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स्वास्थ्य

प्राकृतिक चिकित्सा में है सेहत संबंधी रोगों का निदान

Monday, November 15, 2021 15:25 PM
कॉन्सेप्ट फोटो

 जयपुर। प्राकृतिक चिकित्सा(नेचुरोपैथी) शरीर संबंधी रोगों के उपचार में उपयोगी होती है। जयपुर के बापू नगर स्थित प्राकृतिक चिकित्सालय में पंच तत्वों(जल, अग्नि, वायु, आकाश और पृथ्वी) को आधार मानकर उपचार किया जाता है। इससे विशेष रूप में से जोड़ों का दर्द, आर्थराइटिस, स्पॉन्डिलाइटिस, साइटिका, कब्ज, पेप्टिक अल्सर, फैटी लीवर, कोलाइटिस, माइग्रेन, मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, दमा, ब्रॉनकाइटिस के साथ असाध्य रोग जैसे प्रोस्टेट, हर्निया, पेरेलेसिस, सोरायसिस, मेंटल प्रॉब्लम, रूमेटाइट और इनफर्टिलिटी का उपचार कर लोगों को फायदा पहुंचा रहा है।
 गर्मी के मौसम में यहां 200 और सर्दियों में 100 लोग डेली रूटीन में आकर प्राकृतिक चिकित्सा की सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। इसमें उपचार के तौर पर मिट्टी की पट्टी, गीली चद्दर लपेटना, मड बाथ, स्टीम बाथ, सूर्य स्नान, कटि स्नान, एनीमा स्पाइन स्पे्र बाथ, मॉर्निंग वॉक, जॉगिंग के साथ पंचकर्मा, योग आदि से तंदुरूस्त बनाया जाता है।

योगा-प्राणायाम का अभ्यास कराने के बाद प्राकृतिक आहार व चिकित्सा पद्धतियों से असाध्य रोगों को ठीक करने का काम यहां चल रहा है। गुजरात, केरल, तमिलनाडू, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, पंजाब से साधक आ रहे हैं। इनके शरीर को डीटोक्सीफाई करके ओबेसिटी की समस्या से निजात दिलाई है। प्राकृतिक चिकित्सा शरीर की कमजोर आंतों को मजबूत बनाती है। आहार की इस पद्धति में औषधि मौजूद है। मरीज को लौकी, पेठा, खीरा, मूली पत्तागोभी, पपीता, शीशम की पत्ती, पीपल के पत्तों का रस इत्यादि के साथ मूंग, मौठ स्प्राऊटस आदि देकर मरीज के शरीर को विटामिन बी-12 की पूर्ति कराते हैं। -डॉ. दिलीप सारण, चिकित्सक, प्राकृतिक चिकित्सालय

1950 से अस्पताल प्राकृतिक चिकित्सा के जरिए लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। दैनिक नवज्योति संस्थापक स्व.कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी के बड़े भ्राता डॉ. जुगल किशोर चौधरी ने प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में पूरे विश्व में अपना परचम लहराया है। 36 पुस्तके उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा पर लिखी। दोनों महात्मा गांधी के अनुयायी थे और उन्हीं की प्रेरणा से ये महान कार्य डॉ. जुगल किशोर चौधरी ने किया। ऐसे गुणीजनों के मार्गदर्शन से ही प्राकृतिक चिकित्सालय में विभिन्न रोगों के मरीजों का उपचार किया जा रहा है। चिकित्सक के परामर्श से लोग इन्हें घर में भी कर सकते हैं, क्योंकि अधिकांश प्रयोग इसमें सूर्य, मिट्टी, जल, वायु और आकाश आदि से किया जाता है जो हर जगह उपलब्ध है। - कुलभूषण बैराठी, सैके्रटरी, प्राकृतिक चिकित्सालय

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