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स्वास्थ्य

मांझे ने गहराई तक काटा टखना, डॉक्टरों ने सर्जरी कर बचाया

Friday, January 17, 2020 11:55 AM
मांझा फंसने से बुरी तरह से टखना कट गया।

जयपुर। पतंगबाजी के जुनून में मांझा हर किसी के लिए आफत बना हुआ है। ऐसे ही आशिदा के पैर में मांझा फंसने से उनका टखना बुरी तरह से कट गया, खून इतना बह गया कि बीपी तक रिकॉर्ड नहीं हो पा रहा था। शहर के नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में मरीज लाई गई, जहां डॉक्टर्स ने रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी कर मरीज के पैर को बचा लिया।

बाएं पैर को गहराई तक काट गया मांझा
नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक, हैण्ड एवं माइक्रोवासकुलर सर्जन डॉ. गिरीश गुप्ता ने बताया कि दौसा निवासी आशिदा किसी काम से बाहर गई थी और अचानक मांझा उनके बाएं टखने पर फंस गया। मांझे के फंसने और उसे जोर से खींचने पर मरीज का टखना गहराई तक कट गया, जिससे टखने में रक्त प्रवाह बनाए रखने वाली नसें कट गई। मरीज का हॉस्पिटल पहुंचने तक काफी खून बह गया था, बीपी भी रिकॉर्ड नहीं हो पा रहा था और मरीज अवचेतना की स्थिति में चली गई थी। नारायणा हॉस्पिटल के इमरजेंसी में ही मरीज को तुरन्त खून चढ़ाया गया।

दो घंटे की सर्जरी कर बचाया पैर
मरीज को खून चढ़ाकर शरीर में रक्त की हुई कमी को पूरा किया गया और टखने की सर्जरी की गई। डॉ. गिरीश गुप्ता, कार्डियक सर्जन डॉ. सुनील शर्मा ने ऐनस्थिसिया व क्रिटिकल केयर टीम के सहयोग से दो घंटे तक सर्जरी कर टखने की कटी सभी नसों को सही तरीके से जोड़कर, संरचना को ठीक किया। अगर मरीज की समय पर सर्जरी नहीं होती तो टखने में रक्त प्रवाह न होने से मरीज का पैर खराब हो सकता था। सर्जरी के बाद मरीज का टखना तेजी से रिकवर हो रहा है एवं मरीज अब ठीक है। नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के फेसिलिटी डायरेक्टर कार्तिक रामाकृष्णन् ने बताया कि हार्ट अटैक व ब्रेन स्ट्रोक की तरह ही इस प्रकार की इमरजेंसी में समय का बहुत महत्व है। अगर मरीज को समय रहते एक ऐसे हॉस्पिटल में लाया जाएं, जहां सीटीवीएस सर्जन व माईक्रोवैस्कुलर सर्जन की बहुचिकित्सकीय टीम उपलब्ध हो तो पूर्णतः या आंशिक कटे हुए हाथ या पैर को जोड़कर (रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी द्वारा) मरीज को फिर से कार्य कुशल बनाया जा सकता है। माईक्रोवैस्कुलर सर्जरी में आई एडवांस्ड तकनीकों के कारण यह संभव हुआ है।
 

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