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जोधपुर

शातिर सिद्धार्थ ने अपनी घिनौनी हरकत से दो भाइयों को उम्रकैद तक पहुंचा दिया

Tuesday, December 17, 2019 01:30 AM
विक्रम और गजेंद्र चौधरी ( फाइल फोटो )

जोधपुर । जोधपुर के शोभावतों की ढाणी मंगलम कॉलोनी में रहने वाला रवि इनाणिया ही अकेला ऐसा शख्स नहीं है जो फेसबुक पर फर्जी संजना बनी शातिर सिद्धार्थ के चंगुल में फंसा हो। भरतपुर जिले के विक्रम चौधरी को भी उसने अपना शिकार बनाया। इसे विधि का विधान माने या फिर शातिर दिमाग सिद्धार्थ का खेल कि आज विक्रम और उसका भाई गजेंद्र चौधरी इसी सिद्धार्थ की वजह से उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। विक्रम एनएसयूआई का अध्यक्ष रहा है।


कई उपलब्धियां विक्रम के नाम है, मगर किस्मत ने उसे जेल की कोठरी तक पहुंचा दिया है। इतना ही नहीं फर्जी बनी संजना यानी सिद्धार्थ के चक्कर में उसने अपना कैरियर बर्बाद करने के साथ 15 लाख रूपए भी लुटा दिए। ये कहानी आज विक्रम के बड़े भाई मुकेश चौधरी ने दैनिकनवज्योति के समक्ष बयां की।  दरअसल भरतपुर जिले के नदबई थाना इलाके में कोटेनकलां के रहने वाले मुकेश चौधरी आर्मी नेवी से सेवानिवृत्त पर्सन है। खुद पिता भरतपुर रोडवेज डिपो में काम करते थे। मुकेश चौधरी का एक भाई विक्रम चौधरी व दूसरा गजेंद्र सिंह चौधरी है।


होशियार विक्रम भी आ गया झांसे में यह है जेल पहुंचने की कहानी 
मुकेश चौधरी का भाई विक्रम चौधरी वर्ष 2013 में फे सबुक पर संजना नाम की लड़की के संपर्क में आता है। दोस्ती बढ़ती है और प्रेम प्रसंग शुरू होता है। खुद विक्रम एनएसयूआई का प्रेसीडेंट होने के साथ बीटेक का होनहार छात्र रहा है। अजमेर में मॉडलिंग करता था और राजस्थान टीम से किक्रेट खेलता था। संजना नाम की शख्स जो वास्तव में संजना ना होकर सिद्धार्थ पटेल है जो अभी चौपासनी हाऊसिंग बोर्ड पुलिस की गिरफ्त में है। सिद्धार्थ के पास धीरे-धीरे से विक्रम की सारी प्रोफाइल आ जाती है।


अब वह उसका यूज लेना शुरू करता है। धीरे-धीरे रूपयों की डिमांड होती है। लाखों रूपए उस पर लुटा चुका होता है।  विक्रम को संजना की आवाज ही मोहित कर लेती है और वह उससे मिलने को आतुर रहता है। मगर संजना बना सिद्धार्थ खुद भरतपुर बैठा है। वह संजना के मिलने के बहाने करता है। कभी मां, दादी के चुनाव में बिजी होने को कहता है तो कभी मां की बीमारी का बहाना बनाता है।


बार बार बहाने से विक्रम को होता है शक
संजना द्वारा बार-बार बहाने बनाए जाने से विक्रम को शक होता है तो वह सिद्धार्थ को संजना से मिलवाने को कहता है। सिद्धार्थ खुद संजना का भाई बना बैठा है। वह इस बार भी विक्रम का माइंड बदलने के लिए अजमेर ले जाता है जहां वे एक होटल पर खाना खाते है फिर पुष्कर घाट पर एक कमरा किराया लेते है। उससे भी सिद्धार्थ यहां पर हवन पूजन आदि करवाता है।


चुनाव के बहाने जाता है सिद्धार्थ
अपनी मां के चुनाव लड़ने की बात कहकर वह हरदा चला जाता है। तब विक्रम उसे छोड़ने ट्रेन तक आता है। इसके बाद सिद्धार्थ मोबाइल व सिमें आदि तोड़ कर फैंक देता है। विक्रम को जब शक ज्यादा बढ़ जाता है तो सिद्धार्थ उससे कहता है वह उसे जिंदा जाने दे रहा है।


सुषमा स्वराज बनकर करता है सिद्धार्थ बातचीत
इस केस में सिद्धार्थ अपनी पूरी सोची समझी साजिश के तहत जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री  सुमषा स्वराज बनकर बात करता है कि विक्रम व उसके भाई गजेंद्र ने मिलकर ही सनी का अपहरण किया है, फिर दोनों को जेल हो जाती है।


ऐसे पहुंचा विक्रम जेल की सलाखों में
सिद्धार्थ पटेल अब विक्रम को केस में फं साने के लिए अपने दो परिचितों हरदा का सनी और जैसलमेर के राजेश चौधरी का सहारा लेता है। चूंकि सिद्धार्थ के पास विक्रम की सारी प्रोफाइल जानकारी है इसलिए वह सनी को विक्रम के फेस बुक पर मैसेज करने को कहता है और सिद्धार्थ के खिलाफ बोलने को कहता है कि सिद्धार्थ ने कइयों से फ्रॉड किया है।


क्यों ना मेरी यानी सनी के अपहरण की योजना बनाई जावें। उसके पिता को फोन कर रूपयों की मांग की जाए। तब विक्रम उसकी चाल को समझ नहीं पाता है। वह झांसे में आ जाता है। तब विक्रम और सनी साथ होकर अपहरण की योजना बनाते हैं और इस काम में विक्रम के भाई गजेंद्रसिंह चौधरी को भी साथ ले लेते हैं। इधर राजेश चौधरी भी सिद्धार्थ से मिला हुआ होने से वह वर्ष 2015 में जयपुर में एक पुलिस केस सनी के अपहरण का दर्ज करवाता है।


सनी के मोबाइल से उसके पिता को फोन कर रूपयों की मांग की जाती है। 14 अप्रेल 2015 को ये लोग एसओजी के हत्थे चढ़ते है। सनी से पूछताछ में वह अपने अपहरण होने की बात को झुठला देता है। इससे पहले वह विक्रम को विश्वास में लेने के लिए कोर्ट से स्टांप लाकर देता है कि वह उसके साथ है। अपहरण की इस झूठी कहानी का जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा पुलिस आयुक्त की तरफ से किया जाता है। तब वहां पर विक्रम कहता है कि उसे झूठा फंसाया गया है। मगर बात दब जाती है।


हाईकोर्ट में चल रहा केस
इस कांड के बाद विक्रम और उसके भाई गजेंद्र सिंह चौधरी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, जो अभी नवंबर 18 से जेल में है। पहले वे शुरूआत में चार पांच माह तक जेल में रहे है। इस केस को अब हाईकोर्ट में लगाया गया है।


कई और केस भी आ सकते है सामने
जोधपुर के रवि इनाणिया का केस सामने आने के बाद भरतपुर के विक्रम चौधरी का के स सामने आया है। अब और भी केस इस तरह के सामने आ सकते है। इधर खुद आरोपी सिद्धार्थ चौहाबो पुलिस की अभिरक्षा में है।


जोधपुर पकड़े जाने पर मुकेश चौधरी पहुंचे यहां
सिद्धार्थ के जोधपुर में पकड़े जाने की जानकारी पर भरतपुर से मुकेश चौधरी जोधपुर पहुंचे और आज चौपासनी हाऊसिंग बोर्ड थाने गए। यहां पर एसीपी श्रीमती नीरज शर्मा, थानाधिकारी आनंदसिंह राजपुरोहित सहित अन्य अफसर ने उनकी कहानी को सुना तो वे भी दंग के साथ सोच में पड़ गए। फिलहाल पुलिस की तरफ से केस दर्ज किया जाएगा या नहीं इस बारे में रात का पता नहीं लगा। हालांकि मुकेश चौधरी की तरफ से भरतपुर में केस दर्ज करवा रखा है।

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