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जयपुर

छोटी चौपड़ से हवामहल तक जाने में आ जाता है पसीना, अतिक्रमण और ट्रैफिक जाम से परेशानी

Tuesday, December 10, 2019 10:05 AM
छोटी चौपड़ से बड़ी चौपड़ के बीच रास्ते में जाम की स्थिति और हवामहल फुटपाथ पर नो पार्किंग में पार्किंग।

जयपुर। छोटी चौपड़ से लेकर त्रिपोलिया बाजार और फिर बड़ी चौपड़ स्थित हवामहल बाजार तक पहुंचने के लिए लोगों को ट्रैफिक, गाड़ियों के हॉर्न से संघर्ष करना पड़ता है। परकोटे की सड़कों पर बेहिसाब दौड़ते ई-रिक्शा यातायात प्रभावित करते देखे गए। राहगीरों का कहना है कि परकोटे में आने के लिए दस बार सोचना पड़ता है, क्योंकि यहां के ट्रैफिक से जूझकर मंजिल तक पहुंचना बहुत कठिन है। इसके अतिरिक्त त्रिपोलिया बाजार में व्यापारियों ने दुकाने बरामदों तक फैला रखी है। दुकानों से सामान बाहर निकालकर रख देते हैं, ऐसे में बरामदों पर चलने वाले लोगों और पर्यटकों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। प्रशासन की सख्ती पर बरामदों से सामान वापस दुकानों में रख दिया जाता है, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर से वहीं स्थिति सामने आती है। त्रिपोलिया बाजार में लोग अपनी जान की परवाह किए बिना ट्रांसफार्मर के नीचे ही दुकाने लगाकर बैठ जाते हैं। 

सड़कों पर पार्किंग
छोटी चौपड़ से लेकर हवामहल बाजार तक की स्थिति पर नजर डाली जाए तो यहां लोग सड़कों पर गाड़ी खड़ी कर देते हैं। जिससे अन्य वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहीं स्थिति हवामहल बाजार की ओर भी देखने को मिलता है। आमलोगों के चलने के लिए बनाए फुटपाथ पर दुकानदार सामान बाहर तक रख देते हैं। इतना ही नहीं लोग अपने दो-पहिया वाहनों की पार्किंग भी फुटपाथ पर कर देते हैं। जिससे पर्यटकों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं पर्यटकों को आता देख दुकानदार सामान बेचने के लिए उनके पीछे लग जाते हैं।

पर्यटकों को तंग करते हैं भिखारी
दैनिक नवज्योति की टीम जब हवामहल की ओर पहुंची तो वहां स्मारक के मुख्य भाग के साथ पर्यटक सेल्फी लेते हुए दिखाई दिए। लेकिन इस दौरान प्लेटफार्म के बाहर से भिखारी उन्हें परेशान करते हुए देखे गए। गाइडों का कहना है कि कई बार पर्यटकों को पैसा देकर भिखारियों से पीछा छुड़ाना पड़ता है। ऐसे में जयपुर आने वाले पर्यटकों में जयपुर की छवि अच्छी नहीं जाती। हवामहल बाजार के व्यापारियों का कहना है कि यहां पब्लिक टॉयलेट की कमी है।

पुलिस सहायता केन्द्र पर ताला
हवामहल बाजार में लोगों और पर्यटकों की सहायता के लिए बनाए गए पुलिस सहायता केन्द्र बूथ पर ताला लगा मिला। आसपास के व्यापारियों का कहना है कि कई महीनों से यहां ताला ही लगा हुआ है। बूथ के गंदगी के ढ़ेर से ही पता लगता है कि महिनों से पुलिस सहायता केन्द्र बंद है।

बंदरों का भारी आतंक है
यह बात बेशक सहीं है लोग बंदरों को खाना देते हैं लेकिन जितने बंदर शहर में मौजूद है, यह सच है कि उनको समय-समय पर नहीं हटाया जाता है इसलिए इनकी संख्या भी शनै-शनै बढ़ती जा रही है। हवामहल बाजार में बंदरों के खौफ से ही पर्यटक, राहगीर सहमकर चलते हैं। बीच सड़क पर आकर ये लोगों को काट ले इसका खतरा सबके मन में हैं मगर कहे तो कहे किस से।

अतिक्रमण और ट्रैफिक जाम से परेशान क्षेत्र
छोटी चौपड़ से हवा महल तक जगह-जगह अतिक्रमण स्थिति देखने को मिली। छोटी चौपड़ से लेकर बड़ी चौपड़ स्थित हवामहल तक क्षेत्र तक कई जगहों पर ठेलों के जमावड़ों के साथ ऑटो-रिक्शा, ई-रिक्शा अपनी मनमर्जी से अपने वाहन को खड़े कर देते है, जिससे कभी-कभी जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। आए दिन जाम की स्थिति से बाहर के लोग यहां आने से कतराते हैं। राहगीरों को यहां पैदल चलने के लिए भी जगह नहीं मिलती है और आए दिन राहगीरों को ऐसी समस्याओं से अवगत होना पड़ता है। कई बार क्षेत्र में जाम लग जाने से एक गाड़ी को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। स्थानीय लोगों को कहना है कि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान होना जरूरी है। कई ट्रैफिक पुलिस अतिक्रमण को हटाती है परंतु उनके जाने के बाद दोबारा वैसी ही स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ई-रिक्शा अपने अनुसार रोड पर दौड़ते है और जहां सवारी मिली उधर ही ई-रिक्शे को रोक देते है। जिस कारण से जाम की स्थिति पैदा हो जाती है।

हरियाली में लग रही सेंध
प्रशासन ने जिस तरह से बाजारों की सुंदरता को बनाए रखने के लिए पेड़ लगाए थे। डिवाइडरों के बीच भी पेड़ पौधे लगाकर सुंदरता को बढ़ाने का काम किया था। अब डिवाइडरों के पौधे हवामहल बाजार में सूख चुके हैं। कई में सूखा कचरा भरा पड़ा है। समय समय पर पानी नहीं देने के कारण ये पौधे सूखकर कचरा हो गए हैं।

बरामदे खाली हो तो मिल सकती है चलने की जगह
बरामदों में दुकानदारों ने अतिक्रमण कर रखा है। आमजन का कहना है कि कोई भी बाजार जिसमें बरामदे हैं, खाली नहीं है इसलिए सड़क पर चलने को मजबूर हो रहे हैं अब ये काम तो सरकार ही देखें कि आमजन को चलने में सहूलियत दिलाने के लिए कब और क्या-क्या सुधार आवश्यक है वह होने चाहिए। जिस जयपुर में देश-विदेश के पर्यटक आकर खरीददारी करके जा रहे हैं प्रशासन को उनकी भी फ्रिक नहीं है कि उनके मन-मस्तिष्क में क्या छवि बनती होगी।

बड़ी चौपड़ से हवामहल शाम को जाम ही रहता है
शाम को बाजार की हालत बद से बदतर हो जाती है। वाहनों के अत्यधिक दबाव के कारण भी इतना ट्रैफिक आता है कि अक्सर जाम रहता है। तेजी से आगे निकलने के चक्कर में आड़े-तेड़े वाहनों को देखकर लगता है कि कहीं भिड़ ना जाए। एक्सीडेंटस यहां रोज शाम होते रहते हैं।

ट्रांसफार्मर के बगल में दुकान
त्रिपोलिया बाजार में एक ट्रांसफार्मर के बगल में एक दुकान देखने को मिली। टांसफार्मर के पास दुकान के होने से किसी बड़ी अनहोनी होने का खतरा बना रहता है और प्रशासन इस ओर ध्यान भी नहीं दे रहे है। ऐसी दुकानों पर सख्त से सख्त एक्शन लेना जरूरी है। अन्यथा किसी दिन बहुत बड़ी घटना होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

कई जगह दिखी गंदगी
छोटी चौपड़ से हवा महल तक के क्षेत्र में कई जगहों पर गंदगी देखने को मिली। कई गंदगी के कारण तरह-तरह के मच्छर देखने को मिले। जहां एक ओर सिटी को स्मार्ट सिटी बनाने की प्रक्रिया चल रहीं है। वहीं ऐसी समस्याओं से कहीं स्मार्ट सिटी का सपना सपना ही ना रह जाए। कई जगह मच्छर गंदगी के कारण मच्छर पनप रहे थे, जिससे डेंगू जैसी बीमारियां होने का खतरा बना रहता है। बीमारियों से शहरवासी ग्रस्त है। इस कारण से यहां पर साफ-सफाई की उचित व्यवस्था होना जरूरी है।

यह बोले दुकानदार-:

दुकानदार अन्नू भाई ने बताया कि दुकानदार बरामदों तक सामान रख देते हैं। इससे आम लोगों का चलना मुश्किल हो जाता है। यहीं नहीं लोग फुटपाथ पर ही गाड़ी पार्क कर देते हैं, जिससे बची हुई जगह भी अतिक्रमण की भेंट चढ़ जाती है।

हितेश रावत ने बताया कि बाजार में पार्किंग की मुख्य समस्या है। पर्यटकों को सैर कराने वाली टैक्सियां भी सड़क किनारे खड़ी कर दी जाती है। साथ ही लोग भी अपने वाहन फुटपाथ पर ही खड़ा कर देते हैं। इस स्थिति में लोगों का फुटपाथ पर चलना मुश्किल हो जाता है। हवामहल बाजार में पब्लिक टॉयलेट की समस्या है।

पुरूषोत्त्म शर्मा ने बताया कि मेरी दुकान के बाहर सालों से सुबह-शाम जाम लगता है। कभी कोई नुमाइंदा शहर की तरफ आकर ध्यान तक नहीं देता है कि शहरवासियों को क्या परेशानी है। गंदगी हर तरफ फैली है, वाहनों का जाम इस कदर लगता है कि समय पर पहुंचना हो तो पहुंच ही ना पाए। दुकान के बाहर ग्रामीण बसों का स्टॉपेज रहता है जबकि उनको बड़ी चौपड़ पर जाकर सवारियां उतारनी होती है। दुकान के बाहर अवैध रूप से स्टापेज बनाकर समस्या खड़ी कर दी।

राहगीर भवानी ने बताया कि इन रास्तों पर ट्रैफिक कंट्रोल करने का सबसे बढ़िया उदाहरण है कि वाहनों को खड़ा ही ना होने दे। बरामदों में अतिक्रमण ना होने दे। ई-रिक्शे वालों को गाइडलाइन जारी कर दें कि जो लाइन उनकी तय है उसे क्रॉस ना करें। धीमी गति से चल रहे हैं तो साइड होकर चले। दुकानों के बाहर वाहनों को खड़ा नहीं होने दे। नियम सबके लिए एकसार लागू होंगे तब सारी परेशानियां दूर होंगी। कारों से उतरकर लोग शॉपिंग के लिए चल जाते है और ड्राइवर या अटैंडेंट कार में बैठे इंतजार करते हैं। पुलिस इनको हटाती नहीं है, इसलिए ट्रैफिक का काफी परेशानी होती है।

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