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भारत

हाथरस केस: पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने तक अस्थि विसर्जन से किया इनकार

Tuesday, October 13, 2020 16:35 PM
पीड़ित परिवार ने कोर्ट में दर्ज कराए बयान।

हाथरस। उत्तर प्रदेश में हाथरस के पीड़ित परिवार ने मंगलवार को कहा है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा वे अपनी बेटी की अस्थियों का विसर्जन नहीं करेंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के समक्ष सोमवार को अपना बयान दर्ज कराने के बाद पीड़ित परिवार देर रात से वापस हाथरस अपने गांव पहुंच गया। पीड़ित परिवार ने कहा है कि जब तक उनकी बेटी को न्याय नहीं मिल जाता तब तक वे अस्थि विसर्जन नही करेंगे। पीड़िता के पिता ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हमने कोर्ट के आदेश पर अपना बयान दर्ज कराया है। हालांकि, अंग्रेजी में बातचीत चल रही थी और हम ज्यादा समझ नहीं सकते थे, लेकिन हम यह बता सकते थे कि कोर्ट हाथरस जिला प्रशासन से खुश नहीं था। हम अब न्याय चाहते हैं, जब तक हमें न्याय नहीं मिलेगा बेटी की अस्थि को  विसर्जित नहीं करेंगे।

पीड़िता के भाई ने कहा कि कोर्ट में हमारी बहिन के दाह संस्कार से संबंधित प्रश्न पूछे थे। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या हमारी इच्छा के अनुसार दाह संस्कार किया गया था। यह सुनवाई लगभग एक घंटे तक चली और अधिकांश बातचीत अंग्रेजी में हुई, लेकिन कोर्ट निश्चित रूप से जिलाधिकारी से खुश नहीं थी। उप जिलाधिकारी अंजलि गंगवार ने कहा कि सभी वाहनों में परिवार के सदस्यों के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाओं, बिस्कुट, चिप्स, पानी की बोतलें और अन्य आवश्यक चीजों का ध्यान रखा गया था। लखनऊ के उत्तराखंड भवन में दोपहर का भोजन बनाया गया था। पीड़ित परिवार के सदस्यों के लिए पर्याप्त सुरक्षा और आराम की व्यवस्था की गई थी।

हाथरस के जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लश्कर भी इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के समक्ष पेश हुए। उन्होंने कहा कि जिले में हिंसा से बचने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कथित पीड़िता का आधी रात को अंतिम संस्कार किया गया। उन्होंने कहा कि परिवार को भड़काने में पीएफआई तथा पत्रकारों के शामिल होने के पुख्ता सबूत थे। गांव के बाहर असामाजिक तत्वों का भारी जमावड़ा था, जो हिंसा पर आमादा थे। साथ ही, शव की स्थिति बिगड़ रही थी। इस परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से सलाह लेने के बाद मैंने, हाथरस के जिला मजिस्ट्रेट के बतौर रात में पीड़िता का अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया।    

जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासनिक पर्यवेक्षण के तहत अंतिम संस्कार के समय पीड़ित परिवार को विश्वास में लिया गया था। हिंसा भड़काने के षड्यंत्र की पुष्टि करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि यह भी सामने आया कि एक वेबसाइट 'जस्टिस फॉर हाथरस' अपनी भड़काऊ सामग्री के माध्यम से हाथरस और आसपास के इलाकों में कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलने के बाद भी परिवार को भड़काने में पीएफआई और कुछ कथित पत्रकारों की भागीदारी की भूमिका के पुख्ता सबूत हैं। पीड़ित परिवार की सभी मांगें सरकार ने पूरी की है। राज्य का माहौल बिगाड़ने के लिए पीएफआई के माध्यम से भीम आर्मी को फंडिंग के खुफिया इनपुट भी हैं। कुछ नक्सली संगठनों के बारे में भी जानकारी मिली है जो राज्य में सांप्रदायिक दंगों की साजिश रच रहे थे।

बता दें कि पीड़ित परिवार सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के सामने पेश हुआ। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 2 नवंबर तय की। न्यायाधीश पंकज मिथल और न्यायाधीश राजन रॉय की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट में पीड़ित परिवार ने उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के अलावा मामले को उत्तर प्रदेश के बाहर दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने की मांग की है। पीड़िता के माता-पिता और भाईयों ने अपने बयान दर्ज कराए। इसके अलावा अपर मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था), हाथरस के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने कोर्ट में अपने बयान दर्ज कराए।

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