Dainik Navajyoti Logo
Thursday 6th of May 2021
 
स्वास्थ्य

जेके लॉन अस्पताल में अब 'लिसा तकनीक' से होगा नवजात शिशुओं का इलाज

Monday, May 18, 2020 12:15 PM
लिसा तकनीक से होगा नवजात शिशुओं का इलाज।

जयपुर। जेके लॉन हास्पिटल में नवजात शिशुओं के फेफड़ों को विकसित करने के लिए अब लिसा (लेस इनवेसिव सर्फेंक्टेंट एडमिनिस्ट्रेशन) तकनीक से उपचार किया जाएगा। जेके लॉन अधीक्षक डॉ. अशोक गुप्ता ने बताया कि नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में इस मशीन को रखा गया है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि नवजात शिशु इकाई में भर्ती ज्यादातर प्री मैच्योर बच्चे श्वास संबंधित बीमारी रेस्पिरेटरी डिस्ट्रैस सिंड्रोम से ग्रस्त होते हैं, जिसकी वजह से इन शिशुओं को जन्म के समय श्वास लेने में तकलीफ होती है। जिससे इन्हें वेंटिलेटर पर लेकर श्वास नली में इंडोट्राकेअल टयूब से सर्फेक्टेंट डाला जाता है तथा स्थिति में सुधार के बाद ही वेंटिलेटर से निकालने की कोशिश की जाती हैं एवं मरीज को सी-पैप मशीन का सपोर्ट दिया जाता है। नवजात को इस प्रक्रिया में जहां एक तरफ सांस लेने में फायदा मिलता है वहीं दूसरी तरफ टयूब एवं वेंटीलेटर के साइड इफैक्ट आने की संभावना बनी रहती है क्यूंकि प्री मैच्योर नवजात के फेफड़े अत्यंत नाजुक होते हैं। इन साइड इफैक्ट को कम करने के लिए लिसा तकनीक काफी महत्वपूर्ण है।

नवजात के फेफड़ों को क्षति से बचाना है उद्देश्य
नवजात गहन चिकित्सा इकाई के सह प्रभारी डॉ. विष्णु पंसारी (सहायक आचार्य) ने कहा कि डॉ. गुप्ता के निर्देशन में नवजात को सी-पैप मशीन पर रखते हुए वेंटीलेटर सपोर्ट व टयूब के बजाय सर्फेंक्टेंट दवा को बारीकी केथिटर से डालकर फेफड़ों को विकसित किया जाता है तथा बाद में कैथिटर को वापस निकाल लिया जाता है जिससे उसे वेंटिलेटर पर लेने की संभावना कम हो जाती है। इस तकनीक के इस्तेमाल का मुख्य उद्देश्य है नवजात के नाजुक फेफड़ों को ज्यादा से ज्यादा क्षति होने से बचाना हैं। अभी इस तकनीक से 1500 ग्राम से कम वजनी बच्चों का प्रारंभिक तौर पर उपचार किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें:

स्ट्रोक का सही समय पर इलाज कर 34 वर्षीय महिला मरीज की बचाई जान

जयपुर शहर के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टमी तकनीक से स्ट्रोक से पीड़ित एक 34 वर्षीय महिला मरीज की जान बचाने में सफलता प्राप्त की है। दरअसल मरीज को हाल ही में जब दुर्लभजी अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया था तब उसे अचेतन अवस्था के साथ ही शरीर के बाएं हिस्से में लकवे की शिकायत थी।

24/01/2021

सिर में बिजली कौंधने जैसा दर्द तो हो सकता है ट्राइजेमिनल न्यूरोलजिया, लापरवाही हो सकती है जानलेवा

सिर दर्द कई तरह का होता है, लेकिन अगर आपको सिर व चेहरे पर बिजली कौंधने जैसा तेज दर्द हो तो आपको सावधान होने की जरूरत है। यह गंभीर न्यूरो डिजिज ट्राइजेमिनल न्यूरोलजिया हो सकती है। आमतौर पर युवाओं में ज्यादा देखे जाने वाली इस बीमारी में दर्द का पहला अटैक आते ही बिना देर किए विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

22/01/2021

लिगामेंट चोट में अब नई डबल बंडल तकनीक

एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट घुटनों की चोट में सर्वाधिक चोटिल होने वाला लिगामेंट है। लिगामेंट दो हड्डियों की संरचना को जोड़ने वाली इकाई है, जो हड्डियों की चाल को आसान बनाती है।

08/05/2019

विश्व के 83 और भारत के 89 प्रतिशत लोग तनाव में जी रहे : वांगचुक

जयपुरिया इंस्टीट्यूट आॅफ मैनेजमेंट, जयपुर में सोमवार को भूटान के पूर्व शिक्षा मंत्री नोरबू वांगचुक का हैप्पीनेस लैसंस फ्रॉम भूटान विषय पर इंटरेनशनल गेस्ट सैशन आयोजित किया गया।

05/11/2019

पेल्विक बोन ट्यूमर की जटिल सर्जरी, महात्मा गांधी अस्पताल में हुआ सफल ऑपरेशन

महात्मा गांधी अस्पताल के चिकित्सकों ने झुंझुनूं जिले की 14 वर्षीय किशोरी के पेल्विक बोन ट्यूमर की सफल सर्जरी की है। किशोरी अपने बाएं कूल्हे (पेल्विक रीजन) में दर्द को लेकर अस्पताल भर्ती हुई। जांच में उसे इविंग्स सारकोमा नामक कैंसर की पुष्टि हुई। यह बीमारी लाखों में से किसी एक को होती है।

31/01/2021

देश में 16 प्रतिशत बच्चों में बिस्तर गीला करने की बीमारी

देश में स्कूल जाने की उम्र वाले 12 से 16 प्रतिशत बच्चे सोते समय बिस्तर गीला करने की समस्या से जूझ रहे हैं। यह समस्या न सिर्फ उनके व्यक्तित्व को प्रभावित करती है बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी कमजोर कर रही है।

06/04/2019

नई तकनीकों से संभव है ब्रेन ट्यूमर का इलाज

30 साल के हुलासमल और 50 साल की यशोदा को जब पता चला कि उन्हें ब्रेन ट्यूमर है तो मानों उनकी जिंदगी जैसे थम सी गई थी। जबकि नई तकनीकों से ब्रेन ट्यूमर का ईलाज संभव है और व्यक्ति जिंदगी पहले की तरह ही जी सकता है।

08/06/2019