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इंडिया गेट

योगीजी की वक्रोक्ति

Thursday, April 08, 2021 10:30 AM
योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी फिसलती जुबान या कह लें अपनी बदजुबानी की वजह से बुरे फंसे हैं। बीते मंगलवार को योगीजी कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद न्यूज एजेंसी को रूटीन बयान दे रहे थे। इस वीडियो में मुख्यमंत्री अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते सुने गए। इस लाइव वीडियो के एक छोटे से क्लिप को पूर्व आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने अपने सोशल मीडिया पर ट्वीट किया था, जो कि काफी तेजी से वायरल हो गया। वीडियो का वायरल होना योगी जी के लिए फजीहत का सबब बन गया। फजीहत जब चौतरफा बढ़ गई, तो योगीजी के महकमे की ओर से सफाई पेश की गई। आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी ने दावा किया कि ये वीडियो फेक है। बात यहीं तक होती तो भी एक बात थी। मगर योगीजी का महकमा तो डराने और धमकाने पर आमादा नजर आया।

शलभमणि त्रिपाठी को धमकी भरे लहजे में यह कहते सुना गया कि जो भी इस वीडियो को ट्वीट करेगा, उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। हवाला किसी गुममान वेबसाइट ब्रेकिंग ट्यूब की एक खबर का दिया गया। खबर में दावा किया गया था कि योगी आदित्यनाथ की वीडियो से छेड़छाड़ की गई है। खबर में यह दावा तो कर दिया गया था कि योगी जी की बदजुबानी का वीडियो फेक है। पर वीडियो के फेक होने के दावे का आधार क्या है। इस बात का खुलासा करने की जहमत नहीं उठाई गई। वैसे, यह पहला मौका नहीं है, जब योगी सरकार ने खुद की आलोचनाओं को खामोश करने के मकसद से इस तरह की धमकी दी हो। राज्य सरकार ने इससे पहले भी कई मौकों पर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है। सूबे की सरकार के खिलाफ खबरें छापने वाले तमाम पत्रकार सलाखों के पीछे बंद हैं। जिसमें केरल के पत्रकार सिद्दकी कप्पन का नाम सबसे अहम है, जो फिलहाल राजद्रोह के आरोप में जेल में बंद हैं।

मिर्जापुर के एक स्कूल में मिड-डे मील के तहत बच्चों को रोटी और नमक परोसने की खबर प्रसारित करने की वजह से पत्रकार पवन जायसवाल के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किया गया था। सीतापुर के क्वारेंटाइन सेंटर में अनियमितताओं की खबर लिखने के चलते एक अन्य पत्रकार रवीन्द्र सक्सेना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। साथ ही स्क्रॉल-इन की पत्रकार सुप्रिया शर्मा और द वायर के सिद्धार्थ बरदाराजन और इस्मता आरा के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया था। बहरहाल, शलभमणि त्रिपाठी की ओर से पेश की गई सफाई के चंद घंटों के बाद ही न्यूज 18 और एबीपी गंगा की भी लाइव फीड सामने आई, जिसमें आदित्यनाथ साफ तौर से आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करते हुए दिखाई दे रहे थे। बाद में बूम लाइव और ऑल्ट न्यूज ने भी तथ्यों की जांच के बाद दावा किया कि योगी आदित्यनाथ ने अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया था और इस वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई थी। मुनासिब तो यह होता कि बात-बात में विरोधियों को शुचिता, संस्कार और पवित्रता का उपदेश देने वाले योगीजी अपनी फिसलती जुबान के लिए जनता से माफी मांग लेते। मगर इसके उलट वे सीनाजोरी करते नजर आए और चौतरफा फजीहत को शांत करने के लिए उनने एफआईआर और धमकियों का सहारा लिया।

दावा किया जा रहा है कि योगी आदित्यनाथ जैसा नेता इस तरह की टिप्पणी नहीं कर सकता है। अब हाथ कंगन को आरसी क्या। योजी जी की वाकपटुता और वक्रोक्ति का नजारा दुनिया देख चुकी है। योगीजी को करीब से जानने वाले बताते हैं कि योगीजी जी जिस जमात की नुमाइंदगी करते हैं, वहां ऐसी वक्रोक्तियों का इस्तेमाल आम है। माना जाता है कि जो जितना बड़ा संत है उसके मुखारबिंदु से वक्रोक्तियों की प्रवाह निकलती है। मगर योगीजी का संकट यह है कि वे फिलहाल संतई छोड़कर सियासत कर रहे हैं और वह भी एक ऐसी पार्टी की जो शुचिता, पवित्रता और संस्कार को अपने विरोधियों के खिलाफ सियासी हथियार के तौर पर इस्तेमाल करती है और योगीजी तो खुद को इन तीनों के संगम के तौर पर पेश करते रहे हैं। हालांकि जानकारों का दावा है कि वे इससे पहले भी सार्वजनिक रूप से वक्रोक्तियों का इस्तेमाल करते सुने गए हैं। बताया जाता है कि योगीजी को फर्स्ट न्यूज राजस्थान के प्रसारण में भी वक्रोक्ति का इस्तेमाल करते सुना जा सकता है। यानी योगीजी तमाम बनावट के बाद भी जमात से मिले संस्कार को छोड़ नहीं पा रहे हैं। बहरहाल, पूरे मामले में सबसे शर्मनाक मीडिया के एक तबके या कह ले गोदी मीडिया का रवैया रहा।

खासतौर से उस टीवी न्यूज एजेंसी की मालकिन जिसके रिपोर्टर के लिए योगीजी ने वक्रोक्ति का इस्तेमाल किया था। ऑल्ट न्यूज के मुताबिक उसने जब एएनआई के मुख्य संपादक स्मिता प्रकाश से संपर्क किया तो उनका जवाब था कि मुझे आपसे बात करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। बाद में स्मिता प्रकाश एक खबरिया चैनल पर योगीजी का बचाव करती नजर आर्इं। पर डर और लोभ की वजह से स्मिता प्रकाश और गोदी मीडिया के तमाम पत्रकारों को इस बात का इल्म नहीं है कि उन्होंने पत्रकारिता और एक पत्रकार की मर्यादा को किस रसातल में धकेल दिया है। फर्ज कीजिए कि अगर आज योगीजी की जगह किसी विपक्षी पार्टी के मुख्यमंत्री ने यह बदजुबानी की होती तो गोदी मीडिया के एंकर प्राइम टाइम में कैसे नाच रहे होते।
-शिवेश गर्ग (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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