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स्वास्थ्य

बिना चीरफाड़ के अत्याधुनिक तकनीक से बदला हार्ट वॉल्व, मरीज की पहले हो चुकी बायपास सर्जरी

Monday, January 06, 2020 11:10 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

जयपुर। अधिक उम्र पर बायपास सर्जरी का इतिहास एवं कैंसर का सफल उपचार करा चुके 73 वर्षीय नरेन शर्मा (परिवर्तित नाम) को फिर से जब हृदय की गंभीर बीमारी हुई तो अत्याधुनिक इलाज तकनीक उनके लिए वरदान साबित हुई। ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व इम्प्लांटेशन (टावी) द्वारा मरीज की सिकुड़ी हुई एओर्टिक वॉल्व को बिना ओपन चेस्ट सर्जरी के बदल दिया। नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में इस केस में पहली बार टावी तकनीक से बिना चीरफाड़ नया हार्ट वॉल्व लगाया गया।

हॉस्पिटल के डॉ. सीपी श्रीवास्तव, डॉ. देवेन्द्र श्रीमाल और डॉ. माणिक चोपड़ा की टीम ने सफलतापूर्वक इस अत्याधुनिक तकनीक से ऑपरेशन के जरिए मरीज को नया जीवन दिया। प्रदेश में चुनिंदा ही हॉस्पिटल है जिनमें टावी के लिए एक प्रशिक्षित टीम है। हॉस्पिटल के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. देवेन्द्र श्रीमाल ने बताया मरीज फाइटर की बीमारियों से लड़ रहा था और 2013 में मल्टीपल ब्लॉकेज के कारण उनकी हॉस्पिटल में ही बायपास सर्जरी हुई थी।

परिजनों ने चुनी तकनीक
पिछले दिनों बायपास सर्जरी के सभी ग्राफ्ट्स सुचारू रूप से काम कर रहे थे तभी एक नई बीमारी एओर्टिक स्टेनोसिस कैल्शियम जमाव के कारण वॉल्व में सिकुड़न डायग्नोसिस हुई। स्टेनोसिस के कारण हृदय की ब्लड पम्प करने की क्षमता प्रभावित हो जाती है, जिससे रोगी में सांस फूलने, छाती में दर्द के लक्षण दिखते हैं। मरीज की बढ़ी उम्र और पूर्व चिकित्सकीय इतिहास को देखते हुए परिजनों ने टावी तकनीक को चुना।

जांघ के जरिए बदला प्रभावित वॉल्व
टावी एक्सपर्ट डॉ. माणिक चोपड़ा ने बताया इस प्रक्रिया में एक छोटा चीरा लगाकर जांघ के पास से बायो प्रोस्थेटिक वॉल्व को प्रभावित वॉल्व तक पहुंचाया, क्योंकि प्रक्रिया बिना सर्जरी के होती है इसलिए मरीज अगले ही दिन से पूरी तरह से सक्रिय हो जाता है। डेढ़ घंटे में टावी तकनीक से हमने मरीज का प्रभावित वॉल्व बदल दिया और अगले दिन वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया। अब मरीज ने पूरी तरह से रिकवर कर लिया है और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया है।

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