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जयपुर

सांभर झील में पक्षियों की मौत का मामला, HC में राज्य सरकार का जवाब पेश, सुनवाई आज

Friday, November 15, 2019 08:55 AM
वैज्ञानिकों व डॉक्टर्स से जानकारी लेते हुए कलेक्टर जगरूप सिंह यादव।

जयपुर। सांभर झील में पक्षियों की मौत वहां सड़े पक्षियों के शव खाने से हुई है। जिला कलेक्टर जगरूप सिंह यादव ने गुरुवार को सांभर झील क्षेत्र का दौरा कर सैंकड़ों देशी-विदेशी पक्षियों की मौत के कारणों को पता लगाने के लिए काम कर रहे देशभर के वैज्ञानिक, चिकित्सकों एवं अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की एवं यहां स्थापित सेंटर में रेस्क्यू ऑपरेशंस की समीक्षा की। कलेक्टर की निगरानी में पक्षियों के शवों का सुरक्षित निस्तारण कराया जाएगा। नागरिक सुरक्षा की पांच टीमें आज झील के खारे पानी की क्यारियों में पक्षियों के शवों की तलाश करेंगी। 

उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले सांभर झील में पक्षियों की बड़ी संख्या में मौत का मामला सामने आया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने पशुपालन विभाग एवं वन विभाग के अधिकारियों को मौके पर भेजा था। वर्तमान में भी देशभर के पक्षी विशेषज्ञ इन पक्षियों के इतनी बड़ी संख्या में हताहत होने के कारणों का अध्ययन कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार मृत पक्षियों के (मैगेट्स) कीड़े लगे शवों को खाने से फैले संक्रमण के कारण इनकी जान गई है। अब तक करीब 2 हजार पक्षियों की मौत हो चुकी है। पहले दिन करीब 1000 पक्षियों के शव हटवाए गए थे। कुछ और पक्षियों के शव क्यारियों में मृत पड़े हो सकते हैं।

रेस्क्यू सेंटर स्थापित
यादव ने बताया कि पक्षियों के रेस्क्यू के लिए एक रेस्क्यू सेंटर सांभर में स्थापित कर दिया गया है। यहां बुधवार को 31 लकवाग्रस्त पक्षियों एवं गुरुवार को 8 पक्षियों की जान बचाई है। यादव ने बताया कि वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि पक्षियों की जान किसी फ्लू या वायरस के कारण नहीं गई है। ऐसा होने पर इंसानों को सम्पर्क में आने पर खतरा हो सकता था।

सीएम ने की समीक्षा, प्रभावी कदम उठाने के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार की रात को सांभर झील तथा उसके भराव क्षेत्र में पक्षियों की मौतों के मामले की समीक्षा की। उनके सरकारी निवास पर हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अब तक की वस्तुस्थिति के बारे में जानकारी ली और निर्देश दिए कि पक्षियों की मौत के कारणों की जांच कर प्रभावी कदम उठाए जाएं। इसके साथ ही मृत पक्षियों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाए ताकि किसी प्रकार का संक्रमण फैलने की आशंका नहीं रहे।

उन्होंने कहा कि अचानक पक्षियों की मौत होना चिंता का विषय है। राज्य सरकार इसको लेकर गंभीर है। मुख्यमंत्री ने पक्षियों को बचाने के लिए एक और रेस्क्यू सेंटर खोलने के निर्देश दिए हैं। बैठक में बताया गया कि देश के प्रतिष्ठित संस्थान सालीम अली सेन्टर फॉर आर्निथोलोजी एण्ड नेचुरल हिस्ट्री, भारतीय वन्यजीव संस्थान तथा बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के विशेषज्ञों ने आज साइट पर पहुंचकर काम प्रारम्भ कर दिया है। इसके साथ ही राज्य पशुपालन विभाग की टीम ने वहां से सैम्पल लेकर भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग केन्द्र में भेजे दिए थे।

पक्षियों की मौत के मामले में जवाब पेश, सुनवाई आज

सांभर झील में विदेशी पक्षियों की मौत के मामले में हाईकोर्ट की ओर से लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर राज्य सरकार ने अपना जवाब पेश कर दिया है। हाईकोर्ट की खंडपीठ मामले में शुक्रवार को सुनवाई करेगी। राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि पक्षी वैज्ञानिकों की एक्सपर्ट टीम को बुला लिया है। यह टीम सांभर पहुंच गई है और जांच भी शुरू कर दी है और परिणाम चार से पांच दिन में मिलने की संभावना है।

सरकार ने जवाब में प्रवासी पक्षियों की मौत के संभावित कारणों में वायरल इंफेक्शन होना बताया है। जवाब में कहा गया है कि झील के बड़े हिस्से में 20 साल बाद पानी भरा है। संभावना है कि किनारों पर नमक की ज्यादा मात्रा से ये मौतें हो रही है। इसके अलावा बैक्टिरियल इंफेक्शन भी हो सकता है। झील के जल स्तर में बढ़ोतरी और बढ़े हुए तापमान के कारण पक्षियों में आपसी संघर्ष भी मौत का कारण हो सकता है। एक कारण पक्षियों का लंबी यात्रा के दौरान पर्याप्त भोजन नहीं मिलने, प्रदूषण के कारण कमजोरी और थकान भी हो सकती है। सरकार की ओर से पेश प्रारंभिक जवाब में कहा गया कि प्रवासी पक्षियों की मौत की जानकारी मिलते ही सरकार ने पशु चिकित्सकों की टीम मौके पर भेज दी थी और इनकी सलाह पर ही मृत पक्षियों के शवों को चूने के साथ गहराई में दफन किया जा रहा है।
 

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