Dainik Navajyoti Logo
Thursday 20th of January 2022
 
स्वास्थ्य

सीओपीडी से होने वाली मौतों के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर, राजस्थान की भी स्थिति बेहद खराब

Wednesday, November 17, 2021 14:15 PM
वर्ल्ड copd डे के अवसर आयोजित एक कार्यक्रम में वरिष्ठ अस्थमा एवं स्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने जानकारी देते हुए।

जयपुर। वर्ल्ड copd डे के अवसर आयोजित एक कार्यक्रम में वरिष्ठ अस्थमा एवं स्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि"लगातार धुएं वाले कारकों के संपर्क में आने से और बार-बार लंग संक्रमण के संपर्क से अंतर्निहित सीओपीडी बढ़ सकता है जिससे फेफड़े का दौरा पड़ता है। सीओपीडी पर जागरूकता की कमी की वजह से लोग डॉक्टर्स के पास नहीं जाते हैं जो कि इसके रोकथाम में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। सीओपीडी के लक्षणों की पहचान करना और लंग-अटैक होने पर चिकित्सक से समय पर सहायता प्राप्त करना इस रोग की प्रगति को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है। यदि धूम्रपान करने वालों को यह पता हो कि इससे लंग-अटैक हो सकता है तथा जिसके लिए तत्काल चिकित्सा ध्यान देने की आवश्यकता होती है, वे समय से चिकिसकीय सहायता ले लेंगे। रोग के निदान के लिए नियमित रूप से फेफड़ों के कार्य की जाँच तथा सीओपीडी के जोखिम कारकों कि जांच आवश्यक है।

फेफड़े के कार्य परीक्षण कि जांच स्पिरोमेट्री से करनी चाहिए जो कि सीओपीडी के निदान के लिए गोल्ड स्टैण्डर्ड है। हालांकि यह आमतौर पर नहीं जांचा जाता है, और निदान काफी हद तक रोगी के इतिहास और लक्षणों पर आधारित होता है। स्पिरोमेट्री नहीं करने की वजह से सीओपीडी के बहुत से मामले जांच में छूट सकते हैं।

डायग्नोसिस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ वीरेंद्र सिंह ने आगे कहा, "प्रारंभिक स्क्रीनिंग और डायग्नोसिस फेफड़ों के अटैक के रोग के बोझ को कम करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। श्वसन रोग संबंधी लक्षणों वाली आबादी में स्पिरोमेट्री टेस्ट महत्वपूर्ण है क्योंकि यह गलत डायग्नोसिस से बचाती है और वायु प्रवाह सीमा की गंभीरता का मूल्यांकन करने में सहायता करती है। जबकि सांस की बीमारियों के कारण पूरी तरह से आपके नियंत्रण में नहीं हो सकते हैं फिर भी समय पर पता लगाने के लिए सतर्क और जागरूक रहना महत्वपूर्ण है।

परफेक्ट जीवनसंगी की तलाश? राजस्थानी मैट्रिमोनी पर निःशुल्क  रजिस्ट्रेशन करे!

यह भी पढ़ें:

नई तकनीकों से संभव है ब्रेन ट्यूमर का इलाज

30 साल के हुलासमल और 50 साल की यशोदा को जब पता चला कि उन्हें ब्रेन ट्यूमर है तो मानों उनकी जिंदगी जैसे थम सी गई थी। जबकि नई तकनीकों से ब्रेन ट्यूमर का ईलाज संभव है और व्यक्ति जिंदगी पहले की तरह ही जी सकता है।

08/06/2019

इंसुलिनोमा टयूमर की हुई पहचान, मोलिक्यूर फंक्शनल इमेजिंग टेस्ट के जरिए कैंसर की जांच

शरीर में इंसुलिन की मात्रा को तेजी से बढ़ाने वाले कैंसर 'इंसुलिनोमा टयूमर' की पहचान राज्य में पहली बार हुई है। प्रदेश के भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के न्यूक्लियर मेडिसन विभाग में इस रेयर टयूमर को डायग्नोस किया गया है।

11/09/2019

धरती के भगवन नदराद, मरीज परेशान

रेजिडेंट्स डॉक्टर्स हड़ताल पर, मरीज हो रहे परेशान : नीट कॉउंसलिंग में देरी का विरोध कर रहे देशभर के रेजिडेंट डॉक्टर्स

29/11/2021

अस्पतालों में ड़ेंगू मरीजो की भीड़, बैड फुल

एसएमएस, जेकेलोन, कांविटया सहित जयपुर के सभी अस्पतालों में मरीजों का हाउसफुल : निजी अस्पतालों में भी काफी संख्या में पहुंच रहे मरीज

11/11/2021

CBSE की 10वीं-12वीं की परीक्षा के नतीजे जल्द, 9वीं, 11वीं के छात्रों को फेल होने पर मिलेगा एक और मौका

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन जारी है और 50 दिन के भीतर यह काम पूरा हो जाएगा तथा जल्दी ही परीक्षा के नतीजे आ जाएंगे।

14/05/2020

विषम परिस्थितियों में नई तकनीक व प्रोटोकॉल डिजाइन कर नवजात की सफल हार्ट सर्जरी

फोर्टिस हॉस्पिटल के शिशु हृदय रोग सर्जरी विषेशज्ञ डॉ. सुनिल कौशल ने 15 दिन के बच्चे की दुर्लभ सफल आर्टियल स्वीच सर्जरी की। इस सर्जरी के दौरान डॉ. कौशल ने चिकित्सा जगत में नए आयाम स्थापित किए। डॉ. सुनील ने बताया की बच्चे को हृदय की दुर्लभ जन्मजात बीमारी थी, जिसे ट्रांसपोजीशन ऑफग्रेट आर्टरी कहा जाता है और उसका एक मात्र ईलाज आर्टियल स्वीच नामक हार्ट का ऑपरेशन ही है।

02/05/2020

वैक्सीन के लिए उमड़ा जन सैलाब : 15 लाख को वैक्सीन लगाने का टारगेट

जिले में 400 से ज्यादा सेंटर्स ओर कैम्प्स के जरिये लगाई जा रही है वैक्सीन

17/09/2021