Dainik Navajyoti Logo
Friday 22nd of October 2021
 
स्वास्थ्य

मौमसी बीमारियों के कारण जेकेलोन में बढ़ाए जाएंगे बैड्स : कोरिडोर में भी लगेंगे एक्स्ट्रा बैड्स

Thursday, October 14, 2021 13:20 PM
कॉन्सेप्ट फोटो

जयपुर। मौसमी बीमारियों की वजह से इन दिनों बच्चों को ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते शहर के बच्चों के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल जेकेलोन में बैड्स तो फुल हैं हीं साथ ही आईसीयू में भी जगह नहीं है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन ने बुधवार को बैठक कर कई निर्णय लिए। इनमें अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बैड्स की संख्या बढ़ाने पर सहमति बनी है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरविंद शुक्ला ने बताया कि अस्पताल में 80 बैड्स और बढ़ाए जाएंगे। इन बैड्स को अस्पताल में खाली पड़ी जगह जैसे कोरिडोर और अन्य जगहों पर लगाया जाएगा। जिससे आने वाले बच्चों को बैड्स की समस्या का सामना नहीं करना पड़े। इसके साथ ही थैलेसीमिया, हिमोफीलिया जैसी बीमारी के लिए अस्पताल के डे केयर में इलाज के लिए आने वाले कम गंभीर मरीजों को सेठी कॉलोनी स्थित सैटेलाइट अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा। इसके साथ ही आरयूएचएस में भी 200 बैड्स रिजर्व होने के कारण बच्चों को आरयूएचएस भी भेजा जाएगा।

सभी आईसीयू और बैड्स फुल
अस्पताल में इन दिनों बीमार बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में अस्पताल के सभी 250 आईसीयू बैड्स फुल हो चुके हैं। साथ ही करीब 770 बैड्स भी लगभग फुल हैं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन ने बैठक कर आने वाले दिनों में मरीजों की और बढ़ती संख्या को देखते हुए बैड्स और व्यवस्थाओं को बढ़ाने का निर्णय लिया है।

इधर...एसएमएस अस्पताल के सैंपल कलेक्शन सेंटर पर भीड़
इन दिनों मौसम में बदलाव के कारण अस्पतालों में मौमसी बीमारियों जैसे डेंगू-मलेरिया, वायरल बुखार आदि के मरीजों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। एसएमएस अस्पताल के ब्लड कलेक्शन सेंटर पर भी इन दिनों आम दिनों के मुकाबले दोगुने मरीज सैंपल देने पहुंच रहे हैं। अस्पताल में ओपीडी में इस समय 8 से 10 हजार मरीज आ रहे हैं तो इनमें से करीब दो से तीन हजार मरीज मौसमी बीमारियों के आ रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर मरीजों को डेंगू-मलेरिया सहित वायरल बुखार की जांचें लिख रहे हैं और जांच केन्द्रों पर भीड़ बढ़ रही है। इस दौरान मरीजों को सैंपल जमा कराने के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है।   

परफेक्ट जीवनसंगी की तलाश? राजस्थानी मैट्रिमोनी पर निःशुल्क  रजिस्ट्रेशन करे!

यह भी पढ़ें:

SMS अस्पताल: हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को वेलिंलेटर से हटाया, तबीयत में हो रहा सुधार

सवाई मानसिंह अस्पताल (SMS) में जिस मरीज का हार्ट ट्रांसप्लांट हुआ, उस मरीज को वेंटिलेटर से हटा दिया गया है और उसकी तबीयत में सुधार है।

17/01/2020

स्ट्रोक का सही समय पर इलाज कर 34 वर्षीय महिला मरीज की बचाई जान

जयपुर शहर के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टमी तकनीक से स्ट्रोक से पीड़ित एक 34 वर्षीय महिला मरीज की जान बचाने में सफलता प्राप्त की है। दरअसल मरीज को हाल ही में जब दुर्लभजी अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया था तब उसे अचेतन अवस्था के साथ ही शरीर के बाएं हिस्से में लकवे की शिकायत थी।

24/01/2021

प्रदेश में खुलेगा पहला सरकारी होम्योपैथी कॉलेज, चिकित्सा मंत्री ने की घोषणा

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि अन्य चिकित्सा पद्धतियों के साथ लोगों में होम्योपैथी के प्रति भी विश्वास बढ़ रहा है। यही वजह है कि सरकार ने 24 तरह की होम्योपैथी दवाओं को ‘ट्रिपल ए’ यानी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा सहयोगिनी और एएनएम के जरिए आमजन तक पहुंचाने की योजना बनाई है।

05/12/2019

दक्षिण कोरिया के नौसेना स्टेशन में विस्फोट के बाद एक की मौत, 3 घायल

दक्षिण कोरिया के दक्षिण पूर्व में एक नौसेना स्टेशन पर एक पनडुब्बी पर मरम्मत के काम के दौरान दुर्घटनावश विस्फोट होने के बाद एक सैनिक की मौत हो गई और अन्य लापता हैं.

16/08/2016

पेल्विक बोन ट्यूमर की जटिल सर्जरी, महात्मा गांधी अस्पताल में हुआ सफल ऑपरेशन

महात्मा गांधी अस्पताल के चिकित्सकों ने झुंझुनूं जिले की 14 वर्षीय किशोरी के पेल्विक बोन ट्यूमर की सफल सर्जरी की है। किशोरी अपने बाएं कूल्हे (पेल्विक रीजन) में दर्द को लेकर अस्पताल भर्ती हुई। जांच में उसे इविंग्स सारकोमा नामक कैंसर की पुष्टि हुई। यह बीमारी लाखों में से किसी एक को होती है।

31/01/2021

छह दिन में दूसरी बार बदलाव, अब डॉ. गुप्ता होंगे जयपुरिया अधीक्षक

राणावत के बाद डॉ. धर्मेश को लगाया था अधीक्षक

13/10/2021

बिना चीरफाड़ के अत्याधुनिक तकनीक से बदला हार्ट वॉल्व, मरीज की पहले हो चुकी बायपास सर्जरी

अधिक उम्र पर बायपास सर्जरी का इतिहास एवं कैंसर का सफल उपचार करा चुके 73 वर्षीय नरेन शर्मा (परिवर्तित नाम) को फिर से जब हृदय की गंभीर बीमारी हुई तो अत्याधुनिक तकनीक उनके लिए वरदान साबित हुई। ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व इम्प्लांटेशन(टावी) द्वारा मरीज की सिकुड़ी हुई एओर्टिक वॉल्व को बिना ओपन चेस्ट सर्जरी के बदल दिया।

06/01/2020