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स्वास्थ्य

भारतीयों में आंखों की बढ़ती बीमारी से चिंता

Saturday, October 12, 2019 10:55 AM
कॉन्सेप्ट फोटो

नई दिल्ली। विश्व दृष्टि दिवस पर हाल में जारी एक शोध के नतीजे में कहा गया है कि भारतीयों में दृष्टि दोष या आंखों के कमजोर और बीमार होने के मामले हाल में बहुत बढ गए हैं। यह शोध कार्य सिग्नीफाई ने जारी किया है। जो प्रकाश व्यवस्था के मामले में दुनिया में अव्वल है। इसे पहले फिलिप्स लाइटिंग के नाम से जाना जाता था। उपरोक्त शोधकार्य भारत के दस नगरों में  एक हजार वयस्क लोगों और 300 नेत्रविज्ञानियों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। इस शोध में कहा गया है कि दृष्टिदोष वाले भारतीयों की संख्या में हाल के वर्षों में भारी वृद्धि हुई है। यह आंकड़ा 65 प्रतिशत तक है, जबकि वयस्क भारतीयों का कहना है कि अच्छी नेत्रज्योति एक बेहतरीन जीवनयापन के लिए अनिवार्य है। फिर भी बहुतकम लोग आंखों को स्वस्थ रखने लिए सचेष्ट रहते हैं।

इस शोध से यह भी पता चला है कि अधिकतर भारतीय प्रतिदिन 14 घंटे से भी अधिकतर घरों या दफ्तरों के कमरे में रहते हैं। जहां कृत्रिम प्रकाश रहता है। अत: इस प्रकाश की गुणवत्ता अच्छी आंखों के लिए जरूरी है। नेत्र विज्ञानी कहते हैं कि 75 फीसदी भारतीय प्रतिदिन 10 घंटे कम्प्यूटर स्क्रीन पर देखते रहने के बाद आंखों में जलन की शिकायत करते हैं। बीस से 35 वर्ष  के युवक और युवती आंखों में जलन, तनाव और आंखों के लाल हो जाने की शिकायत करते हैं।  फिर भी अधिकतर भारतीय आंखों के प्रति लापरवाह बने रहते हैं।

बहुत कम भारतीय कराते हैं आंखों की जांच
पांच में से कोई एक भारतीय ही नियमित आंखों की जांच कराता है। करीब 84 प्रतिशत भारतीय स्वीकारल करते हैं कि आंखों के स्वास्थ्य के मामले में वे डॉक्टरों की सलाह पर ध्यान नहीं देते। नेत्रविज्ञानियों का कहना है कि खराब प्रकाश व्यवस्था और खराब जीवन शैली भारतीयों में आंखों की बीमारी उत्पन्न करती है।

 

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