Dainik Navajyoti Logo
Sunday 20th of June 2021
 
इंडिया गेट

चव्हाण का बयान और कांग्रेस की सियासत

Friday, January 24, 2020 10:30 AM
फाइल फोटो

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने एक दिलचस्प खुलासा किया है। उनने कहा है कि कि वे (कांग्रेस) मुस्लिम भाइयों की अपील पर भाजपा को हटाने के लिए सरकार में शामिल हुए हैं। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण ने एक दिलचस्प खुलासा किया है। उनने कहा है कि कि वे (कांग्रेस) मुस्लिम भाइयों की अपील पर भाजपा को हटाने के लिए सरकार में शामिल हुए हैं। हमारे तमाम मुस्लिमों ने कहा भाजपा हमारी दुश्मन है। अगर भाजपा को रोकना है तो कांग्रेस को सरकार में शामिल होना चाहिए। अशोक चव्हाण रविवार शाम को महाराष्ट्र के नांदेड में नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध में आयोजित एक जनसभा में बोल रहे थे। उनने कहा कि जब तक हमारी सरकार है तब तक राज्य में इसे लागू नहीं होने देंगे। अशोक चव्हाण कांग्रेस के बड़े नेता हैं। फिलहाल शिवसेना नीत उद्धव सरकार के मंत्री हों, लेकिन इससे पहले वे सूबे के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। लिहाजा वह जो कुछ भी बोलते हैं, उसके अपने सियासी मायने हैं। अगर उनकी मानें तो महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार में कांग्रेस मुस्लिम भाइयों के कहने पर शामिल हुई है। गौर करने की बात यह है कि एक ऐसे कार्यक्रम में कही है जो सीएए के विरोध में आयोजित की गई थी। यानी जाहिर है उनने सियासी मकसद से ही ऐसे बयान दिया है और मकसद तब और दीगर हो जाता है, जब विपक्षी दल भाजपा यह लगातार इन कोशिशों में जुटी है कि सीएए का विरोध केवल मुसलमान कर रहे हैं। भाजपा इस मौके को हाथ से नहीं जाने देगी। लिहाजा उसने अशोक चव्हाण के बयान के हवाले से कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाया है। भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा है कि अशोक चव्हाण के बयान से साफ है कि कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण की सियासत करती है।

फिलहाल अशोक चव्हाण का सियासी संकट यह है कि वे यह भी नहीं कह सकते कि भाजपा हिंदू तुष्टिकरण की सियासत कर रही है। हालांकि यह हकीकत है कि भाजपा की सियासत का केन्द्रीय तत्व ही हिन्दू तुष्टिकरण और हिंदुत्व की सियासत है। दूसरी ओर, अशोक चव्हाण जिस पार्टी की सियासत कर रहे हैं उस पर आरोप है कि वह मुस्लिम तुष्टिकरण करती है और मुसलमानों की पार्टी बन कर रह गई है, जब 2014 के लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस ने हार के कारणों को जानने के लिए एके एंटोनी कमेटी गठित की थी, तो कमेटी ने अपनी रपट में लिखा था कि कांग्रेस की पहचान एक मुस्लिम परस्त पार्टी के तौर पर बन रही है। और पार्टी को अगर अपना खोया जनाधार वापस पाना है तो उसे इस छवि को तोड़ना होगा। हालांकि तब से लेकर अब तक गंगा और यमुना में काफी पानी बह चुका है। तमाम सूबों के विधानसभा नतीजों में यह धारणा टूटती नजर आई है। ऐसे में कांग्रेस की सियासत से महाराष्ट्र का सियासी फेरदबल एक अहम परिघटना है। सूबे के विधानसभा चुनाव के नतीजों में भाजपा और शिवसेना गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला था, लेकिन नतीजों के बाद वहां की सियासत ने उलटी करवट ले ली। अब इसे भाजपा आलाकमान की जिद कहें या फिर शिवसेना की सियासी जरूरत, भाजपा को सूबे की सत्ता से हाथ धोना पड़ा और सूबे में पहली बार शिवसेना की अगुवाई वाली सरकार बनी, जहां तक सरकार गठन में कांग्रेस की भूमिका का सवाल है, तो उसके लिए यह सुनहरा अवसर था, जब वह खुद पर मुस्लिम परस्ती के चस्पा हो रहे आरोप को एक झटके में उतार फेंके, क्योंकि जहां तक शिवसेना का सवाल है, तो वह भी भाजपा की तरह ही हिन्दुत्व की विचारधारा में विश्वास रखती है। और उसमें मराठा प्राइड के एक और एंगल के साथ। शिवसेना नीत सरकार को समर्थन देकर वह न केवल भाजपा को सूबे की सत्ता से दूर रखने में सफल रही। कई और सियासी मकसद भी साधे, जहां तक भाजपा के तमाम हिन्दुत्ववादी एजेंडों का सवाल है अबतक शिवसेना उसमें अहम किरदार रही है।

कांग्रेस ने शिवसेना को अपने पाले में लेकर भाजपा से उसका एक अहम साझीदार छीन लिया है। गौर करने की बात है। भाजपा नेता जब भी अपने हिंदुत्ववादी एजेंडे पर आगे बढ़ते हैं, तो शिवसेना के किसी एक नेता का बयान उनके उत्साह पर पानी डाल देता है। बानगी के तौर पर पिछले दिनों जब दिल्ली में जेएनयू में गुंडों ने कैंपस में घुसकर छात्रों पर हमला किया तो उद्धव ठाकरे ने उसकी तुलना मुंबई आतंकी हमले से कर डाली, जहां तक सीएए का सवाल है, तो इस विवादित कानून का शिवसेना पुरजोर विरोध कर रही है। सीएए के सवाल पर कांग्रेस और शिवसेना दोनों के सुर आज एक हैं। मुंबई और महाराष्ट्र के कई शहरों में सीएए का विरोध लगातार जारी है। कल्पना कीजिए अगर महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना की सरकार होती, तो भाजपा को कितना बड़ा संबल होता, जिस तरह उत्तर प्रदेश सरकार सीएए के विरोध का दमन कर रही है, वैसा ही कुछ महाराष्ट्र में भी हो रहा होता। शिवसेना का कांग्रेस के खेमे में शामिल हो जाना भाजपा के हिंदुत्ववादी एजेंडे को कमजोर कर रहा है और यह कांग्रेस की सियासत से बेहद अहम है। अब अशोक चव्हाण ही जाने कि उनने यह बयान किस किस कैफियत में दिया है, लेकिन उनका यह बयान कांग्रेस की मौजूदा हालात और सियासत का एक आंशिक पहलू ही है।

- शिवेश गर्ग
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

 

परफेक्ट जीवनसंगी की तलाश? राजस्थानी मैट्रिमोनी पर निःशुल्क  रजिस्ट्रेशन करे!

यह भी पढ़ें:

अर्नब के बरक्स प्रेस की आजादी पर बहस-1

जब से रिपब्लिक टीवी के मालिक और संपादक अर्नब गोस्वामी को एक बेहद संगीन आपराधिक मामले में गिरफ्तारी हुई है। तब से चाय की प्याली में तूफान खड़ा हो गया है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस चल निकली है।

06/11/2020

एक राजनेता का गैर-राजनीतिक साक्षात्कार

जब बीच चुनाव के दौरान सुप्रीम कोर्ट की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर बने बॉयोपिक पर रोक लगा दी गई, तो उनने प्रचार का एक नया तरीका इजाद कर लिया।

26/04/2019

भीमा कोरेगांव का नया एंगल

भीमा कोरेगांव से जुड़े नए खुलासे किसी बड़ी साजिश का इशारा करते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका स्थित एक डिजिटल फोरेंसिक फर्म ने पाया है कि भीमा कोरेगांव मामले की जांच कर रही पुलिस की ओर से मामले के एक आरोपी रोना विल्सन के एक लैपटॉप में मालवेयर का इस्तेमाल करते हुए 'भड़काऊ' सबूत डाले गए थे।

17/02/2021

यह जूता एक इबारत है

आमतौर पर हर कहावत का अपना एक माजी होता है। समय और समाज की प्रयोगशाला से पगी और निकली ये कहावतें अक्सर सत्य की तरह बेहद कड़वी और क्रूर होती हैं।

19/04/2019

एक चोट भाजपा पर भारी

लोकसभा चुनाव के बाद से ही बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे भाजपा के रणनीतिकारों को अब इस बात का बखूबी एहसास हो चला होगा कि ममता बनर्जी से निपटना किस कदर मुश्किल है। मुल्क के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्रिगेड मैदान की रैली में ममता बनर्जी के स्कूटी चलाने पर तंज कसते हुए कहा था कि दीदी की स्कूटी नंदीग्राम में गिरना तय है, हम इसमें क्या कर सकते हैं। संयोग देखिए कि संकेत के तौर पर कही गई ये बात अलग तरह से सच हो गई।

13/03/2021

test heading

fff

11/04/2019

गतिरोध बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तीनों विवादित कृषि कानूनों पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी। साथ ही न्यायालय ने इन कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले किसानों और सरकार के बीच व्याप्त गतिरोध दूर करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। अदालत की ओर से गठित की जाने वाली समिति इन कानूनों को लेकर किसानों की शंकाओं और शिकायतों पर विचार करेगी।

13/01/2021