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स्वास्थ्य

पीठ से महाधमनी में घुसकर जांघ तक पहुंचा मशीन का टुकड़ा, सर्जरी कर पैर बचाया

Friday, September 25, 2020 11:10 AM
कॉन्सेप्ट फोटो।

जयपुर। जाको राखे साइंया, मार सके न कोय कहावत कोटा के 35 वर्षीय राजेंद्र कुमार (परिवर्तित नाम) के साथ चरितार्थ हुई। मार्बल की खदान में हुए एक हादसे में बंदूक की गोली से तेज रफ्तार में मशीन का टुकड़ा पीठ से उनकी छाती में घुसकर हृदय की महाधमनी को भेदता हुआ अंदर चला गया। वहीं रक्त के बहाव के साथ जांघ तक जा पहुंचा और जांघ की नस को बाधित कर दिया, जिसके कारण मरीज का पैर पैरालाईज (लकवा) जैसा हो गया। इस हादसे के कारण मरीज की छाती में खून भी भर गया था। ऐसे मामलों में महाधमनी छिलने से आंतरिक रक्तस्त्राव के कारण रोगी के बचने की संभावना न्यूनतम रहती है, लेकिन एक तरह से ईश्वरीय चमत्कार एवं शहर के नारायणा हॉस्पिटल की रेपिड इमरजेंसी रेस्पांस व कार्डियक सर्जरी टीम के संयुक्त प्रयासों से मरीज की जान बच गई। आश्चर्य वाली बात यह रही है कि जिस जगह महाधमनी छीली थी, वहां का जख्म थ्रोमबोसिस (ब्लड क्लॉटिंग) के कारण अपने आप ही भर गया, जो अपने आप में एक रेयर मामला है।

महाधमनी व दूसरे हिस्सों को पहुंचा नुकसान
हादसे में मशीन की ब्लेड का एक टुकड़ा टूटकर गोली से भी तेज रफ्तार से मरीज की पीठ में घुसा और हृदय की महाधमनी (एओर्टा) को भेदता हुआ रक्त के बहाव के साथ जांघ की बड़ी नस में चला गया और फंस गया। हादसे की वजह से मरीज खदान में ही अचेत सा हो गया था, उसे तुरंत पास के अस्पताल में ले जाया गया, जहां प्रारंभिक उपचार किया गया। मरीज के पैर में फिर भी दर्द, सूजन एवं लकवे जैसी स्थिति थी, इसलिए उसके परिजन उसे तुरंत जयपुर के नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल ले आए, जहां सीनियर कार्डियक सर्जन डॉ. अंकित माथुर ने उनका केस डायग्नोस किया और जटिल सर्जरी कर उनकी जान बचाई।

सर्जरी कर जांघ से निकाला 2 इंच का बड़ा टुकड़ा
नारायणा हॉस्पिटल के सीनियर कार्डियो-थोरेसिक व वैस्कुलर सर्जन डॉ. अंकित माथुर ने बताया कि ऐसे मामलों में रेपिड इमरजेंसी रेस्पांस एवं टीम वर्क का बहुत महत्व है। अगर समय पर मरीज के जांघ की सर्जरी नहीं की जाती तो पैर में गैंगरीन हो जाता और पैर काटना पड़ता। करीब 3 घंटे चली सर्जरी में 2 इंच से बड़े टुकड़े को पैर से बहुत सावधानी से, नस को नुकसान पहुंचाए बिना निकाला गया और फिर वहां पैच लगाया गया। छाती एवं महाधमनी में हुई क्षति को कंजर्वेटिवली (दवाईयों द्वारा) मैनेज किया गया। मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे अस्पताल से डिसचार्ज कर दिया गया है।
 

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