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इंडिया गेट

लॉकडॉउन में ढील की दरकार

Monday, April 13, 2020 17:45 PM
पीएम नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

मुल्क को फिलहाल लॉकडाउन बढ़ाए जाने के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से औपचारिक ऐलान का इंतजार है। इससे पहले उनने बीते सप्ताह मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में लॉकडाउन में कुछ ढील के साथ जारी रखने का जरूर संकेत दिया है। उन्होंने कहा था कि जान और जहान दोनों का ध्यान रखना जरूरी है। वैसे लोगों में यह मसला जेरेबहस है कि मुल्क भर में लॉकडाउन की मियाद मंगलवार को समाप्त हो रही है, ऐसे में क्या यह समयसीमा बढ़ाई जाएगी या नहीं। सरकारी सूत्रों की माने तो आर्थिक गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। केंद्र सरकार ऐसे इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को शुरू करना चाहती है, जहां कोविड-19 के मामले कम हैं।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि अगर कोरोना संकट की वजह से लॉकडाउन का विस्तार होता है तो जरूरी सावधानियों के साथ कुछ और औद्योगिक गतिविधियों को शुरु करने की इजाजत दी जानी चाहिए। वाणिज्य सचिव गुरुप्रसाद मोहपात्रा ने गृह मंत्रालय को एक चिट्ठी भेजी है जिसमें अनुरोध किया गया है कि ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कुछ दूसरे सेक्टरों में उत्पादन की आंशिक रूप से मंजूरी दी जा सकती है। बताया जाता है कि उद्योग मंत्रालय की ओर से मुल्क के तमाम सूबों से सलाह मशविरा के बाद यह सुझाव दरपेश किया गया है। वाणिज्य मंत्रालय ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि कुछ क्षेत्रों में उत्पादन की अनुमति देने से आर्थिक हालात सुधरेंगे और लोगों के पास थोड़ा पैसा आएगा, जिसकी उन्हें सख्त जरुरत है।

कहने की दरकार नहीं कि वाणिज्य मंत्रालय का यह सुझाव प्रधानमंत्री के जान और जहान वाले जुमले से मेल खाता है। पर एक ऐसे माहौल में, जब कोरोना के संक्रमण के मामले में कोई कमी दर्ज नहीं की जा सकी है यह फैसला बेहद सावधानी की दरकार रखता है। बेशक, कोरोना संक्रमण को रोकने में लॉकडाउन की अहम भूमिका है। सरकार भी यह दावा कर चुकी है कि अगर लॉकडाउन नहीं किया जाता तो 15 अप्रैल तक कोविड-19 के मामले 1 लाख 20 हजार तक पहुंच सकते थे। लिहाजा, आर्थिक गतिविधियों को आंशिक रूप से शुरू करने से पहले सरकार को एक चाकचौबंद योजना बनाने की दरकार है, जिससे कि वायरस के संक्रमण को भी रोका जाए और उसे सफलतापूर्वक ट्रैक किया जा सके। मुल्क की मौजूं जरूरत के लिहाज से यह भी हकीकत है कि लॉकडाउन कोरोना की रोकथाम का एक मात्र उपाय नहीं है।

हमारे मुल्क की तकरीबन आधी आबादी किसी तरह मेहनत मजदूरी करके अपना जीवन यापन करती है और लॉकडाउन के ऐलान के बाद इस तबके के पास रोजी-रोटी का कोई जरिया नहीं रह गया है। लॉकडाउन के कारण इस तबके को अपनी बुनियादी जरूरतें भी पूरा नहीं करने में तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लॉकडाउन की स्थिति में आर्थिक गतिविधियां तकरीबन ठप हैं। रोजगार और आय के मोर्चे पर सबसे अधिक नुकसान कामगारों को ही उठाना पड़ा है। लाखों प्रवासी मजदूरों को सैकड़ों मील चलकर अपने अपने घर लौटना पड़ा है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग द इंडियन इकानॉमी के ताजा सर्वेक्षण से पता चलता है कि मार्च के आखिरी सप्ताह में बड़े पैमाने पर रोजगार की हानि हुई है और श्रम शक्ति भागीदारी में भारी गिरावट देखने को मिली है। चूंकि यह नुकसान असंगठित क्षेत्र को ही अधिक उठाना पड़ा है लिहाजा उसे हर्जाना देना या सुरक्षित रखना भी मुश्किल है।

सरकार की तमाम योजनाओं का भी उन्हें लाभ नहीं मिलने वाला और फिर यह समय रबी फसलों की कटाई का भी है। यह वही समय है जब लाखों की संख्या में मजदूर पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे सूबों का रुख करते हैं। ऐसे में मुल्क भर में कम्पलीट लॉकडाउन के फैसले ने किसानों के सामने भारी संकट पैदा कर दिया है। एक अहम समय में खेत में काम करने वाले मजदूरों की कमी हो गई है। लॉकडाउन के ऐलान के बाद खेतों में काम करने वाले मजदूर या तो अपने गांव लौट चुके हैं या जहां तहां फंसे पड़े हैं। सरकार के ही आंकड़ों से पता चलता है कि तकरीबन साढ़े 26 करोड़ लोग कृषि और उससे जुड़े कामों सें लगे हुऐ है और जिसमें से आधे से अधिक खेतिहर मजदूर हैं, जो रोजाना खेतों में या मंडियों में जाकर काम करते हैं। लॉकडाउन के फैसले के बाद से इन मजदूरों की हालत बेहद नाजुक है।

साथ ही खबर यह भी है कि मांग की समस्या के कारण कृषि उत्पादों में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले कुछ महीनों में दूध की खरीद में तकरीबन 25 फीसद की गिरावट है। अंडे और दूसरे पॉल्ट्री उत्पादों की मांगों में भी गिरावट है। रेस्तरां और होटल बंद हो गए हैं। लोग केवल बुनियादी जरूरत की चीजें भी खरीद रहे हैं। यानी लॉकडाउन को इसी सूरत में आगे जारी रखना कोई समझदारी नहीं कही जाएगी। जर्मनी और उत्तर कोरिया जैसे मुल्कों ने लॉकडाउन का ऐलान नहीं किया और वहां हालत बदतर भी नहीं है। डेनमार्क और ऑस्ट्रेलिया जैसे मुल्कों ने भी लॉकडाउन को खोलना शुरू कर दिया है। भारत सरकार को भी तमाम सावधानियों के साथ लॉकडाउन में ढील दिए जाने पर विचार करना चाहिए। पर इससे पहले जांच का दायरा बढ़ाया जाना बेहद जरूरी है।
-शिवेश गर्ग (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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