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स्वास्थ्य

बच्चों पर शोध: खांसी-जुकाम नहीं बल्कि बुखार के साथ उल्टी दस्त, पेट दर्द होने पर भी हो सकता है कोरोना

Wednesday, June 03, 2020 11:25 AM
कोरोना को लेकर बच्चों पर शोध।

जयपुर। अब तक खांसी जुकाम या बुखार के लक्षण होने पर ही कोरोना वायरस की पुष्टि होना माना जा रहा था। लेकिन बच्चों में बुखार के साथ उल्टी दस्त होने पर भी कोरोना वायरस होना पाया गया है। सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज जयपुर में बच्चों पर हुए एक शोध में इसकी पुष्टि हुई है। जेकेलोन हॉस्पिटल के वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ एवं सहायक प्रोफेसर डॉ. योगेश यादव और डॉ. कविता यादव ने सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज में यह शोध किया है। यह शोध उन्होंने एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुधीर भंडारी और जेकेलोन अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अशोक गुप्ता के निर्देशन में किया। यह शोध पत्र वर्ल्ड जनरल ऑफ पीडियाट्रिक में भेजा गया है। शोध में डॉ. टीकम चंद कुमावत, डॉ. बलबीर सिंह गुर्जर, डॉ. रूचि प्रतिहार का भी सहयोग रहा।

इस आधार पर किया शोध

डॉ. यादव के अनुसार एक 20 दिन का बच्चा बुखार एवं दस्त होने पर अस्पताल में भर्ती हुआ। उसमें शुरुआती लक्षणों में खांसी या सांस में दिक्कत नहीं थी। कोरोना जांच में बच्चा पॉजिटिव निकला। 3 अन्य बच्चे भी पेट दर्द, उल्टी और दस्त के साथ बुखार होने पर भर्ती हुए। उनमें भी खांसी या सांस में दिक्कत नहीं थी। ये बच्चे भी जांच में कोरोना पॉजिटिव पाए गए। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि ऐसे बच्चों में शायद वायरस का इन्फेक्शन पेट के रास्ते से हुआ होगा। क्योंकि पेट में भी वायरस के इसीई 2 रिसेप्टर मिलते हैं।

शोध पत्र में यह भी पाया गया कि सबसे मुख्य लक्षण बुखार था। उसके बाद में सांस में दिक्कत और खांसी रही, पेट की समस्याएं जैसे कि दस्त उल्टी और पेट दर्द संक्रमित बच्चों में 4 प्रतिशत पाई गई। एक बच्चे में सिर दर्द और एक अन्य बच्चे में बुखार के साथ दौरे आने की समस्या भी कोरोना वायरस इन्फेक्शन में मिली। इसके अलावा गंभीर बच्चों में रक्त के अंदर लिंफोसाइट काउंट और प्लेटलेट काउंट भी कम मिले। साथ ही कुछ ऐसे बच्चे भी मिले जिनके कोई लक्षण नहीं थे लेकिन एक्स-रे में उनको काफी ज्यादा निमोनिया मिला। इसके अलावा कुछ बच्चे ऐसे भी मिले, जिनमें संक्रमण और बुखार तो था लेकिन एक्स-रे इसके बावजूद नॉर्मल पाए गए।

अप्रैल व मई माह में भर्ती बच्चों पर शोध
शोध के लिए अप्रैल व मई माह में भर्ती कोरोना वायरस के बच्चों को लिया गया है। यह शोध पत्र इस मामले में अहम है कि जहां चीन और अन्य देशों में बच्चों में संक्रमण की दर 1 से 3 साल के बच्चों में ज्यादा पाई गई थी। वही जयपुर में 48 पर्सेंट 10 साल से ज्यादा उम्र के बच्चे संक्रमित मिले हैं। इसके अलावा दूसरे देशों में जहां पर कुल बच्चों की सख्या कुल केसेज के 2.2 परसेंट ही थी। यहां पर बच्चों का अनुपात कुल संक्रमित केसेज का 10 प्रतिशत रहा। इसके अलावा यहां पर दूसरे देशों की तुलना में एसिंमप्टोमेटिक बच्चों की तादाद ज्यादा रही। दूसरे देशों में जहां पर 23 परसेंट बच्चों के कोई लक्षण नहीं पाए गए। हमारे यहां 84 प्रतिशत बच्चों में संक्रमण के बावजूद किसी प्रकार के लक्षण में नही पाएं गए। यह अंतर या तो इसलिए रहा कि यहां पर बीसीजी वैक्सीन ज्यादा लगाई जाती है। जिसके कारण से  यहां पर  कोरोना वायरस के प्रति हमारी इम्यूनिटी ज्यादा है या इसके अलावा हमारे यहां दूसरे वायरल इन्फेक्शन भी कॉमन है। जिनके कारण से शायद बच्चों में क्रॉस इम्यूनिटी ज्यादा है। जिससे बच्चों में इन वायरस के लक्षण ज्यादा दिखाई नहीं देते।

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