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इंडिया गेट

इसी जमीं में पुरखों को बो दिया हमने, मगर...

Wednesday, May 01, 2019 09:15 AM
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फाइल फोटो)

सांसद बनने के पंद्रह साल बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल उठे हैं। सवाल मोदी सरकार की ओर से उठाया गया है और हवाला भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत का है। खबर है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत को आधार बनाते हुए राहुल को नोटिस जारी कर दिया है। सुब्रमण्यम स्वामी का नेहरू गांधी परिवार से परंपरागत द्वेष रहा है। वे एक लंबे समय से राहुल की नागरिकता पर सवाल उठाते रहे हैं। सोनिया गांधी को इटली का नागरिक बताना या फिर राहुल गांधी की नागरिकता पर यों सवाल उठाना उनका पुराना शगल रहा है।

पर राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल उठाने के उनके इस शगल का आखिर आधार क्या है? इस मामले में जो अपन जानकारी इकट्ठा कर पायें हैं उसके मुताबिक किसी एमएल शर्मा नाम के शख्स ने नवंबर 2015 में इसी आशय की एक याचिका अदालत में दायर की थी। पर अदालत ने याचिका को बेबुनियाद मानते हुए खारिज कर दिया था। जो याचिका दायर की गई थी उसमें बताया गया था कि राहुल गांधी 2003 में बनाई गई एक कम्पनी बैकआॅप्स लिमिटेड के निदेशक मंडल में शामिल था। कंपनी की ओर से जो रिटर्न फाइल किया गया उसमें उनकी नागरिकता ब्रिटिश बताई गई है। पर असल में, यह चार्टर एकाउटेंट की भूल लगती है।

क्योंकि बताया जाता है कि कंपनी के इनकॉरपोरेशन सर्टिफिकेट में राहुल गांधी की नागरिकता भारतीय बताई गई है। जानकारों की मानें तो तकनीकी तौर पर अनकॉरपोरेशन सर्टिफिकेट में जो नागरिकता दर्ज है वही सही है। यानी विवाद ही खत्म है। मुमकिन है कि नवम्बर 2015 में अदालत ने इसी आधार पर एमएल शर्मा की याचिका खारिज भी कर दी हो। पर आज वही सवाल दोबारा खड़ा किया गया है। अबके याचिका के मार्फत अदालत में नहीं अलबत्ता सरकारी दांवपेंच के सहारे। स्वामी की शिकायत के आधार पर गृह मंत्रालय ने इस बारे में राहुल से एक पखवाड़े के भीतर उनका ‘तथ्यात्मक रुख’ पूछा है। गृह मंत्रालय ने एक पत्र में कहा कि उसे भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से अर्जी मिली है।

उसमें कहा गया है कि राहुल गांधी ब्रिटेन में 2003 में पंजीकृत कंपनी बैकआॅप्स लिमिटेड के डायरेक्टर्स में शामिल थे। मंत्रालय के अनुसार, स्वामी का कहना है कि ब्रिटिश कंपनी के 10 अक्टूबर, 2005 और 31 अक्टूबर, 2006 को भरे गए वार्षिक टैक्स रिटर्न में गांधी की जन्म तिथि 19 जून, 1970 बताई गई है। उसमें गांधी को ब्रिटिश नागरिक बताया गया है। यानी अदालत की ओर से खारिज सवालों को फिर से खड़ा करने की कवायद है। पर इस कवायद का मकसद क्या है? राहुल गांधी को जवाब के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। गौर करने वाली बात है कि इन्हीं पंद्रह दिनों में चुनाव का आखिरी दौर भी आ जाएगा और राहुल गांधी के जवाब पर गृह मंत्रालय किसी नतीजे पर पहुंचे इससे पहले 23 मई का दिन भी जाएगा। और 23 मई के बाद कौन कहां होगा, कोई नहीं जानता।

मुमकिन है तमाम सवालों की तरह राहुल गांधी की नागरिकता का यह सवाल किस गर्त में चला जाएगा, इसका भी अनुमान लगाया जा सकता है। पर फिलहाल तो यह एक चुनावी हथकंडे के तौर पर मुल्क के सामने है। सुब्रमण्यम स्वामी की तरह ही तमाम खबरिया चैनलों के एंकरों को भी राहुल गांधी की नागरिकता पर शक होने लगा है। गोदी मीडिया के इस शक पर एकबारगी एक शेर याद आता है। ‘इसी जमीं में पुरखों को बो दिया हमने, मगर, हमारे भाई को आज तलक मुझ पर शक है।’ क्या यह हकीकत नहीं है कि राहुल गांधी के पिता का नाम राजीव गांधी था?

जो कभी इस मुल्क के प्रधानमंत्री भी थे। क्या स्वामी यह नहीं जानते कि उन्हीं के सूबे तमिलनाडु में एक आतंकी हमले में उनकी मौत हुई थी। कहते हैं कि उनके जूतों से उनके क्षत-विक्षत शरीर की पहचान की गई थी। राहुल गांधी की नागरिकता पर शक करने वाले क्या नहीं जानते कि उनकी दादी का नाम इंदिरा गांधी था। वे भी इस मुल्क की प्रधानमंत्री थीं। उनके अंगरक्षकों ने ही उनकी हत्या कर दी थी। कहते हैं कि उनके शरीर में इतनी गोलियां लगी थीं कि उन्हें निकाला भी नहीं जा सका था। राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल उठाने वाले क्या नहीं जानते कि उनके परनाना का नाम पंडित जवाहर लाल नेहरू था, जो इस मुल्क के पहले प्रधानमंत्री थे।

ये वही नेहरू हैं जिनने अपने खून पसीने से इस मुल्क में लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत किया है। इस मुल्क में आज जो कुछ भी अच्छा है जिस पर अपन गर्व कर सकते हैं, उसमें आप देखना चाहे या न देखना चाहें, नेहरू का अक्स समाया है। फिर भी अगर मोदी सरकार को राहुल गांधी की नागरिकता पर उनका तथ्यात्मकि रुख चाहिए, तो यह उसका अख्तियार है। पर इस अख्तियार का असली मकसद भी यह मुल्क समझता है।

- शिवेश गर्ग

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