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स्वास्थ्य

जेके लॉन अस्पताल में अब 'लिसा तकनीक' से होगा नवजात शिशुओं का इलाज

Monday, May 18, 2020 12:15 PM
लिसा तकनीक से होगा नवजात शिशुओं का इलाज।

जयपुर। जेके लॉन हास्पिटल में नवजात शिशुओं के फेफड़ों को विकसित करने के लिए अब लिसा (लेस इनवेसिव सर्फेंक्टेंट एडमिनिस्ट्रेशन) तकनीक से उपचार किया जाएगा। जेके लॉन अधीक्षक डॉ. अशोक गुप्ता ने बताया कि नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में इस मशीन को रखा गया है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि नवजात शिशु इकाई में भर्ती ज्यादातर प्री मैच्योर बच्चे श्वास संबंधित बीमारी रेस्पिरेटरी डिस्ट्रैस सिंड्रोम से ग्रस्त होते हैं, जिसकी वजह से इन शिशुओं को जन्म के समय श्वास लेने में तकलीफ होती है। जिससे इन्हें वेंटिलेटर पर लेकर श्वास नली में इंडोट्राकेअल टयूब से सर्फेक्टेंट डाला जाता है तथा स्थिति में सुधार के बाद ही वेंटिलेटर से निकालने की कोशिश की जाती हैं एवं मरीज को सी-पैप मशीन का सपोर्ट दिया जाता है। नवजात को इस प्रक्रिया में जहां एक तरफ सांस लेने में फायदा मिलता है वहीं दूसरी तरफ टयूब एवं वेंटीलेटर के साइड इफैक्ट आने की संभावना बनी रहती है क्यूंकि प्री मैच्योर नवजात के फेफड़े अत्यंत नाजुक होते हैं। इन साइड इफैक्ट को कम करने के लिए लिसा तकनीक काफी महत्वपूर्ण है।

नवजात के फेफड़ों को क्षति से बचाना है उद्देश्य
नवजात गहन चिकित्सा इकाई के सह प्रभारी डॉ. विष्णु पंसारी (सहायक आचार्य) ने कहा कि डॉ. गुप्ता के निर्देशन में नवजात को सी-पैप मशीन पर रखते हुए वेंटीलेटर सपोर्ट व टयूब के बजाय सर्फेंक्टेंट दवा को बारीकी केथिटर से डालकर फेफड़ों को विकसित किया जाता है तथा बाद में कैथिटर को वापस निकाल लिया जाता है जिससे उसे वेंटिलेटर पर लेने की संभावना कम हो जाती है। इस तकनीक के इस्तेमाल का मुख्य उद्देश्य है नवजात के नाजुक फेफड़ों को ज्यादा से ज्यादा क्षति होने से बचाना हैं। अभी इस तकनीक से 1500 ग्राम से कम वजनी बच्चों का प्रारंभिक तौर पर उपचार किया जा रहा है।

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