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इंडिया गेट

दिशा रवि की गिरफ्तारी का सबब

Thursday, February 18, 2021 11:05 AM
दिशा रवि (फाइल फोटो)

तो अब पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि की गिरफ्तारी जेरेबहस है। बेंगलुरु की रहने वाली 22 साल की दिशा रवि पर भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत राजद्रोह, समाज में समुदायों के बीच नफरत फैलाने और आपराधिक षड्यंत्र के मामले दर्ज किए गए हैं। दिल्ली पुलिस का कहना है कि दिशा रवि ने वॉट्सऐप ग्रुप बनाया था और उसके जरिए टूलकिट डॉक्यूमेंट एडिट करके वायरल किया। वह टूल किट डॉक्यूमेंट का मसौदा तैयार करने वाले षड्यंत्रकारियों के साथ काम कर रही थीं। दिशा रवि पर आरोप है कि इसके जरिए इन लोगों ने देश के खिलाफ बड़ी साजिश तैयार की थी। दिशा रवि पर आरोप है कि उनने किसान आंदोलन के समर्थन में बनाई गई टूलकिट को एडिट किया है और उसे सोशल मीडिया पर शेयर किया है। यह वही टूलकिट है, जिसे स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने शेयर किया था। पुलिस ने आरोप लगाया है कि टूलकिट मामला खालिस्तानी समूह को दोबारा खड़ा करने और भारत सरकार के खिलाफ एक बड़ी साजिश है।

पुलिस ने 26 जनवरी की हिंसा में भी टूलकिट की साजिश के संकेत दिए हैं। पर मामले में कुछ नए और रोचक तथ्य भी सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि तकरीबन सात महीने पहले यानी जुलाई 2020 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया था कि वो फ्राइडे फॉर फ्यूचर वेबसाइट को ब्लॉक करे और इसके संचालकों पर आतंकवाद निरोधी कानून के तहत कार्रवाई करे। दिशा रवि ‘फ्राइडे फॉर फ्यूचर’ कैम्पेन की सह संस्थापक हैं और अंतरराष्ट्रीय क्लाइमेट चेंज एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग की ही तरह दिशा रवि भी क्लाइमेट एक्टिविस्ट है। दिशा रवि फ्राइडे फॉर फ्यूचर कैम्पेन से 2018 से जुड़ी हैं। इस कैम्पेन के जरिए दुनिया भर में पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर मुहिम चलाई जा रही है। फ्राइडे फॉर फ्यूचर वही कैम्पेन है, जिसके जरिए ग्रेटा थनबर्ग ने दुनिया भर में सुर्खियां बटोरी हैं। यानी इन तथ्यों से साफ है कि दिशा रवि पिछले 7 महीनों से मोदी सरकार के रडार पर थीं। किसान आंदोलन के बरक्स खालिस्तानी समूह को मदद करने का एंगल नया जोड़ा गया है और किसान आंदोलन को मदद करने वाले टूल किट के बहाने दिशा रवि को शिकार बनाया गया है।

टूल किट किसी भी मुद्दे को समझाने के लिए तैयार किया गया एक दस्तावेज होता है। यह इस बात की भी जानकारी देता है कि किसी को समस्या के समाधान के लिए क्या करना चाहिए। इसमें दरख्वास्त के बारे में जानकारी, विरोध और जन आंदोलनों को लेकर जानकारी शामिल हो सकती है। दरअसल इस टूल किट में बताया गया था किसान आंदोलन में सोशल मीडिया पर समर्थन कैसे जुटाए जाएं। हैशटैग का इस्तेमाल किस तरह से किया जाए और प्रदर्शन के दौरान क्या किया जाए और क्या नहीं, सब जानकारी इसमें मौजूद थी। पहली बार अमेरिका में ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन के दौरान इसका नाम सामने आया था। जनवरी महीने में किसान आंदोलन के समर्थन में स्वीडन की पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने एक डॉक्यूमेंट शेयर करते हुए ट्वीट किया। ट्वीट में आंदोलन कैसे करना है, इसकी जानकारी वाले टूलकिट को साझा किया गया। टूल किट में किसान आंदोलन को बढ़ाने के लिए हर जरूरी कदम के बारे में बताया गया है। ट्वीट में कौन सा हैशटैग लगाना है, क्या करना है, कैसे बचना है, इसकी जानकारी दी गई।

जाहिर है दिशा रवि मुल्क में पहली युवा नहीं है जिन्हें मोदी सरकार का विरोध करने के बाद दमनकारी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। यह सिलसिला जेएनयू विश्वविद्यालय के छात्र नेता कन्हैया कुमार से शुरू होकर फिलहाल दिशा रवि तक पहुंचा है। आगे यह सिलसिला कहां जाकर थमेगा, यह समय ही बतला सकता है। बहरहाल, जहां तक दिशा रवि की गिरफ्तारी का सवाल है तो  तो उस पर कानून के दायरे में तमाम आपत्तियां उठी हैं। मसलन, बेंगलुरू की कोर्ट के ट्रांजिट रिमांड के बिना उन्हें दिल्ली के कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट में वकील की मौजूदगी सुनिश्चित किए बिना उन्हें पांच दिन की पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया गया। सवाल है कि आखिर रिमांड को लेकर अपने कर्तव्यों का पुलिस ने गंभीरता से पालन क्यों नहीं किया। क्या पुलिस को यह दिशा की गिरफ्तारी के बाद यह सुनिश्चित नहीं करना चाहिए था कि संविधान के अनुच्छेद-22 के शासनादेश का बारीकी से पालन किया जाए।

कायदा तो यही कहता है कि अगर सुनवाई के दौरान आरोपी का प्रतिनिधित्व करने वाला वकील मौजूद नहीं था, तो मजिस्ट्रेट को आरोपी के वकील के आने या वैकल्पिक रूप से इंतजार करना चाहिए था, उन्हें कानूनी मदद दी जानी चाहिए थी। कहने की दरकार नहीं कि दिशा रवि की गिरफ्तारी में जरूरी न्यायिक कर्त्तव्यों की गंभीर अनदेखी हुई है, जो दुनिया भर में मुल्क की आलोचना का सबब बन रहा है। दिशा रवि की गिरफ्तारी पर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों के साथ-साथ कांग्रेस नेताओं प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, जयराम रमेश, पी. चिदम्बरम आदि ने भी आलोचना की है। सोशल मीडिया पर उनकी रिहाई के लिए आवाज उठ रही है, साथ ही दिल्ली पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
-शिवेश गर्ग (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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