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कोरोना काल की तीन खबरें

Tuesday, November 24, 2020 10:20 AM
सांकेतिक तस्वीर।

तीन खबरें हैं। तीनों कोरोना काल की हैं और गरीब, मजदूरों और आम आदमी की दुश्वारियों से बावस्ता हैं। पहली खबर है कि संसद की एक समिति ने कोरोना महामारी के कारण स्वास्थ्य पर अप्रत्याशित खर्च के चलते कई परिवारों के गरीबी रेखा से नीचे जाने की संभावनाओं को लेकर चिंता जाहिर की है। संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि लॉकडाउन के दौरान हॉस्पिटल के कई विभागों को बंद करने के कारण स्वास्थ्य सुविधाएं काफी प्रभावित हुई हैं और इसका सबसे ज्यादा खामियाजा महिलाओं को उठाना पड़ा है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर संसद की स्थाई समिति ने कोरोना महामारी को लेकर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और इससे विभिन्न क्षेत्रों में पड़े प्रभावों का आकलन किया है और इस पर एक रिपोर्ट तैयार कर राज्यसभा चेयरमैन एम. वैंकैया नायडू को सौंप दिया है।

यह महामारी का पहला आधिकारिक आकलन है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कोविड-19 मामलों को ध्यान में रखते हुए अस्पतालों में बेड्स की संख्या काफी अपर्याप्त थी। जब केस और बढ़ने लगे तो अस्पतालों में खाली बेड नहीं मिलने की भयावह तस्वीर सामने आई और इसके चलते अस्पतालों से मरीजों को लौटाना एक सामान्य सी बात हो गई। समिति ने ये भी कहा कि सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाओं को बंद करने के कदम ने स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को एकदम निष्क्रिय कर दिया और इसके चलते गैर-कोविड मरीजों विशेषकर महिलाओं एवं घातक बीमारी वाले मरीजों को सबसे ज्यादा खामियाजा उठाना पड़ा। इसके साथ ही संसदीय समिति ने इलाज में भारी खर्च पर भी चिंता जाहिर की है। उसने कहा कि महामारी के चलते लोगों को स्वास्थ्य पर अत्यधिक खर्च करना पड़ा है। इसके चलते कई परिवारों के गरीबी रेखा से नीचे जाने की आशंका है।

समिति ने कहा कि कोरोना के इलाज में आने वाले खर्च के लिए यदि एक उपयुक्त मॉडल तैयार किया जाता तो इससे कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। दूसरी खबर कॉरपोरेट की कमाई का है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी यानी सीएमआईई की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक 2020 की तीसरी तिमाही में, भारत की सबसे बड़ी कंपनियों ने 1.33 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड मुनाफा कमाया है, जो किसी भी अन्य तिमाही में सबसे अधिक है। गौर करने की बात है कि यह मुनाफा इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में छाई महामारी और लॉकडाउन के कारण उनकी आय में आई गिरावट के बावजूद है। सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक जून 2020 की तिमाही के अंत में इन कंपनियों की आय में 27 फीसद की गिरावट आई थी, और सितंबर तिमाही के लिए जारी आंकड़े भी लगभग 6 फीसद आय में गिरावट को दर्शाता है। फिर भी उनके मुनाफे में तेजी आई है। यह आंकड़ा बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में सूचीबद्ध 1,897 कंपनियों से संबंधित है।

जानकारों के मुताबिक यह जादू इसलिए हुआ क्योंकि बड़ी कंपनियों ने अपने खर्चों में भारी कटौती की है। उनने मजदूरों को या तो नौकरी से निकाल दिया या कम वेतन के अनुबंध के तहत काम पर रखा, जिससे उनके खर्च में भारी कटौती हुई। उनने कच्चे माल, यूटिलिटीज और भंडारण पर भी खर्चों को कम कर दिया था। कुल मिलाकर यह सब इन कंपनियों के मुनाफे को बढ़ाने में मददगार साबित हुआ। जाहिर है कंपनियों को यह मुनाफा मजदूरों और आम लोग की दुश्वारियों के बरक्स है, जो आर्थिक मंदी और महामारी की मार की कीमत चुका रहे हैं। जो बेरोजगारी, कम मजदूरी, कल्याणकारी कार्यक्रमों में सरकारी फंड की कमी, और अंत में परिवार के खर्च और खपत में कमी के रूप में मुल्क के सामने है। जिस पर फिलहाल संसद की समिति भी चिंतित है। जानकारों के मुताबिक संकट गहरा हो चुका है क्योंकि क्योंकि मांग लगातार नीचे जाती जा रही और सरकार ने खर्च बढ़ाने से इनकार कर अर्थव्यवस्था को डूबने दिया है। और दूसरी ओर, कमाल देखिए कि मुल्क के बड़े उद्योगपति और कारोबारी ने आपदा को अवसर में तब्दील करने के जुमले को कारगर साबित करते हुए इस संकट को मुनाफाखोरी का जरिया बना लिया।

इस मुनाफाखोरी में मुल्क की सरकार धनकुबेरों की किस तरह से मदद कर रही है इसकी बानगी तीसरी खबर है। खबर है कि भारत सरकार के श्रम मंत्रालय ने संसद में हाल ही में पारित एक संहिता में कार्य के घंटे को बढ़ाकर अधिकतम 12 घंटे प्रतिदिन करने का प्रस्ताव दिया है। अभी कार्य दिवस अधिकतम 10.5 घंटे का होता है। मंत्रालय ने व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य शर्तें (ओएसएच) संहिता 2020 के मसौदा नियमों के तहत अधिकतम 12 घंटे के कार्य दिवस का प्रस्ताव दिया है। जानकारों के मुताबिक फैक्टरीज एक्ट, 1948 में अधिकतम कार्यदिवस को 10.5 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे करने से कामगारों पर कुछ विपरित प्रभाव पड़ सकता है। अधिकतम कार्यदिवस को 12 घंटे किए जाने से नियोक्ता पूरी अवधि के लिए श्रमिकों को काम पर रखने के लिए प्रोत्साहित होंगे। यानी कोरोना काल में सरकार की ओर से मुनाफाखोरों के लिए तमाम प्रोत्साहन हैं और मजदूरों के हिस्से तमाम दुश्वारियां मसलन, शोषण, भूख, गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, महामारी और मौत है।
शिवेश गर्ग (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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