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स्वास्थ्य

हार्ट फेल और खराब फेफड़े होने पर एक्मो तकनीक से बच सकती है जान, वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने दी ट्रेनिंग

Monday, January 20, 2020 11:35 AM
एक्मो तकनीक के बारे में जानकारी देते हुए विशेषज्ञ।

जयपुर। कई बार मरीजों को गंभीर कार्डियक फेलियर, फेफड़े खराब होने के कारण सांस की तकलीफ, गंभीर निमोनिया, स्वाइन फ्लू या जहरीले धुएं के कारण अस्पताल में इमरजेंसी में लाया जाता है। वहां उन्हें बचाने के लिए वेंटिलेटर सपोर्ट भी पर्याप्त नहीं होता। मरीज का हृदय या फेफड़े सामान्य रूप से कार्य करने में सक्षम नहीं रहते और रोगी सांस लेने में असमर्थ हो जाता है। ऐसे मरीजों की जान उन्नत एक्मो तकनीक से बचाई जा सकती है। नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में रविवार को हुई एक दिवसीय वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने एक्मो तकनीक पर यह जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने बताया कि यह अत्याधुनिक लाइफ सपोर्ट तकनीक है जो मरीज की श्वसन क्रिया में तब तक सपोर्ट करती है जब तक कि रोगी के फेफड़े या हृदय सुचारू रूप से काम करने की स्थिति में नहीं आ जाते है। वर्कशॉप में 100 से अधिक कार्डियक सर्जन, क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट्स, फिजिशियन, श्वास रोग विशेषज्ञ, इमरजेंसी स्टाफ ने भाग लिया। प्रतिभागियों को एक्मो मशीन इस्तेमाल करने की प्रैक्टिल ट्रेनिंग दी गई। हॉस्पिटल के एनेस्थिसिया व क्रिटिकल केयर विभाग के अध्यक्ष और क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. प्रदीप गोयल ने बताया कि यह तकनीक उन लोगों को लंबे समय तक हृदय और श्वसन से संबंधित सहायता प्रदान करती है, जिनके दिल या फेफड़े कुछ कारणवश अस्थायी रूप से शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन देने में असमर्थ हो जाते है।

मशीन से बाहर निकालते हैं पूरा खून
इस तकनीक में मरीज के शरीर का पूरा खून मशीन से बाहर निकालते हैं। फिर उसमें जरूरत के अनुसार ऑक्सीजन शामिल कर प्रेशर से वापस शरीर में प्रवाह किया जाता है। इससे बीपी तो ठीक होता ही है, साथ ही फेफड़ो व हार्ट के खून में ऑक्सीजन की मात्रा भी सही हो जाती है। मुंबई के पीडियाट्रिक्स इमरजेंसी व क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ अमीश वोरा ने बताया कि ऐसे केस में एक्मो तकनीक मरीज की जान बचाने का अंतिम विकल्प होता है। जब मरीज के शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बनाए रखने के लिए वेंटिलेटर भी पर्याप्त नहीं होता है, तब एक्मो तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।

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