्लियां लोड हो सके।


1934 में आया था पहला एसी डिब्बा
देश की पहली एसी डिब्बे वाली ट्रेन फ्रंटियर मेल थी, जिसमें 1934 में इस डिब्बे को लगाया गया था। उसके बाद फ्लाइंग रानी समेत कुछ और गाड़ियों में एसी डिब्बे लगाए गए थे। धीरे.धीरे इसकी तकनीक में भी बदलाव आता गया। 1990 के दशक में डिब्बों में रूफमाउंटेड यूनिट लगने लगे जो कि इनर्जी इफिशिएंट के साथ साथ ज्यादा यात्रियों वाले डिब्बों को भी ठंडा कर सकता है। 


रेलवे ने बना रखा था स्टेशन के पास ही बर्फ घर
आजादी से पहले जब ट्रेनों का संचालन ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा किया जाता था। उस  समय अंग्रेजों ने ट्रंक रूट पर या महत्वपूर्ण नामिनेटेड रेलवे स्टेशनों के पास बर्फ घर बना रखा था। वहां टॉवरनुमा बने ढांचा जो बर्फ घर होता था उसके नीचे आइस प्लांट लगा होता था और उसी के उपर बड़ी सी टंकी बनी होती थी, जिससे पानी लेकर बर्फ की सिल्लियां बनाई जाती थी। वहां बने बर्फ की सप्लाई  ट्रेनों में होती थी ।

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