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स्वास्थ्य

वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे: कोरोना वायरस महामारी के दौरान जानलेवा हो रहा है हाइपरटेंशन

Sunday, May 17, 2020 12:20 PM
कॉन्सेप्ट फोटो।

जयपुर। रक्तचाप से जुड़ी बीमारी हाइपरटेंशन आज दुनियाभर में अपनी जड़ें जमा चुकी है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में 1.13 बिलियन लोग हाइपरटेंशन की समस्या से जूझ रहे हैं। हर 4 में से एक पुरुष और 5 पांच में से एक महिला को हाइपरटेंशन है। अगर भारत की बात की जाए तो देश में 30 प्रतिशत लोगों को यह समस्या है। कोरोना के बीच कई ऐसी रिसर्च भी आई हैं, जिसमें यह सामने आया है कि हाइपरटेंशन के मरीजों को कोरोना का संक्रमण होता है तो यह उनके लिए अन्य मरीजों की अपेक्षा अधिक जानलेवा है। वर्तमान समय की बात करें तो देशभर के साथ ही राजस्थान और राजधानी जयपुर में भी कोरोना से होने वाली अधिकांश मौतों में ज्यादातर लोगों को हाइपरटेंशन की समस्या पहले से ही थी। ऐसे में कोरोना वायरस उनके लिए जानलेवा साबित हुआ।

एंबुलेटरी बीपी मॉनिटरिंग जांच जरूरी
फोर्टिस हॉस्पिटल के सीनियर कार्डियक इलेक्ट्रोफीजियोलॉजिस्ट डॉ. राहुल सिंघल ने बताया कि हाइपरटेंशन की पहचान करने के लिए सिर्फ  बीपी की जांच करा लेना पर्याप्त नहीं है। कई बार जांच कराते समय तनाव के कारण भी रक्तचाप ज्यादा हो सकता है या कुछ लोगों को दिन में किसी समय रक्तचाप कम भी हो सकता है जबकि ज्यादातर उनका रक्तचाप ज्यादा ही रहता है। इसे मास्क्ड हाइपरटेंशन कहा जाता है। हाइपरटेंशन का पता करने के लिए एंबुलेटरी बीपी मॉनिटरिंग जांच करवानी चाहिए। रक्तचाप का सही स्तर जानने के लिए एक से ज्यादा बार जांच होनी चाहिए। एबीपीएम नामक मशीन से सही रक्तचाप जांचा जा सकता है। यह मशीन मरीज के कपड़ों के अंदर लगाई जाती है और 24 घंटे मरीज का रक्तचाप रिकॉर्ड करती है। कई बार सामान्य जांच के लिए भी डॉक्टर के पास जाने पर मरीज का बीपी बढ़ जाता है जिसे व्हाइट कोट हाइपरटेंशन कहते हैं।

हाइपरटेंशन सीधे तौर पर हार्ट को पहुंचाता है नुकसान
एचसीजी हास्पिटल के सीनियर फिजिशियन और क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डॉ. पंकज आनंद ने बताया कि हाइपरटेंशन के कारण शरीर में कई गंभीर व जानलेवा बीमारियां हो सकती है। हाइपरटेंशन होने से हार्ट पर ज्यादा जोर पड़ता है व हार्ट फेलियर की संभावनाएं बढ़ जाती हैं और कोरोनरी आर्टरीज में कोलेस्ट्रोल जमने से हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है। वहीं दिमाग में हाइपरटेंशन से लकवा भी मार सकता है। जब आर्टरीज में ब्लड क्लॉट के कारण खून की सप्लाई नहीं हो पाती, ऐसा तभी होता है। इससे हाइपरटेंशन से रक्त धमनियों में सूजन और कमजोरी आ जाती है। धमनियों के फटने से मौत भी हो सकती है। वहीं हाइपरटेंशन से किडनी की बीमारी भी हो सकती है।

मरीज ऐसे करें कोरोना से बचाव
अपनी दवाएं समय पर लेना जारी रखें, डॉक्टर के निर्देशानुसार आहार लें। सर्दी और फ्लू या अन्य सांस संबंधी मर्ज वाले लोगों के संपर्क में न आएं। खांसते और छींकते समय मुंह पर रूमाल या टिशू रखें। हाथों को साबुन से अच्छी तरह बार-बार धोएं।

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