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इंडिया गेट

बजट की हड़प्पन भाषा

Tuesday, February 04, 2020 10:15 AM
निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो)

टाइम्स आॅफ इंडिया में ताजा बजट को लेकर एक कार्टून छपा है कि जिसका मजमून है कि इस बार के बजट का प्रीफेस हड़प्पन लिपी में लिखा है, यह समझ से परे हैं। बजट को लेकर अगर अपन जानकारों की राय माने तो उनने इसे निराशाजनक बताया है, क्योंकि किसी भी बजट में आयकर सबसे अहम मसला होता है। आम जनता भी सबसे अधिक आयकर को लेकर सरकार के फैसलों पर नजर रखती है। आम जनता की फिक्र यह रहती है कि आखिर आयकर के स्लैब में कोई बदलाव किया गया है या नहीं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में आयकर को लेकर जो प्रस्ताव पेश किए उसे बड़े-बड़े जानकार भी चकरा गए हैं। उनने बदलाव की चर्चा तो की, लेकिन यह बदलाव जानकारों को भी ठीक से समझ नहीं आ रहा है। इस हैरानी का सबब एक शर्त है जो स्लैब के साथ जोड़ा गया है और शर्त ऐसी है कि नई आयकर व्यवस्था में अगर आप छूट चाहते हैं तो आपको पुरानी दरों से ही आयकर चुकाना होगा। यानी कुल मिलाकर आपको किसी तरह की छूट नहीं मिलने वाली। पर सरकार का दावा है कि मध्यम वर्ग को आयकर में बड़ी राहत माफ की गई है और आयकर की व्यवस्था को सरल बना दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली की एक चुनावी रैली में यह दावा भी कर दिया है। आयकर से जुड़े बजट के मजमून को उपरी तौर पर देखें तो ऐसा लगता भी है कि छूट मिल गई है। मगर जब बारीकी में जाएं तो पता लगता है कि ऐसा कुछ भी नहीं है। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में आयकर के नए टैक्स स्लैब की घोषणा करते हुए कहा कि पांच लाख रुपए तक की आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा और 5 लाख रुपए की आय पर कर की दर 20 से घटाकर 10 फीसद करने की घोषणा की गई है। फिर 7.5 से 10 लाख रुपए की कमाई पर कर की दर 20 के स्थान पर 15 फीसद होगी।

दस  से 12.5 लाख रुपए पर 30 के स्थान पर 20 और इसी तरह 12.5 से 15 लाख की कमाई पर भी आयकर की दर 30 से घटाकर 25 फीसद कर दी गई है। 15 लाख से ऊपर की कमाई पर टैक्स की दर पहले जैसे ही 30 फीसद रखी गई है। लेकिन, आयकर की इस नई स्लैब्स के साथ एक शर्त यह भी रखी गई है कि इसमें किसी किस्म की छूट का दावा नहीं कर सकते। यानी नए स्लैब का लाभ उठाने के लिए बीमा, निवेश, घर का किराया, बच्चों की स्कूल फीस आदि जैसे मदों के एवज में इन्कम टैक्स में मिलने वाली छूट को छोड़ना होगा। पहले टैक्स भरते हुए इन सभी चीजों की जानकारी देने पर टैक्स में छूट मिला करती थी। वित्त मंत्री के मुताबिक अगर कोई आयकर में छूट का प्रावधान चाहता है तो उसे पुराने टैक्स स्लैब के दर से ही अपना कर चुकाना पड़ेगा। यानी कि मान लीजिए कि आपका वेतन 9 लाख लाख रुपए सालाना है और अगर वह बिना किसी छूट के दावे के आयकर देने का फैसला करता है तो उसे ढाई से पांच लाख के बीच पांच फीसद और उससे ऊपर की आय पर 15 फीसद की दर से टैक्स चुकाना पड़ेगा, लेकिन अगर वह बीमा और हाउस लोन जैसी सुविधाओं के जरिये छूट चाहता है, तो उसे पांच लाख से ऊपर की आय पर 20 फीसद की दर से टैक्स चुकाना होगा। सवाल है कि आयकर की इस नई व्यवस्था को पहले से आसान किया गया या और जटिल। वित्त मंत्री सीतारमण का दावा तो है कि यह सरलीकृत व्यवस्था है। पर इस नई व्यवस्था ने आयकर के जानकारों को चकरा दिया है। बजट पेश करने के बाद से ही यह कन्फ्यूजन इतना फैला कि वित्तमंत्री को सफाई देनी पड़ी है।

उन्होंने कहा कि छूट लेने के बहाने कम टैक्स में देने की सोच में बदलाव जरूरी है। हम चाहते हैं कि टैक्सपेयर्स अपनी क्षमता के अनुसार टैक्स दें। साथ ही उनने यह भी कहा कि विकल्प चुनने में थोड़ी मेहनत तो करनी होगी। यानी बजट में आयकर की इस नई व्यवस्था को लेकर शनिवार को जो दावे किए गए, वे दोनों ही सही नहीं थे। पहली यह कि इस व्यवस्था से मध्यम वर्ग को लाभ हुआ है और दूसरी यह कि आयकर की नई व्यवस्था को आसान बनाया गया है। अब नई व्यवस्था में आपको पहले यह तय करना होगा कि किस नियम की तहत आपको अपना आयकर रिटर्न भरना है। यानी बगैर छूट का दावा किए रिटर्न भरना है या आपने जो बचत, बीमा और हाउस लोन ले रखा है उस पर छूट का दावा करते हुए  ज्यादा दर वाले स्लैब के तहत आयकर जमा करना है। यानी आप लाभ में रहे या नुकसान में यह तो आपके विकल्प चुनने पर निर्भर करता है, लेकिन एक बात तो तय है कि आपका आर्थिक सलाहकार रिटर्न भरने का शुल्क आपसे अधिक वसूलने वाला है। यह तो आयकर व्यवस्था का आलम है बाकी बजट समझना फिलहाल बाकी है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)
- शिवेश गर्ग

 

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