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जोधपुर

कोरोना से लड़ने और जीवटता में सबसे आगे राजस्थानी, इसलिए अब तक प्रदेश में सबसे कम मौतें

Thursday, April 16, 2020 01:05 AM
कॉन्सेप्ट फोटो।

जोधपुर। कोरोना के विश्वव्यापी कहर के बीच भारत में भी खौफ का आलम है। इस खौफ के बीच 15 राज्यों में 15 अप्रैल तक 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हैं। संकट के इस दौर में भी राजस्थान ने जीवटता की मिसाल पेश की है। कोरोना के खिलाफ लड़ने और जीवटता दनिे में। हमारे यहां के लोगों की इम्युनिटी और ह्यूमिनिटी दोनों मजबूत हैं। इस कारण कोरोना से मृत्युदर बेहद कम हैं। दैनिक नवज्योति स्पेशल रिपोर्टिंग टीम ने पड़ताल की तो पता चला कि देश के 15 राज्यों में कोरोना से मृत्यु दर के मामले में राजस्थान में सबसे कम तो एमपी में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं।

हमारे देश में 15 अप्रैल रात 12 बजे तक 405 लोगों ने कोरोना से जान गंवाई है। जबकि 11946 पॉजिटिव रोगी थे। इनमें 1329 मरीज ठीक हो चुके थे। बात राजस्थान की करें तो 1087 संक्रमित और 13 मौत हो गई जबकि 147 मरीज ठीक हो चुके। हमारे यहां कोरोना से मृत्यु दर  0.27 प्रतिशत हैं जो देश में सबसे कम है। जबकि ठीक होने की दर 13.14 प्रतिशत हैं। देश में सबसे ज्यादा मृत्यु दर मध्य प्रदेश (6.02) प्रतिशत है, इसके बाद पंजाब में  (5.94) प्रतिशत, महाराष्ट्र (5.70)प्रतिशत, गुजरात (3.80)प्रतिशत, कर्नाटक (2.93)प्रतिशत, पं.बंगाल (2.72)प्रतिशत, तेलंगाना (2.29)प्रतिशत हैं। राजस्थान के अलावा एक फीसदी से कम मृत्यु दर केरल 0.50, तमिलनाडु 0.93 व यूपी 0.70 प्रतिशत ही है।

जाने क्यों हम इतने मजबूत हैं...हमारे डीएनए में शामिल हैं मजबूत इम्यूनिटी व ह्यूमिनिटी
1. शाही खान-पान व मजबूत दिनचर्या
राजस्थान में खान-पान को विशेष महत्दिया जाता है। हम शाही भोजन पसंद करते हैं। इसके अलावा कई प्राकृतिक रूप से मजबूत सब्जियां हमारे यहां बनती हैं, जैसे केर-सांगरी,इमली का पानी और राब, छाछ व माडी का उपयोग। इस कारण इम्यूनिटी पॉवर ज्यादा होता है। हमारी दिनचर्या भी मजबूत है। शहर के भीतर ज्यादातर लोग सुबह योग,व्यायाम करते हैं तो भ्रमण पर भी जाते हैं।  

2. विपरीत परस्थितियों में घबराते नहीं
विपरीत परिस्थितियों में राजस्थान के लोग कम घबराते हैं। भारत-पाक युद्ध के साक्षी रहे 78 वर्षीय चांदमल बताते हैं कि उस दौर में भी हम लोग एक-दूजे की हिम्मत बढ़ाते। खाने के दौरान सब्जियां शेयर करते और कई बार तो बातों-बातों में पूरा दिन निकाल देते। मतलब ये है कि विषम परिस्थितियों में हमने घबराने की बजाय मुकाबला करना सीखा है। यहां गर्मी भी खूब पड़ती है । अकाल से सामना होता रहता है। लेकिन कोई घबराता नहीं। विकट हालात का मुकाबला करना हमारे डीएनए में ही है।

3. डरने की बजाय मस्त रहने की आदत
जोधपुर को ही ले तो यहां कोरोना खौफ के बीच कई लोग वीडियो अपलोड कर लोगों को हंसा रहे हैं। ऐसा नहीं कि वे कोरोना के प्रति गंभीर नहीं है,लेकिन इसके पीछे मंशा है कि मानसिक तौर पर मजबूत रहें,डर भगाएं और ऐसी सोच रखें कि कोरोना भी चला जाएगा,कुछ नहीं होगा।

...और डर से मौत का इससे बड़ा कोई उदाहरण नहीं
जोधपुर के सूरसागर क्षेत्र की वृद्धा को सांस में तकलीफ व निमोनिया था, लेकिन अस्पताल ले जाने पर कोरोना जांच कराने को कहा तो वह और परजिन डर गए और उसे बिना जांच ले गए। रास्ते में उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों का कहना है कि मौत के बाद उसकी कोरोना को लेकर रिपोर्ट नेगेटिव आई। अगर वह अस्पताल आने के बाद कहते ही जांच करा लेती तो शायद उसकी जान बच जाती। उसके मन में आए खौफ ने ही उसकी जान ली है।

एक्सपर्ट व्यू : डॉ.सुरेंद्र कुमार प्रजापत, मनोरोग विशेषज्ञ, एमडीएमएच
एमडीएमएच के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्रकुमार प्रजापत कहते हैं कि कोरोना हो या कोई भी रोग हो प्रतिरोधक क्षमता से ही उसे हराया जा सकता है। डरना या तनाव करने से कोई हल नहीं होगा। अकस्मात डर के कारण न्यूरोजैनिक शोक पैदा होता है। इससे व्यक्ति का हार्ट और ब्रेन तत्ल प्रभाव से काम करने बंद कर देते हैं। इससे अकस्मात मौत हो जाती है। इम्यूनिटी पॉवर बढ़ाने के लिए तनाव रहित रहना के साथ सही खान-पान, संयमित दिनचर्या भी जरूरी है। चाहे रोगी हो, खिलाड़ी हो या किसी प्रकार की परफॉरमेंस हो मजबूत मानसिकता वाला हमेशा जीतता है।

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