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स्वास्थ्य

विषम परिस्थितियों में नई तकनीक व प्रोटोकॉल डिजाइन कर नवजात की सफल हार्ट सर्जरी

Saturday, May 02, 2020 15:55 PM
विषम परिस्थितियों में बच्चे के हार्ट की सर्जरी करने वाली टीम।

जयुपर। फोर्टिस हॉस्पिटल के शिशु हृदय रोग सर्जरी विषेशज्ञ डॉ. सुनिल कौशल ने 15 दिन के बच्चे की दुर्लभ सफल आर्टियल स्वीच सर्जरी की। इस सर्जरी के दौरान डॉ. कौशल ने चिकित्सा जगत में नए आयाम स्थापित किए। डॉ. सुनील ने बताया की बच्चे को हृदय की दुर्लभ जन्मजात बीमारी थी, जिसे ट्रांसपोजीशन ऑफग्रेट आर्टरी कहा जाता है और उसका एक मात्र ईलाज आर्टियल स्वीच नामक हार्ट का ऑपरेशन ही है। डॉ. कौशल ने बताया कि जब बच्चा 5 दिन का था, उसी समय इस बीमारी का उच्च तकनीकों के द्वारा पता लगा लिया गया था। बच्चे की मां को खांसी व सांस लेने मे तकलीफ थी, जो कोरोना के सामान्य लक्षणों में से है।

डॉ. सुनिल कौशल ने बताया कि पूरे विश्व में कोरोना व इस दुर्लभ सर्जरी के बारे में किसी भी प्रकार का कोई उल्लेख उपलब्ध नहीं है कि कौनसी सावधानियों व तकनीकों से इस ऑपरेशन को किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि करीब 30 फीसदी मरीजों का कोरोना नेगेटिव टेस्ट भी पॉजिटिव हो सकता है। इस कारण ऑपरेशन बहुत सावधानी से सभी मरीजों को कोरोना पॉजिटिव मानकर करना पड़ता है। कई मामलों में मरीज की पहली कोरोना टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव निकलने के बाद दूसरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। डॉ. कौशल ने इस ऑपरेशन की जटिलताओं के बारे में बताया कि यह ऑपरेशन बच्चे के जन्म के कुछ दिनों में ही किया जाता है। इस समय बच्चे का हार्ट हाथ के अंगूठे के बराबर होता है। इस कारण बहुत ही सावधानी से सभी कार्य किए जाते है।

उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में PPE किट पहनकर ऑपरेशन करना अपने आप में बहुत ही दुष्कर है, क्योंकि PPE किट में सारा शरीर, हाथ-पांव पूर्ण रूप से ढके हुए रहते है और इतने छोटे से हार्ट का ऑपरेशन करना बहुत मुष्किल है। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन करना भी बहुत जरुरी था, क्योंकि ऑपरेशन नहीं करने की स्थिति में कुछ दिनों में बच्चे की जान जाना भी निश्चित है। वर्तमान समय में इसको करने की भारत व विश्व में कोई निर्धारित गाइडलाइन नहीं है, क्योंकि कोरोना एक बहुत ही घातक संक्रमण है और यह ऑपरेशन के दौरान चिकित्सा कर्मियों व दूसरे स्टॉफ में फैल सकता है। इसके लिए हमने कई सारे विशेषज्ञों से बातचीत की, लेकीन कोई भी इसका बेहतर जवाब नहीं दे पाया। ऐसे में हमने एक नीति बनाई जो कि पूर्ण रूप से सफल रही।

डॉक्टर ने बताया कि हमने बच्चे व मां दोनों के ही कोरोना टेस्ट जन्म के पूर्व से ही करवाना शुरू कर दिया, क्योंकि मां को खांसी व बुखार की शिकायत थी। ऐसे में गर्भ के दौरान यह संक्रमण बच्चे में फैलने को डर था। जन्म के बाद हमने बच्चे का भी सभी स्तरों का कोरोना टेस्ट करवाया, जो नेगेटीव था। ऑपरेशन की नई तकनीक के बारे में ओटी के प्रेशर को पॉजुटिव से न्यूट्रल किया, जिससे यदि कोई वायरस है तो वो तुरंत ही बाहर निकल जाए और ऑपरेशन के दौरान संक्रमण नहीं फैले, इसके लिए हड्डी रोगों के ऑपरेशन वाले स्पेस सूट व एचआईवी पॉजिटिव मरीजों के ऑपरेशन के दौरान काम में लिए जाने वाले ओटी सूट व तकनीक का प्रयोग किया गया, जो पूर्ण रुप से सफल रहा। ऑपरेशन के दौरान हमने तीन लेयर ओटी गाउन व दो लेयर मास्क का प्रयोग किया।

उन्होंने बताया कि स्पेस सूट व एचआईवी पॉजिटिव रोगियों के लिए काम ली जाने वाले ओटी सूट व तकनीक के सहारे से ऑपरेशन के दौरान निकलने वाला रक्त उस सूट पर ही लगा रहता है, फिसलकर जमीन पर नहीं गिरता है व मरीज का ऑपरेशन करने मे भी आसानी रही। ऑपरेशन बिना किसी संक्रमण के खतरे के सफल हुआ व बच्चा अब पूर्ण रुप से सुरक्षित है। इस तरह के तकनीकी समायोजन से किया जाने वाला संभवतया यह भारत का पहला सफल आर्टियल स्विच ऑपरेशन है।

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