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जयपुर

पब्लिक डर से नहीं अपनी सुरक्षा के लिए करें नियमों का पालन: राहुल प्रकाश

Tuesday, December 10, 2019 10:30 AM
डीसीपी ट्रैफिक राहुल प्रकाश।

जयपुर। शहर में आए दिन लगने वाले जाम से जहां लोगों की राह मुश्किल थी। आए दिन सड़क हादसों के कारण कई लोग अपनों को खो रहे थे। इन सब के बीच पुलिस का जोर सिर्फ चालान काटना ही रह गया था। इसके साथ ही अवैध वसूली करना आम बात थी। सड़क पर वाहन चालकों से यातायात पुलिस कर्मियों का व्यवहार भी बेरुखा था। कई बार पुलिस अधिकारियों को शिकायत भी प्राप्त हुई थीं। इसी बीच यातायात पुलिस उपायुक्त के पद पर सीनियर आईपीएस राहुल प्रकाश को नियुक्त किया गया। डीसीपी प्रकाश ने अपने कुशल अनुभव और सरल व्यवहार के चलते जयपुर शहर की यातायात व्यवस्था की दिशा और दशा ही बदलना शुरू कर दिया। आमजन के लिए हर समय उपलब्ध होने वाले डीसीपी ने कई बेहतर कार्य किए। शराबी वाहन चालकों पर अंकुश लगा और सड़क हादसों को रोकने के लिए प्रयास हुए। डीसीपी राहुल प्रकाश ने 1 मार्च 2019 को यातायात पुलिस उपायुक्त का पदभार संभाला। वह आगामी 31 दिसंबर को डीआईजी पर पदोन्नत हो जाएंगे। जयपुर शहर यातायात को लेकर उनसे दैनिक नवज्योति संवाददाता ने खास बातचीत की।

सवाल: जयपुर कमिश्नरेट में पुलिस उपायुक्त यातायात का पद संभालने के बाद सबसे बड़े प्रयास क्या किए।
जवाब: मेरी लिए सबसे बड़ी चुनौती थी कि यातायात जाम होने लगता है। लोगों की सबसे बड़ी शिकायत थी कि ट्रैफिक पुलिस चालान में लगी रहती है। उनका कोई ध्यान ट्रैफिक चलाने पर नहीं होता है। मेरा प्रयास था कि आमजन की राह आसान हो सुगम ट्रैफिक मिले। लोग जाम में नहीं फंसे। ज्यादातर जाम लगने वाली जगहों पर सुधार हो। चालान प्राथमिकता पर नहीं हो। उसमें भांकरोटा, कमला नेहरू, अजमेर रोड, रेलवे स्टेशन, कलक्ट्री सर्किल को काउंटर किया। एमआई रोड को भी काफी हद तक खोला। एसएमएस के सामने गाड़ियों की पार्किंग को सुधारा।

सवाल: अपनी प्राथमिकताओं को पूरा करने में आपको सबसे बड़ी कमी क्या लगी।
जवाब: सड़क पर काम कर रहे यातायात पुलिसकर्मी का संवाद अधिकारियों से कम होता है। किसी भी काम को करवाने के लिए बार-बार कहना पड़ता है। आप गाड़ी में बैठकर यातायात को नहीं चला सकते। प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए बार-बार पुलिसकर्मियों के साथ मीटिंग की और उन्हें प्रेरित किया गया। स्टाफ की भी बहुत कमी थी। डीजीपी भूपेन्द्र सिंह और पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव ने स्टाफ उपलब्ध कराया, जिससे मदद मिली।

सवाल: शहर में शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की, इससे क्या लाभ रहा।
जवाब: शहर में शराब पीकर गाड़ी चलाने वाले चालकों ने कई बड़ हादसे किए। ऐसे में शहर में हादसों को रोकने के लिए शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। वाहनों को जब्त किया गया और लाइसेंस के निरस्तीकरण की प्रक्रिया अमल में लाई गई। इससे हादसों पर रोक लगी। स्कूल बसों के खिलाफ अभियान चलाकर बच्चों की सुरक्षा तय की गई।

सवाल: यातायात पुलिस की ओर से की जाने वाली अवैध वसूली पर कैसे अंकुश लगाया।
जवाब: यातायात पुलिस के बारे में जानकारी मिली कि कुछ जगहों पर पुलिसकर्मी वाहन चालक को यातायात गुमटी में लेकर जाते हैं और वहां अवैध वसूली करते हैं। सबसे पहले तय किया गया कि कोई भी पुलिसकर्मी किसी भी वाहन चालक को गुमटी में लेकर नहीं जाएगी। यदि ऐसा करते हुए कोई भी पुलिसकर्मी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके बाद अवैध वसूली पर अंकुश लगा। गुमटियां ढकी रहती थीं, उन्हें खाली कराया। अच्छे काम पर इनाम देना शुरू किया। इसके बाद भी यदि कोई नहीं माना तो उन्हें सख्त सजा दी गई और एक पुलिसकर्मी को तो बर्खास्त किया गया।

सवाल: आईटीएमएस लागू होने से आमजन और प्रशासन को कैसे मदद मिलेगी।
जवाब: सड़क पर ओवर स्पीडिंग को 24 घंटे रोकने लिए सबसे प्रभावी तरीका इंटेलीजेंस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) ही है। यातायात पुलिस की लंबे आवर्स की ड्यूटी होती है। इसके अलावा कई बार वाहन चालक यातायात पुलिसकर्मियों को टक्कर मारकर फरार हो जाते हैं। आईटीएमएस से हर वाहन चालक की गतिविधि कैमरों में कैद हो जाएगी, नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई हो सकेगी। इससे अपराध पर भी अंकुश लगेगा और पुलिस का व्यवहार भी सुधरेगा।

सवाल: ट्रैफिक पुलिस ने कई बदमाशों को पकड़ा है, इन्हें वारदात रोकने के लिए कैसे प्रेरित किया गया।
जवाब: सड़क पर हो रही वारदात को रोकने के लिए पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव का अहम योगदान रहा। उन्होंने कहा कि सड़क पर यातायात पुलिसकर्मी यदि सतर्क रहे तो अपराध रुक सकता है। इसके बाद पुलिसकर्मियों के साथ संवाद कर सतर्क रहने के लिए कहा गया। यातायात पुलिसकर्मी सतर्क हुए तो करीब 50 वारदात रुक सकीं। इनमें सौ पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया है।

सवाल: आप हादसा करने वालों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला भी दर्ज कर रहे हैं, इससे क्या लाभ मिलेगा।
जवाब: एक तरफ लोगों को अवेयरनेस और समझाना जरूरी है साथ ही कई लोग ऐसे होते हैं, जो कानून से नहीं डरते हैं। हादसों से कई परिवार की खुशियां छिनती हैं। ऐसे चालकों में कानून का डर होना बहुत जरूरी है। कानून की सख्ती से हादसों पर रोक लगेगी।

सवाल: पुलिस और आमजन के लिए क्या संदेश है।
जवाब: जयपुर ट्रैफिक पुलिस पूरे राज्य का चेहरा है। यहां देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। जो कई बार यातायात पुलिसकर्मी को देखकर छवि बनाते हैं। ऐसे में हर पुलिसकर्मियों को व्यवहार सही रखना चाहिए। वहीं आमजन इस बात को समझे कि सरकार और प्रशासन जो भी व्यवस्था बना रहें हैं वह उनकी सुरक्षा के लिए है। उसमें सहयोग करें

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