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भारत

कोरोना संकट में लॉकडाउन के चलते डिप्रेशन के मामलों में तेजी, मनोरोग बढ़ने का खतरा

Thursday, May 14, 2020 16:15 PM
टेड्रोस गेब्रियेसस (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। कोरोना वायरस और इसकी वजह से जारी लॉकडाउन के कारण दुनिया भर में अवसाद (डिप्रेशन) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और यदि समय पर कदम नहीं उठाया गया तो मनोरोगों में बड़ी तेजी देखी जा सकती है। कोविड-19 और मानसिक स्वास्थ्य पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक पॉलिसी ब्रीफ में कहा गया है कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में तत्काल निवेश बढ़ाने की जरूरत है अन्यथा आने वाले महीनों में मानसिक बीमारियों के तेजी बढ़ने के लिए हमें तैयार रहना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस गेब्रियेसस ने कहा कि इस महामारी का पहले ही लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर चिंताजनक प्रभाव पड़ा है। सामाजिक अलगाव, संक्रमण का खतरा और परिवार के सदस्यों को खोने के साथ आमदनी और रोजगार के नुकसान से उनका तनाव और बढ़ गया है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार कई देशों से आ रही रिपोर्टें अवसाद और तनाव बढ़ने की ओर संकेत कर रहे हैं। इथोपिया में किए गए एक अध्ययन में पता चला है कि कोविड-19 से पहले की तुलना में अप्रैल 2020 में वहां लोगों में अवसाद के लक्षण तीन गुणा बढ़ गए हैं। काम के अत्यधिक दबाव, जिंदगी और मौत के फैसले और संक्रमण के जोखिम के कारण स्वास्थ्यकर्मियों में मानसिक तनाव काफी ज्यादा है। महामारी के दौरान चीन में 50 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मियों ने अवसाद, 45 प्रतिशत ने चिंता और 34 प्रतिशत ने अनिद्रा की शिकायत की। कनाडा में 47 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मियों ने कहा कि उन्हें मनोवैज्ञानिक मदद की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र की पॉलिसी ब्रीफ में कहा गया है कि बच्चों और किशोरों में भी मानसिक बीमारियों का खतरा है। इटली और स्पेन में अभिभावकों की शिकायत है कि बच्चों की एकाग्रता कम हुई है और वे चिड़चिड़े, अशांत तथा बेचैन हो रहे हैं।

इसके अलावा महिलाओं में भी मनोरोग का जोखिम अधिक है। विशेषकर घर पर बच्चों को पढ़ाने, घर से काम करने और घर का काम करने के बीच संतुलन बैठाने का प्रयास करती महिलाओं में। बुजुर्ग और पहले से किसी मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों में भी अवसाद बढ़ सकता है। लॉकडाउन के बीच शराब का सेवन बढ़ने से भी मनोरोग विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। कनाडा की एक रिपोर्ट के अनुसार वहां 15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग में शराब का सेवन 20 फीसदी बढ़ गया है। टेड्रोस गेब्रियेसस ने कहा कि अब यह बिल्कुल स्पष्ट हो चुका है कि कोविड-19 महामारी से उबरने के लिए मानसिक स्वास्थ्य की जरूरतों को मुख्य कारकों में से एक मानना होगा। लोगों के भावनात्मक स्वास्थ्य की  उपेक्षा की सामाजिक और आर्थिक कीमत लंबे समय तक चुकानी पड़ सकती है।

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