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स्वास्थ्य

Video: जानिए, अस्थमा के इलाज से जुड़ी इनहेलेशन थैरेपी के बारे में

Tuesday, May 07, 2019 12:25 PM

जयपुर। जागरुकता का अभाव, बदलती जीवनशैली, अनुचित खानपान और उससे बढ़ता मोटापा सहित प्रदूषण से अस्थमा तेजी से बढ़ रहा है। जानकारी के अनुसार हर वर्ष कुल अस्थमा रोगियों की तुलना में दस प्रतिशत से ज्यादा नए अस्थमा रोगी बढ़ रहे हैं। मरीजों में इस बीमारी को लेकर जागरुकता का अभाव और डॉक्टर्स की ओर से मरीजों को सही जानकारी, दवा देने का तरीका चाहे वो ओरल हो चाहे इनहेलेशन हो दोनों ही मरीज को नही बताया जाना भी इस बीमारी के बढ़ने का आज के समय में बड़ा कारण है। इसके साथ ही बच्चों में आउटडोर गतिविधियों का कम होना और इंडोर एक्टीविटी का ज्यादा होना भी बच्चों में इसके बढ़ने की बड़ी वजह है। साथ ही इस बीमारी के प्रति जो भ्रांतियां समाज में फैली है जैसे कि इन्हेलेशन थेरेपी से जुड़ी भ्रांतियों को खत्म करना बेहद जरूरी है।

इसलिए कारगर है इनहेलेशन थैरेपी
एसएमएस अस्पताल के पूर्व वरिष्ठ अस्थमा एवं श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. नलिन जोशी ने बताया कि हर साल अस्थमा के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। इसके इलाज के लिए इनहेलेशन थेरेपी के प्रति लोगों की धारणा बदलना बेहद जरूरी है। किसी भी उपचार विधि के प्रभावशीलता और सुरक्षा के लिए दवा की सही तरीके से डिलीवरी महत्वपूर्ण है। इनहेलेशन थैरेपी के मामले में दवा सीधे श्वास मार्ग में छोटी खुराक के रूप में पहुंचती है जो उसके संभावित साइड इफेक्ट्स को सीमित कर देती है। ओरल मेडिकेशन में दवा की खुराक इनहेलेशन के मुकााबले कई गुना होती है। दवा की यह अधिक खुराक फिर शरीर के अन्य हिस्सों में भी पहुंचती है जहां पर इसकी जरूरत नहीं थी और सिस्टम में साइड इफेक्ट्स को बढ़ावा देती है।

सही तरीका सीखना जरूरी
डॉ. जोशी ने बताया कि इनहेलेशन थैरेपी ओरल थैरेपी के मुकाबले कई गुना कारगर है लेकिन यह तभी असर दिखाएगी जब मरीज को इसे लेने की सही विधि पता होगी और यह विधि मरीज को बताने का काम डॉक्टर्स का है। अगर डॉक्टर्स या उनका स्टाफ मरीज को सही विधि नहीं बताएगा तो मरीज ठीक ढंग से दवा नहीं ले पाएगा और उसका मर्ज भी ठीक नहीं होगा। ऐसे में डॉक्टर्स का मरीज को समय देना बेहद जरूरी है, जिससे उसकी भ्रांतियां दूर हो सके और मरीज का इलाज सही दिशा में हो पाए।

 

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