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स्वास्थ्य

देश में 40 लाख से अधिक लोग अल्जाइमर से पीड़ित

Saturday, September 21, 2019 09:40 AM
कॉन्सेप्ट फोटो

जयपुर। अल्जाइमर एक तरह की भूलने की बीमारी है जो सामान्यतया बुजुर्गों में 60 वर्ष के बाद शुरू होती है। इससे पीड़ित सामान रखकर भूल जाते हैं। यही नहीं, वह लोगों के नाम, पता या नंबर, खाना, अपना ही घर, दैनिक कार्य, बैंक संबंधी कार्य तक भूलने लगता है। अल्जाइमर बीमारी डिमेंशिया रोग का एक प्रमुख प्रकार है। डिमेंशिया के अनेक प्रकार होते हैं। इसलिए इसे अल्जाइमर डिमेंशिया भी कहा जाता है। अल्जाइमर डिमेंशिया प्रौढ़ावस्था और वृद्धावस्था में होने वाला रोग है, जिसमें मरीज की स्मरण शक्ति कमजोर होती जाती है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे यह रोग भी बढ़ता जाता है।

याददाश्त क्षीण होने के अलावा रोगी की सोच-समझ, भाषा और व्यवहार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। भारत में करीब 40 लाख से भी ज्यादा लोग इससे पीड़ित हैं। डॉक्टरों का कहना है कि 2030 में यह संख्या दोगुनी हो सकती है। राजस्थान में भी इस बीमारी के रोगियों में तेजी से इजाफा हो रहा है।

पारिवारिक और सामाजिक समर्थन जरूरी
विशेषज्ञों की मानें तो इस बीमारी के उपचार में दवा के साथ ही पारिवारिक और सामाजिक समर्थन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। व्यायाम और पोष्टिक भोजन जो कि याददाश्त को बढ़ाने में मदद करते हैं उनका सेवन ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए।

यह हैं लक्षण
यह एक दिमागी बीमारी है। जो मस्तिष्क की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है, जिससे शरीर की प्रक्रियाओं को नुकसान पहुंचता है। याददाश्त का कमजोर होना, समय और जगह से भटकना, एक ही सवाल को बार-बार पूछना, आसान गिनती न कर पाना, रिश्तेदारों के नाम भूलना और स्वभाव में बदलाव आना ये सभी अल्जाइमर होने के संकेत हैं। अल्जाइमर बीमारी, दिमाग में एमलौइड नामक प्रोटीन के इकत्रित होने से होती है।

परिजनों एवं मित्रों को पीड़ित के साथ शांत और सकारात्मक व्यवहार रखना चाहिए। उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुनें और सहज व सरल भाषा में संवाद करें।
- डॉ. अखिलेश जैन, विभागाध्यक्ष मनोचिकित्सा, ईएसआई मॉडल हॉस्पिटल जयपुर

यह एक प्रकार की न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। एक बार बीमारी होने के बाद कोई निश्चित उपचार नहीं होता है। दवा और इलाज के साथ ही परिवार के सदस्य और देखभाल करने वाले इन रोगियों को मुख्यधारा में लाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं।
- डॉ. निष्ठा जैन, न्यूरोलॉजिस्ट, शैल्बी हॉस्पिटल

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