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स्वास्थ्य

कोरोना रोगियों के लिए संजीवनी बनी प्लाज्मा थेरेपी, महात्मा गांधी अस्पताल में वेबीनार में विशेषज्ञों ने दी जानकारी

Friday, August 21, 2020 18:30 PM
महात्मा गांधी अस्पताल में वेबीनार में जुटे एक्सपर्ट्स।

जयपुर। प्लाज्मा थेरेपी इलाज के लिए पहले भी काम में ली जाती रही है इस समय प्रयोग के तौर पर कोरोना रोगियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जा रहा है। इसमें काफी हद तक सफलता भी मिली है। यह जानकारी महात्मा गांधी अस्पताल के ब्लड बैंक एवं ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के निदेशक डॉ. राम मोहन जायसवाल ने दी। डॉ. जायसवाल शुक्रवार को कोविड-19 के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी विषय पर आयोजित ऑनलाइन मीटिंग को संबोधित कर रहे थे।  उन्होंने कहा कोरोना वायरस मुक्त होने के बाद अपना प्लाज्मा डोनेट कर गंभीर स्थिति में कोरोना रोगी को जीवनदान भी दे सकता है। उन्होंने बताया वर्तमान में कोरोना से ठीक हो चुके केवल 2 फीसदी रोगी प्लाज्मा डोनेट के लिए आगे आ रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में कोरोना रोगियों को इसकी आवश्यकता है। कोरोना के प्रभाव से मुक्त हो चुके व्यक्ति 18 से 50 आयु वर्ग का व्यक्ति 28 दिन बाद प्लाज्मा डोनेट कर सकता है।

वेबीनार में अस्पताल के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. रजत बोहरा ने कहा कि देश में वर्तमान में कोरोना के 29 लाख लोग संक्रमित हैं, जिनमें से 55000 की अकाल मौत हो चुकी है। राज्य में करीब 67000 कोरोना पॉजिटिव में से 50 हजार ठीक हो चुके है। लिवर, कैंसर और डायबिटीज के रोगी तथा उम्रदराज के कोरोना पॉजिटिव होने की संभावना अधिक है। इस अवसर पर मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ फिजिशियन डॉ. किशोर मुलरजानी ने कहा कि सांस लेने में परेशानी, बुखार, सिर दर्द, खांसी, गले में खराश और कमजोरी कोविड-19 लक्षण है। इसके लिए समय-समय पर बुखार की जांच, ऑक्सीजन लेवल की जांच की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जो रोगी अपने घर पर बैठे कोरोना का इलाज लेना चाहे तो उनके लिए महात्मा गांधी अस्पताल में सुरक्षा एट होम का पैकेज भी उपलब्ध है।

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