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स्वास्थ्य

युवा ले रहे अत्यधिक स्टेरोयड्स, हो रही ये बीमारी

Saturday, October 12, 2019 11:35 AM
कॉन्सेप्ट फोटो

जयपुर। आमतौर पर बुढ़ापे में सताने वाला आर्थराइटिस रोग अब युवाओं में भी देखने को मिल रहा है। बॉडी बनाने के लिए स्टेरोइड सेवन, स्पोर्ट्स इंजरी की अनदेखी, फिजिकल एक्टीविटी नहीं करने के कारण युवाओं में यह बीमारी सामने आ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर रह-रह कर हाथ-पैर की अंगुलियों, घुटनों और एड़ियों में दर्द होता है तो समझ जाइए कि आपके खून में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ गई है। यह हाथ-पैरों के जोड़ों में क्रिस्टल के रूप में जम जाता है और आर्थराइटिस का रूप ले लेता है। आर्थराइटिस की बड़ी वजह बिगड़ी लाइफ स्टाइल तो है ही, मोटापा भी बड़ा कारण है।

नियमित व्यायाम से रखें जोड़ मजबूत
नारायणा हॉस्पिटल के ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. विजय शर्मा ने बताया कि, नियमित रूप से व्यायाम, बैलेंस डाइट, वजन नियंत्रित एवं चोटों से बचाव बहुत जरूरी है। हफ्ते में कम से कम 5 दिन 45 मिनट व्यायाम जरूर करें। जॉगिंग, ब्रिस्क वॉक, साइकिलिंग भी करें। आर्थराइटिस एक उम्र तक स्त्री व पुरुष में बराबर पाया जाता है, लेकिन 50 की उम्र के करीब स्त्रियों में ज्यादा हो जाता है, क्योंकि मीनोपोज के बाद हार्मोन्स की रक्षात्मक क्षमता खत्म हो जाती है। जोड़ों के दर्द के लिए सही समय पर डॉक्टरी सलाह लेने से आरामदेह जिंदगी जीने में मदद मिल सकती है।

आर्थोपेडिक्स में आधुनिक इलाज ने गठिया रोग को मैनेज करने में क्रांतिकारी बदलाव किया है। रोग के इलाज के पारंपरिक विकल्पों से लेकर सर्जिकल तरीकों जैसे मामूली सर्जरी और जॉइंट रिप्लेसमेंट थेरेपी से गठिया का आसानी से इलाज कराकर उसे मैनेज किया जा सकता है।

सुबह देर तक जोड़ों में जकड़न तो गठिया
गठिया रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल जैन ने बताया कि, आर्थराइटिस में सबसे आम आॅस्टियो आर्थराइटिस व रूमेटायड आर्थराइटिस है। सुबह उठने पर जोड़ों में जकड़न सी महसूस होती है और दर्द व सूजन दिखती है और यह स्थिति आधे घंटे तक रहती है, तो यह गठिया हो सकता है।

युवाओं में स्पोर्ट्स इंजरी प्रमुख कारण
नारायणा के ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन व आॅर्थोस्कॉपी स्पेशलिस्ट डॉ. हेमेन्द्र अग्रवाल ने बताया कि खेल के दौरान सावधानी नहीं रखने से अक्सर खिलाड़ियों में गंभीर चोटें लग जाती हैं, जो आगे जाकर आर्थराइटिस का कारण बन जाती हैं। वहीं स्टेरोइड का सेवन, एवीएन, हड्डियों की टीबी भी युवाओं में इस रोग का कारण हैं।

वजन काबू में रखें, स्मोकिंग से बचें
हैंड एंड माइक्रोवेस्कुलर सर्जन डॉ. गिरीश गुप्ता बताते हैं कि वजन काबू में रखने से इस रोग से बचाव हो सकता है, क्योंकि ज्यादा वजन जोड़ों पर ज्यादा असर डालता है। धूम्रपान करना दिल, फेफड़ों के साथ हड्डियों के लिए भी नुकसानदेह है।

 

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