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साध्वी की ‘प्रज्ञा’ और एक शहीद का अपमान

Wednesday, April 24, 2019 09:50 AM
प्रज्ञा ठाकुर (फाइल फोटो)

भोपाल से भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने जब महाराष्ट्र पुलिस के एटीएस प्रमुख रहे हेमंत करकरे को श्राप देकर उनका सर्वनाश कर देने का दावा किया था, तो भाजपा ने उनके उस दावे से कथित तौर पर दूरी बना ली थी। भाजपा ने हेमंत करकरे पर दिए प्रज्ञा ठाकुर के बयान को उनका निजी विचार बताया था। साथ ही यह ‘संभावना’ भी जताई है कि प्रज्ञा ठाकुर ने वह बात कई वर्षों तक उन्हें मिली शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की वजह से कही होंगी। वरना, भाजपा ने तो हेमंत करकरे को हमेशा से ही शहीद माना है।

और भाजपा की ओर से उन्हें नसीहत भी दी गई थी कि वे अनर्गल और विवादित बयान जारी न करें। भाजपा के इस बयान और नसीहत पर अगर अपन गौर करें तो लगता है कि उनकी जेहनी हालत ठीक नहीं है। क्योंकि वे लगातार ऐसे बयान दे रही हैं जो इस बात की गवाही देती है। हेमंत करकरे को ‘श्राप’ देकर मारने और बाबरी मस्जिद विध्वंस में भूमिका निभाने का दावा करने के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने अब गोमूत्र को लेकर बड़ा दावा किया है। उनने कहा है कि गोमूत्र और अन्य गाय उत्पादों के मिश्रण से उनका ब्रेस्ट कैंसर ठीक हुआ है।

खबर के मुताबिक उनने फरमाया है, ‘गोधन अमृत है मैं कैंसर की मरीज थी। मैंने गोमूत्र और पंचगव्य जड़ी-बूटियों के मिश्रण का सेवन कर खुद को ठीक किया।’ भाजपा प्रत्याशी यहीं नहीं रुकीं। साध्वी ने कहा, ‘अगर आप गोमाता को पीछे से गर्दन तक रगड़ें तो उसे अच्छा लगेगा। ऐसा रोज करने पर आपका ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहेगा... यह अमृत है। यह वैज्ञानिक है। तपस्या के लिए गोशाला सबसे अच्छी जगह है।’ वैसे भाजपा वालों की समझ के लिहाज से साध्वी का यह बयान विवादित नहीं हैं, क्योंकि भाजपा के समर्थक गोमूत्र को लेकर अक्सर इसी तरह के विचार देते पाये जाते हैं। लिहाजा, पार्टी को उनके इस बयान से दूरी बनाने की जरूरत नहीं पड़ी।

जो लोग यह मान रहे हों कि साध्वी प्रज्ञा ऐसा बयान जेहनी तौर पर बीमार होने या बेखुदी में दे रही हैं, तो अपन मानते हैं कि वे गलत हैं। पहले तो प्रज्ञा ठाकुर को कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ उम्मीदवार बनाया जाना और बाद में प्रज्ञा ठाकुर ये तमाम बयान एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा हैं। और जिसका मकसद भी साफ है कि बहुसंख्यक हिंदू समुदाय को गोलबंद किया जाए।

जिस कवायद में पहले से तैयार एक पटकथा के तहत पहले दिग्विजय सिंह के खिलाफ उम्मीदवार बनाया जाता है और बाद में साध्वी की सिसकती कहानियां और तस्वीरें तमाम खबरिया चैनलों को इस अंदाज से सुनायी जाती हैं कि एक प्रखर हिंदू साध्वी के साथ कांग्रेस की सरकार ने किस कदर अत्याचार किए हैं। चूंकि साध्वी खुद को दैवीय अवतार मानती हैं लिहाजा, वे भाजपा और संघ के दुनियावी पटकथा से इतर भी कुछ ऐसा बोल गईं, जो भाजपा को भारी पड़ गया। बकौल साध्वी, ‘मैंने करकरे से कहा था तेरा सर्वनाश हो जाएगा।

उस श्राप के सवा महीने बाद ही वह आतंकवादियों के हाथों मारा गया था।’ प्रज्ञा ठाकुर ने उन्हें ‘देशद्रोही और धर्मद्रोही’ भी बताया था। प्रज्ञा ठाकुर का यह भी कहना था, ‘मालेगांव बम धमाके की जांच करने वाली समिति ने करकरे से कहा था कि अगर प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं तो उन्हें छोड़ देना चाहिए। लेकिन करकरे ने कहा था कि वह किसी भी तरह कुछ भी करके मेरे खिलाफ सबूत जुटाएंगे।’ यहां साध्वी सरासर झूठ बोल रही हैं। क्योंकि मालेगांव धमाके में करकरे को साध्वी के खिलाफ सबूत खोजने की जरूरत नहीं थी।

मामले में पहली नजर में जो सबूत बरामद हुए थे, वह साध्वी के खिलाफ थे। महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी एसएस विर्क ने मंगलवार को एक अंग्रेजी अखबार में लिखे अपने लेख में बगैर किसी लाग लपेट के बताया है कि मालेगांव में जिस मोटर साईकिल को धमाके के लिए इस्तेमाल किया गया था, वह किसी और के नाम नहीं अलबत्ता साध्वी प्रज्ञा के नाम से ही पंजीकृत थी और इसी आधार पर उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी।

यानी साध्वी को गिरफ्तार किए रखने के लिए हेमंत करकरे को किसी और सबूत की दरकार नहीं थी। पूर्व डीजीपी विर्क अपने लेख में करकरे के काम के प्रति उनकी इमानदारी और निष्ठा की सराहना करते हुए साफ तौर पर इशारा करते हैं कि बाद में किस तरह सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई और अदालत की नजर में मामले को कमजोर किया गया। और जहां तक करकरे के ‘देशद्रोही और धर्मद्रोही’ होने का सवाल है कि तो दुनिया जानती है कि हेमंत करकरे एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी थे जो 26/11 के मुंबई आतंकी हमले के दौरान आतंकवादियों के साथ लड़ते हुए शहीद हो गए थे।

कहने की दरकार नहीं कि हेमंत करकरे के शहीद होने से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के अलावा और किसकी आत्मा तृप्त हुई होगी। बेशक, उन नामों में हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसों के नाम गिनाए जा सकते हैं। फिर भी साध्वी और उनकी पार्टी को अगर खुद के देशभक्त होने का गुमान है तो यह उनका अख्तियार है। पर यह अख्तियार उन्हें हेमंत करकरे जैसे शहीदों के अपमान की इजाजत तो कतई नहीं देता।

- शिवेश गर्ग

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