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स्वास्थ्य

कोविड और पोस्ट कोविड मरीजों में हार्ट डिजीज का खतरा 15 प्रतिशत ज्यादा, अलर्ट रहने की जरूरत

Wednesday, January 06, 2021 12:45 PM
कॉन्सेप्ट फोटो।

जयपुर। पश्चिमी देशों के मुकाबले भारत में ह्रदय संबंधित मामले तीन गुना अधिक होते हैं। वहीं अब कोरोना वायरस द्वारा दिल पर बुरा प्रभाव पड़ने से डॉक्टरों की चिंताएं बढ़ा दी है। आंकड़ों के अनुसार कोरोना से संक्रमण होने पर हार्ट डिजीज का खतरा 10 से 15 प्रतिशत तक ज्यादा बढ़ जाता है। इंटरवेंशन कार्डियोलॉजी डायरेक्टर डॉ. संजीव के शर्मा ने बताया कि जैसे ही वायरस शरीर में जाता है तो साइटोकाइन स्टॉर्म होने के कारण क्लॉट टेंडेंसी बढ़ने लगती है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा काफी बढ़ जाता है। ये क्लॉट्स जब पैरों की नसों में बन जाते हैं तो मरीज को डीप वेन थ्रोम्बोसिस की समस्या होती है। फेफड़ों तक इन क्लॉट्स के पहुंचने पर पल्मोनरी एम्बोलिज्म नामक जानलेवा स्थिति बन जाती है। ब्रेन को ब्लड सप्लाई करने वाली कैरोटिड आर्टरी में क्लॉटिंग होने पर ब्रेन स्ट्रोक की स्थिति हो सकती है। जब वायरस हार्ट के अंदर मसल्स तक पहुंचता है, उन्हें भी डैमेज करता है। सांस की तकलीफ, हृदय संबंधी परेशानियां, मांसपेशियों में ब्रेकडाउन और सूजन जैसे लक्षण भी सामने आते हैं।

कोरोना से ठीक होने के बाद भी बढ़ रही समस्याएं
डॉ. शर्मा ने बताया कि पोस्ट कोविड सिंड्रोम के कारण भी कई मरीजों में हार्ट की समस्याएं सामने आ रही हैं। ओपीडी में कई ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जो कोविड नेगेटिव आ चुके हैं पर उन्हें सांस लेने में तकलीफ, सीने में लगातार दर्द, आॅक्सीजन की कमी जैसी समस्याएं आ रही हैं। ईसीजी और कार्डियक ट्रॉप्टी जैसे टेस्ट करने के बाद उनमें कार्डियक डिजीज सामने आ रहे हैं। जब यह वायरस मसल्स के साथ हार्ट के कंडक्शन टिशू में इनवॉल्व हो जाता है तो हार्ट ब्लॉक हो जाता है। ऐसे मरीजों में पेस मेकर तक लगाना पड़ सकता है। वहीं जिन मरीजों में डी-डाइमर ज्यादा है उन्हें लंबे समय तक ब्लड थिनर लेना पड़ सकता है।

अलर्ट रहने की जरूरत
डॉ. संजीव ने बताया कि बचाव पर भी ज्यादा ध्यान देना चाहिए। इसके लिए लोगों को अपना शुगर लेवल, ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखना होगा, खानपान बैलेंस रखें और परेशानी होने पर डॉक्टर के पास तुरंत जाए।

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