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भारत

PM की कथनी एवं करनी में फर्क, मोदी सरकार से उठ गया किसान का भरोसाः राहुल गांधी

Friday, September 18, 2020 18:20 PM
राहुल गांधी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथनी एवं करनी में फर्क होने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके नेतृत्व वाली सरकार किसान विरोधी है और देश के किसानों का उससे विश्वास उठ चुका है। राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि किसान का मोदी सरकार से विश्वास उठ चुका है क्योंकि शुरू से मोदी जी की कथनी और करनी में फर्क रहा है। नोटबंदी, गलत जीएसटी और डीजल पर भारी टैक्स। जागृत किसान जानता है-कृषि विधेयक से मोदी सरकार बढ़ाएगी अपने 'मित्रों' का व्यापार और करेगी किसान की रोजी-रोटी पर वार।

बाद में लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीपसिंह सुरजेवाला तथा राजीव सातव ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश का 60 फीसदी किसान 2 एकड़ से कम भूमि का मालिक है और 86 फीसदी किसान 5 एकड़ से कम जमीन है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों की आजादी की बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते है वह यह भी बताए कि 2 एकड़ जमीन वाला किसान अपने गांव से बाहर जाकर कैसे अपनी फसल बेच सकता है। उन्होंने कहा कि देश के किसानों को नुकसान पहुंचाने के लिए सरकार ने मंडी व्यवस्था को खत्म कर दिया है। मंडियों में काम करने वाले मजदूरों की नौकरियों पर संकट आ जाएगा। किसान को उसकी फसल पर उसकी मेहनत का फल मिले इसके लिए उसे न्यूनतम समर्थन मूल्य-एमएसपी देने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन मोदी सरकार ने इस व्यवस्था को ही समाप्त कर दिया है।

प्रवक्ता ने भाजपा को 'कौरव' की संज्ञा देते हुए कहा कि इन कौरवों के खिलाफ खेत मजदूर तथा किसान 'पांडवों' के रूप में खड़ा है। उन्होंने भाजपा को समर्थन दे रहे राजनीतिक दलों का नाम लेकर कहा कि अब उन्हें इस लड़ाई में देश को यह बताना है कि वे 'कौरवों' के साथ खड़े हैं या 'पांडवों' के साथ खड़े हैं। लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि गुरुवार को जब यह विधेयक लोकसभा में पारित हो रहा था तो उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में मौजूद रहना चाहिए था और देश की जनता को बताना चाहिए था कि संसद में पेश 'कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020' चर्चा हो रही थी तो उन्हें सदन में मौजूद रहना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि मोदी के पास सवालों के उत्तर नहीं थे। उनकी हिम्मत सदन में इस मुद्दे से जुड़े सवालों का जवाब देने की नहीं थी इसलिए प्रधानमंत्री सदन में नहीं आए। उन्होंने कहा कि मोदी को भाषण देना खूब आता है लेकिन उनके खोखले भाषण सदन में नहीं चल सकते इसलिए उनको सदन में आने की हिम्मत नहीं हुई। प्रधानमंत्री यदि सदन में आकर बताते कि यह विधेयक किस तरह से किसानों के लिए उपयोगी है और इससे किस तरह से किसान आजाद हो रहे हैं तो यह ज्यादा बेहतर होता। सातव ने कहा कि भाजपा सरकार झूठ बोलती है, बरगलाती है और गलत बयानी करती है। यह सरकार सब कुछ बेचने पर लगी है और सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण कर रही है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पूरी तरह से किसान विरोधी है और किसानों को इससे बहुत संकट का सामना करना पड़ेगा। उनका कहना था कि सरकार यह कानून बनाकर किसान को पूंजीपतियों के हवाले करना चाहती है।

एक सवाल के जवाब में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस मुद्दे पर वह विपक्ष के सभी दलों के संपर्क में है ताकि राज्यसभा में इस विधेयक को पारित नहीं किया जा सके। केंद्रीय मंत्री रही हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे उन्होंने कहा कि उन्होंने यह कदम तब उठाया है जब उन्हें लगा कि वह पंजाब में कदम नहीं रख सकती हैं। उन्होंने कहा कि जब मंत्रिमंडल में इस विधेयक को लाने को मंजूरी दी गई, तब उन्होंने इसके विरोध में इस्तीफा क्यों नहीं दिया।

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