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स्वास्थ्य

Video: गुर्दे का कैंसर पहुंचा हार्ट तक, 8 घंटे की सफल सर्जरी के बाद स्थापित किया कीर्तिमान

Monday, January 06, 2020 16:00 PM
वरिष्ठ यूरोसर्जन डाॅ राकेश शर्मा

जयपुर। शहर के चिकित्सकों ने गुर्दे के कैंसर का 24 सेमी बडा ट्यूमर निकालने में सफलता प्राप्त की है। खास बात यह रही कि यह ट्यूमर किडनी की खून की नली के रास्ते होता हुआ ह्रदय के निचले चैम्बर तक अपनी जडें जमा चुका था, विश्व में  इस तरह का यह तीसरा सफल ऑपरेशन बताया जा रहा है।


मामला मालवीय नगर स्थित एपेक्स हाॅस्पिटल का है, जहां वरिष्ठ यूरोसर्जन डाॅ राकेश शर्मा के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने यह कारनामा कर दिखाया।

अमूमन इस तरह के मामलो में मरीज की मौत होती आई है। सोमवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान चिकित्सकों की टीम ने इस ऑपरेशन की सक्सेस जर्नी को शेयर किया। चिकित्सकों की टीम में कार्डियक सर्जन डाॅ. विमलकांत यादव, गैस्ट्रो सर्जन डाॅ विनय मेहला, यूरोलाॅजिस्ट डाॅ. सौरभ जैन, क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डाॅ शैलेष झंवर, डाॅ आषीष शामिल थे।


विश्व में तीसरी सफल सर्जरी

इस तरह की सफल सर्जरी विश्व में अब तक सिर्फ दो ही हुई हैं, ये तीसरी है। इसमें ऑपरेशन के उपरांत निकाले गए गुर्दे की बायोप्सी में क्लियर सेल कार्सिनोमा पाया गया। क्लियर सेल कार्सिनोमा प्रकार के कैंसर जो कि 20 सेमी से अधिक हो व जिनमें कैंसर हार्ट तक पहुंच चुका हो, अब तक विश्व में सिर्फ दो ही सफल रूप से ऑपरेट हो सके हैं। ये डाटा इंटरनेट पर उपस्थित वर्ल्ड जरनल में उपलब्ध है।


पेशाब में आते थे खून के थक्के, 8 घंटे चला ऑपरेशन

गंगानगर निवासी 60 वर्षीय मरीज अमरजीत सिंह पेशाब में अचानक खून आने और खून के थक्के आने की समस्या से ग्रस्त थे। बीकानेर  के विभिन्न अस्पतालो एवं दिल्ली के अस्पतालों तक दिखाने के बाद भी मरीज की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई थी। इसके बाद यूरोलाॅजिस्ट डाॅ राकेश शर्मा ने इनका इलाज शुरू किया। प्रारंभिक दौर में इनके सीटी स्केन में गुर्दे का कैंसर होना पाया गया, इसके बाद एमआरआई, 2डी ईको में ये पाया गया कि कैंसर हृद्य के निचले दांये चैम्बर ( दायां वेंट्रीकल) में अपनी जगह बना चुका था। इसके बाद सीटी वीएस सर्जन और कार्डियक एनस्थेटिक्स से चर्चा करने के बाद मरीज को ऑपरेशन के लिए प्लान किया गया। यही इसका अंतिम विकल्प था, अन्यथा मरीज की किसी भी समय मौत हो सकती थी। क्योंकि हार्ट में उपस्थित थ्रोम्बस फेफडे में जा सकता था, जो किसी भी समय मरीज के लिए प्राणघात साबित हो सकता था। करीब 8 घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन के बाद मरीज की जान बच सकी।


चिकित्सकों से संपर्क करना चाहिए
सर्जरी करने वाली टीम के लीडर डाॅ राकेश शर्मा ने बताया कि यदि सर्जरी समय रहते नहीं की जाती तो मरीज की जान कभी भी जा सकती थी। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को पेशाब में खून या थक्के, वजन की कमी, कमजोरी, भूख की कमी जैसी समस्याएं एक साथ नजर आएं तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए और तुरंत चिकित्सकों से संपर्क करना चाहिए।

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