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भीमा कोरेगांव का नया एंगल

Wednesday, February 17, 2021 11:20 AM
फाइल फोटो।

भीमा कोरेगांव से जुड़े नए खुलासे किसी बड़ी साजिश का इशारा करते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका स्थित एक डिजिटल फोरेंसिक फर्म ने पाया है कि भीमा कोरेगांव मामले की जांच कर रही पुलिस की ओर से मामले के एक आरोपी रोना विल्सन के एक लैपटॉप में मालवेयर का इस्तेमाल करते हुए 'भड़काऊ' सबूत डाले गए थे। विल्सन उन 15 कार्यकर्ताओं, वकीलों और शिक्षाविदों के एक समूह में शामिल हैं, जिन्हें 1 जनवरी, 2018 को हुई हिंसा के बाद महाराष्ट्र में जेल में कैद किया गया है। इन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की कथित साजिश रचने का आरोप है। मामले की पृष्ठभूमि के तौर पर यह जान लेना भी लाजमी है कि भीमा कोरेगांव में पेशवा की सेना के सामने अंग्रेजों ने महार रेजीमेंट को खड़ा किया था, जिसमें पेशवा को हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन इस जीत को अंग्रेजों से अधिक सवर्ण पेशवा के मुकाबले खड़े अनुसूचित जाति वर्ग के महारों की जीत माना गया था।

घटना के दिन यानी 1 जनवरी, 2018 को भीमा कोरेगांव में युद्ध स्मारक के पास हजारों दलित इस ऐतिहासिक जीत के जश्न के लिए जमा हुए थे। लेकिन इस दौरान पथराव और हिंसा की घटना हो गई। पुलिस ने पहले संभाजी भिड़े, मिलिंद एकबोटे जैसे हिंदुत्ववादी नेताओं को इसके लिए गिरफ्तार किया। लेकिन बाद में एल्गार परिषद के सदस्यों के भाषणों को हिंसा भड़कने के लिए जिम्मेदार माना गया। इस संबंध में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की और अगले कुछ दिनों में मुल्कभर में तमाम सियासी, सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई। घटना के तार सत्ता पलटने और प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश से भी जोड़े गए। तब पुणे पुलिस ने कई वामपंथी कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों के घरों और दफ्तरों पर छापे मारे थे। तकरीबन 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं में जेल में बंद और जमानत से वंचित वकील सुधा भारद्वाज, कार्यकर्ता वरवारा राव, सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गडलिंग, शोमा सेन, महेश राउत, अरुण परेरा, वर्नोन गोंसाल्वेस, हनी बाबू, स्टेन स्वामी, गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबड़े शामिल हैं।

दो साल से अधिक वक्त बीत गया और अब तक इस मामले में किसी ठोस नतीजे पर पहुंचा नहीं जा सका है। फिलहाल यह मामला अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने छपी एक रिपोर्ट के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में है। रिपोर्ट के मुताबिक रोना विल्सन के कम्प्यूटर में सेंधमारी कर साजिशों वाले मेल डाले गए और इस तरह वे एक गंभीर आरोप का शिकार हुए। रिपोर्ट के मुतबिक आर्सेनल कंसल्टिंग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए वाशिंगटन पोस्ट ने कहा कि अमेरिकी फोरेंसिक फर्म ने पाया कि एक हमलावर (हैकर) ने एक्टिविस्ट रोना विल्सन की गिरफ्तारी से पहले उनके लैपटॉप में घुसपैठ करने के लिए मालवेयर का इस्तेमाल किया था और अपने कंप्यूटर से कम से कम 10 इंक्रिमिनेटिंग लेटर (फंसाने वाले दस्तावेज) विल्सन के लैपटॉप में डाले। ये वह पत्र हैं जो पुणे पुलिस ने भीमा कोरेगांव मामले में दायर आरोपपत्र में अपने प्राथमिक साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किए थे। पहले मामले की जांच पुणे पुलिस कर रही थी, लेकिन बाद में मामले को केंद्रीय राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दिया गया।

एनआईए गृह मंत्रालय के अंतर्गत आती है, जिसके मुखिया अमित शाह हैं। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि इन 10 पत्रों में एक पत्र वो भी था, जिस के आधार पर पुलिस ने दावा किया था कि विल्सन ने एक माओवादी आतंकी को पत्र लिखा था, जिसे एक बड़ी माओवादी साजिश के रूप में देखा जा रहा था। और यहां तक कि इस पत्र में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के लिए प्रतिबंधित समूह से बंदूक और गोला-बारूद जुटाने की आवश्यकता पर चर्चा कर रहे थे। रिपोर्ट में पाया गया कि पत्र विल्सन के लैपटॉप में हिडन फोल्डर द्वारा प्लांट किया गया था। दूसरी ओर, एनआईए का कहना है कि विल्सन के लैपटॉप की जो फोरेंसिक जांच एजेंसी ने करवाई है उसमें किसी वायरस के होने के सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि वाशिंगटन पोस्ट का दावा है कि उसने इस रिपोर्ट की जांच तीन स्वतंत्र जांच एजेंसियों से करवाई और सबने इसे सही माना है। जिस सर्वर और आईपी एड्रेस से विल्सन पर साइबर हमले की बात की जा रही है, उसी से कुछ और लोग भी साइबर हमले का शिकार हुए हैं।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 80 वर्षीय कवि-एक्टिविस्ट और सह आरोपी वरवरा राव के खातों से एक संदिग्ध ई-मेल की सीरीज के बाद से ही 2016 में विल्सन के लैपटॉप से छेड़छाड़ की गई। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बीते साल कहा था कि नौ लोगों को नेटवायर ने इस तरह के ई-मेल भेजे थे। वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में काम कर रही कंपनी क्राउड स्ट्राइक के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एडम मेयर्स ने कहा कि यह संयोग नहीं है कि एक ही सर्वर और आईपी एड्रेस आर्सनल और एमनेस्टी दोनों की जांच में पाया गया है। बहरहाल, रोना विल्सन के वकीलों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अर्जी देकर उनकी रिहाई की और नए सिरे से पूरे मामले की जांच की मांग की है।
-शिवेश गर्ग (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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